महाराष्ट्र में
महाराष्ट्र में 15 जनवरी 2026 को हुए 29 महानगरपालिकाओं के चुनावों के परिणाम 16 जनवरी को घोषित हुए। बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति गठबंधन ने भारी बहुमत के साथ 25 से ज्यादा निगमों पर कब्जा जमाया। यह चुनाव बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) सहित प्रमुख शहरों जैसे पुणे, ठाणे, नागपुर, नासिक, पिंपरी-चिंचवड़ आदि में हुए। कुल 2,869 वार्डों में मतदान हुआ, जिसमें मतदाता भागीदारी लगभग 50-55% रही।
महायुति की प्रचंड जीत: 25+ निगमों पर नियंत्रण
महायुति (बीजेपी + एकनाथ शिंदे की शिवसेना + अजीत पवार की एनसीपी) ने राज्य स्तर पर भारी जीत दर्ज की। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, बीजेपी ने अकेले 1,372 से 1,425 वार्ड जीते। महायुति ने 24-25 महानगरपालिकाओं में बहुमत हासिल किया।
प्रमुख निगमों में स्थिति:
- बीएमसी (मुंबई – 227 वार्ड): भाजपा 89 वार्ड, शिंदे शिवसेना 29 वार्ड (कुल महायुति 118 – बहुमत 114 से ज्यादा)। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) 65 वार्ड, कांग्रेस 24, AIMIM 8, MNS 6।
- पुणे और पिंपरी-चिंचवड़: भाजपा ने मजबूत प्रदर्शन किया, पवार परिवार के गढ़ में भी बढ़त।
- नागपुर: भाजपा ने 100+ वार्ड जीतकर चौथी बार नियंत्रण बनाए रखा।
- नवी मुंबई, जलगांव, उल्हासनगर, पनवेल: महायुति ने स्पष्ट जीत दर्ज की।
- कुछ अपवाद जैसे लातूर, कोल्हापुर, भिवंडी में कांग्रेस या अन्य को बढ़त, लेकिन कुल मिलाकर महायुति का दबदबा।
2017 के मुकाबले इस बार बदलाव कितने बड़े?
2017 में शिवसेना (अविभाजित) का बीएमसी पर लंबे समय से कब्जा था, जबकि भाजपा कई जगह मजबूत थी। 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद यह पहला बड़ा टेस्ट था। इस बार:
- ठाकरे परिवार का 30 साल पुराना बीएमसी पर राज खत्म – उद्धव और राज ठाकरे की एकजुट कोशिश विफल।
- भाजपा ने कई जगहों पर पिछली तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया।
- AIMIM ने मुस्लिम बहुल इलाकों में अच्छा प्रदर्शन किया (कुल 100+ सीटें)।
- एनसीपी (शरद पवार) और कांग्रेस को बड़ा झटका, खासकर पश्चिमी महाराष्ट्र में।
नतीजों के मायने क्या हैं?
यह जीत महायुति सरकार की लोकप्रियता और विकास, हिंदुत्व एजेंडे की जीत बताई जा रही है। सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि जनता ने विकास चुना। पीएम मोदी ने महाराष्ट्र का आभार जताया।
विपक्ष के लिए यह चेतावनी है – MVA (महा विकास अघाड़ी) कमजोर दिखी।
ठाकरे और पवार परिवारों की एकता भी काम नहीं आई।
आने वाले लोकल बॉडी और विधानसभा चुनावों में महायुति का दबदबा बढ़ सकता है।
ये नतीजे बताते हैं कि महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में भाजपा का विस्तार जारी है,
जबकि क्षेत्रीय दलों को चुनौती मिली है।