फेसबुक-इंस्टाग्राम बैन
नई दिल्ली, 4 दिसंबर 2025: ऑस्ट्रेलिया ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। यहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। मेटा (फेसबुक की पैरेंट कंपनी) ने इस कानून का पालन शुरू कर दिया है और अनुमानित 5 लाख ऐसे अकाउंट्स को लॉक करने की प्रक्रिया चला रही है, जो 16 साल से कम उम्र के यूजर्स के हैं। यह बैन 10 दिसंबर 2025 से प्रभावी होगा, जिसके तहत उम्र सत्यापन के जरिए यूजर्स की पहचान की जाएगी। माता-पिता की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए यह कदम बच्चों को हानिकारक कंटेंट, साइबर बुलिंग और प्राइवेसी रिस्क्स से बचाने का प्रयास है। लेकिन क्या यह बैन मेटा के लिए चुनौती बनेगा? आइए जानते हैं पूरी डिटेल्स।
ऑस्ट्रेलिया का नया कानून: 16 साल से कम उम्र वालों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस बंद
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने ‘ऑनलाइन सेफ्टी फॉर चिल्ड्रन बिल’ के तहत यह सख्त नियम लागू किया है। इसके अनुसार, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर 16 साल से कम उम्र के किसी भी यूजर को एक्सेस नहीं मिलेगा। कानून के मुताबिक, मेटा जैसी कंपनियों को बड़े पैमाने पर उम्र वेरिफिकेशन करना होगा। मेटा ने पहले ही 5 लाख संदिग्ध अकाउंट्स की पहचान कर ली है, जो AI और यूजर डेटा एनालिसिस से मिले हैं। 10 दिसंबर तक ये सभी अकाउंट्स लॉक हो जाएंगे।
मेटा ऑस्ट्रेलिया के मैनेजिंग डायरेक्टर विल ईस्टन ने कहा, “हमें चुनौतियां तो दिख रही हैं, लेकिन सरकार का उद्देश्य सही है। हम युवाओं के लिए सुरक्षित डिजिटल स्पेस बनाने को प्रतिबद्ध हैं।” हालांकि, कंपनी ने चेतावनी दी है कि उम्र वेरिफिकेशन में त्रुटियां हो सकती हैं, जिसके लिए अपील प्रक्रिया शुरू की गई है।
अकाउंट लॉक कैसे होगा? यूजर्स को क्या करना पड़ेगा?
लॉक होने पर यूजर्स को नोटिफिकेशन मिलेगा, जिसमें उनके पोस्ट्स, फोटोज, वीडियोज, प्राइवेट मैसेज और अन्य डेटा को बैकअप लेने की सलाह दी जाएगी। 16 साल पूरे होने के बाद अकाउंट रीएक्टिवेट करने के लिए Yoti जैसी थर्ड-पार्टी सर्विस से वीडियो सेल्फी या सरकारी ID के जरिए उम्र सत्यापन करना होगा। अगर कोई यूजर जन्मतिथि में झूठ बोलता पकड़ा गया, तो सख्ती से प्रूफ मांगा जाएगा।
महत्वपूर्ण बात: मेसेंजर ऐप इस बैन से बाहर है, लेकिन इसके इस्तेमाल पर भी नजर रखी जाएगी। अगर कोई माता-पिता बच्चे के लिए अकाउंट मैनेज करता है, तो भी वेरिफिकेशन जरूरी होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रक्रिया प्राइवेसी को प्रभावित करेगी, क्योंकि फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी यूज होगी।
मेटा पर क्या असर? 5 लाख अकाउंट लॉक से यूजर बेस और रेवेन्यू पर झटका
मेटा के लिए यह बैन बड़ा झटका है। ऑस्ट्रेलिया में फेसबुक और इंस्टाग्राम के 1.7 करोड़ यूजर्स में से 20% से ज्यादा युवा हैं। 5 लाख अकाउंट्स लॉक होने से यूजर एंगेजमेंट कम होगा, जो ऐड रेवेन्यू पर असर डालेगा। कंपनी को वेरिफिकेशन सिस्टम अपग्रेड करने में करोड़ों डॉलर खर्च होंगे। ग्लोबल स्तर पर यह कानून अन्य देशों के लिए मिसाल बनेगा। यूके और यूएस में भी इसी तरह के बिल पर चर्चा चल रही है।
माता-पिताओं की चिंताएं: साइबर बुलिंग और मेंटल हेल्थ से बचाव का कदम
माता-पिता लंबे समय से सोशल मीडिया के खतरे बता रहे थे। UNICEF की रिपोर्ट के मुताबिक
, 13-15 साल के 40% बच्चे ऑनलाइन हैरासमेंट का शिकार होते हैं।
यह बैन बच्चों को अनचाहे कंटेंट, ग्रूमिंग और एडिक्शन से बचाएगा।
लेकिन आलोचक कहते हैं
कि बच्चे VPN या फेक अकाउंट्स से बैन तोड़ सकते हैं।
एक्सपर्ट सलाह: पैरेंटल कंट्रोल टूल्स यूज करें और ओपन डिस्कशन रखें।
ग्लोबल इंप्लिकेशंस: भारत में क्या होगा? NEP 2020 के अनुरूप सख्ती की जरूरत
ऑस्ट्रेलिया का यह कदम दुनिया भर में डिजिटल सेफ्टी को बढ़ावा देगा।
भारत में 25 करोड़ से ज्यादा युवा सोशल मीडिया यूज करते हैं, लेकिन सख्त कानून की कमी है
। IT एक्ट 2021 में उम्र सीमा है, लेकिन एनफोर्समेंट कमजोर।
NEP 2020 डिजिटल लिटरेसी पर जोर देता है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया जैसा बैन यहां विवादास्पद हो सकता है।
सरकार को जल्द कदम उठाने चाहिए।
