बहरामपुर शेरगढ़ गाँव की धरती पर जब भी विकास की बात होती है, तब जनसेवक दुर्गेश साहनी जी का नाम सबसे पहले सम्मान के साथ लिया जाता है। गाँव के प्रत्येक नागरिक – चाहे वह बुजुर्ग हों, महिलाएँ हों, या युवा – सभी के दिलों में दुर्गेश साहनी जी ने अपने जनसेवा और निस्वार्थ विचारों से विशेष स्थान बनाया है।
दुर्गेश साहनी जी को केवल एक प्रधान प्रत्याशी के रूप में देखना उनकी मेहनत और प्रतिबद्धता के साथ अन्याय होगा। यह वही व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने गाँव के हर कोने की समस्याओं को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझकर हर मुमकिन प्रयास किया। आज गाँव की गलियाँ रोशनी से जगमगाती हैं, सड़कें सुगम हैं, और अनगिनत विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ी है, तो उसके पीछे दुर्गेश साहनी जी की अथक इच्छाशक्ति और समर्पण का महत्वपूर्ण योगदान है।
दुर्गेश साहनी जी के प्रयासों में नारी सशक्तिकरण को प्राथमिकता मिली है। उन्होंने गाँव की महिलाओं को स्वरोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए हमेशा जागरूक किया और सहयोग दिया। गांव के युवाओं को उन्होंने रोजगार, खेलकूद, शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण के लिए प्रेरित किया, जिससे आज गांव एक नई पहचान की ओर अग्रसर है।

चाहे छठ पूजा जैसा पावन पर्व हो या कोई सामाजिक आयोजन, दुर्गेश साहनी जी हर अवसर पर गाँववासियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े दिखते हैं। उनकी छवि केवल एक प्रधान प्रत्याशी के रूप में नहीं, बल्कि परिवार के अभिन्न सदस्य के तौर पर हर ग्रामीण के मन में रची-बसी है।
अपने गांव के लिए ऐसी निःस्वार्थ सेवा भावना, नये विकास कार्यों की सोच और हर घर तक जनसेवा की अलख जगाने वाले दुर्गेश साहनी जी को आज हर गांववासी अपना भाग्य विधाता मानता है। उन्होंने न केवल गाँव का नाम रोशन किया, बल्कि ग्राम विकास का एक नया मानक स्थापित किया है। हमारा विश्वास है कि उनकी प्रतिबद्धता और प्रयास भविष्य में भी बहरामपुर शेरगढ़ के समग्र विकास को नई ऊँचाई देगा।