गोरखपुर। मुख्यमंत्री की सख्ती और प्रशासनिक निर्देशों के बाद औषधि संचालन में गड़बड़ी के आरोपों पर शुक्रवार को ड्रग विभाग की टीम ने कड़ी कार्रवाई करते हुए जिला अस्पताल के पास स्थित चार मेडिकल स्टोर्स पर छापा मारा। टीम ने दुकानों की लाइसेंस व दवा स्टॉक की काग़ज़ी जांच की और अनियमितताएँ पाई जाने पर ताले जड़वा दिए। टीम ने दुकानों की चाबियाँ अपने पास रख लीं और कागज़ी कार्रवाई पूरी होने तक दुकानों को खोलने से मना कर दिया गया है।
कार्रवाई की वजह और जांच
जांच में आरोप आया कि अस्पताल परिसर के आस-पास के कुछ मेडिकल स्टोर मरीजों व तीमारदारों को सस्ती दवा का झाँसा देकर बहकाते हैं और असल में उन्हें कम गुणवत्ता या अनुचित तरीके से दवाइयाँ उपलब्ध कराते हैं। प्रशासन का कहना है कि कई दुकानें बिना सही लाइसेंस के संचालित हो रही थीं और बिक्री के तरीके मानक के अनुरूप नहीं थे। इस पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बाद ड्रग विभाग की टीम ने मौके पर जाकर लाइसेंस, बिल-पर्चे तथा दवाओं के स्टॉक की जांच शुरू कर दी।
किन दुकानों पर कार्रवाई हुई
जांच में जिन दुकानों के नाम सामने आए, उनमें अंकित मेडिकल स्टोर, न्यू किशन मेडिकल स्टोर, विक्की मेडिकल स्टोर और रवि मेडिकल स्टोर शामिल हैं। इन दुकानों के संचालन में नियमों का पालन नहीं पाया गया और इसी आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया। टीम ने दुकान मालिकों को लिखित रूप से निर्देश दिए कि कागज़ी कार्रवाई पूरी होने तक दुकानें खोलना नहीं है।
अस्पताल में पहले हुई घटना से जुड़ा मामला
प्रशासन ने बताया कि यह कार्रवाई पिछले दिनों अस्पताल परिसर में हुई एक अप्रिय घटना के बाद और तेज़ की गयी। पहले एक मरीज के तीमारदारों और कुछ मेडिकल स्टोर एजेंटों के बीच विवाद व मारपीट की भी शिकायत दर्ज करायी गयी थी। उस मामले में पुलिस ने जांच की और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी; इस घटना के बाद अस्पताल के आसपास दवा विक्रय के तरीके व एजेंटों के व्यवहार की भी निगरानी बढ़ायी गयी थी।
विभागीय अधिकारियों का बयान
पूरन चंद, सहायक औषधि आयुक्त, गोरखपुर मंडल ने बताया कि मरीजों और तीमारदारों को सस्ती दवा देने का झाँसा देकर उनसे आर्थिक शोषण किया जा रहा था और नियमों का उल्लंघन हो रहा था। उन्होंने कहा कि डीएम और पुलिस प्रशासन के निर्देश पर ड्रग विभाग ने मिलकर यह कार्रवाई की है और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिन दुकानों के पास पूर्ण लाइसेंस व आवश्यक कागज़ात नहीं मिले, उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
आगे की प्रक्रिया और सतर्कता
जांच टीम ने दुकानों के लाइसेंस, बिलिंग रेकॉर्ड, स्टॉक तथा दवाओं की वैधता की छानबीन की है। कागज़ी कार्यवाही व आरोपों की पुष्टि के बाद विभाग आवश्यक कानूनी कदम उठाएगा—जिसमें लाइसेंस निरस्तीकरण, जुर्माना अथवा आपराधिक मामला दर्ज कराना शामिल हो सकता है। वहीं प्रशासन ने अस्पताल में आने वाले मरीजों व तीमारदारों से अपील की है कि वे केवल प्रमाणित दवा दुकानों से ही दवाएँ लें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें।
इस प्रकार जिला प्रशासन और ड्रग विभाग ने अस्पताल परिसर के आसपास दवा विक्रेताओं पर निगरानी तेज कर दी है और कहा है कि नियमों के अनुपालन तक यही कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी ताकि मरीजों के हित और दवा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।