मतदाताओं को किया जाएगा चिह्नितउत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को सटीक और अद्यतन बनाने के लिए चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे SIR यानी Systematic Identification and Registration अभियान ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
इस अभियान के तहत अब महिलाओं से उनके मायके का विवरण भी मांगा जाएगा ताकि उनकी पहचान और मतदान स्थल की स्थायी जानकारी सुनिश्चित की जा सके।SIR अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना, दोहरी प्रविष्टियों को खत्म करना और नए मतदाताओं का पंजीकरण करना है।
खासतौर पर उन महिलाओं पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है जिन्होंने शादी के बाद अपना निवास स्थान बदला है।महिलाओं से मायके का विवरण इसलिए जरूरीचुनाव आयोग के अनुसार, बड़ी संख्या में महिलाएं विवाह के बाद दूसरे नगर या गांव में स्थानांतरित हो जाती हैं, लेकिन उनके नाम पुराने पते यानी मायके की मतदाता सूची से हटाए नहीं जाते। इससे एक व्यक्ति का नाम दो जगह दर्ज रह जाता है, जिसे ‘डुप्लिकेट वोटर’ कहा जाता है।
अब SIR अभियान में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर महिलाओं से उनका मायका पता, उनके माता-पिता या भाई का नाम, तथा मायके का निर्वाचन क्षेत्र पूछेंगे। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि शादी के बाद महिला का नाम पुराने मतदाता रिकॉर्ड में बना हुआ है या हट चुका है।इस संबंध में हर BLO को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे महिलाओं से बात करते समय गोपनीयता और शालीनता बनाए रखें।
विवरण केवल सत्यापन और तकनीकी सत्यापन के लिए लिया जाएगा, इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।इन मतदाताओं को किया जाएगा चिह्नितSIR अभियान के दौरान जिन मतदाताओं के नाम दो अलग-अलग स्थानों पर पाए जाएंगे, उन्हें “डुप्लिकेट मतदाता” के रूप में चिन्हित किया जाएगा। इसके बाद उन नामों की जांच होगी, और यदि दोहरी प्रविष्टि की पुष्टि होती है, तो पुराने या गलत रिकॉर्ड को हटा दिया जाएगा।
इस प्रक्रिया में विशेष रूप से नए विवाहित जोड़े, छात्र-छात्राएं, किरायेदार, प्रवासी मजदूर और ऐसे लोग शामिल होंगे जिन्होंने हाल में अपना निवास स्थान बदला है। जिला निर्वाचन कार्यालयों को यह सूची नियमित रूप से अद्यतन करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि 2026 की मतदाता सूची पूरी तरह साफ हो सके।डिजिटल सत्यापन भी होगायूपी में अब मतदाता सूची को आधार नंबर और मोबाइल से जोड़ने की दिशा में भी काम शुरू हो गया है।
आयोग की मंशा है कि हर वोटर का एक यूनिक डिजिटल रिकॉर्ड बने, जिससे किसी भी व्यक्ति के दोहरी प्रविष्टि या फर्जी पहचान की संभावना खत्म हो।मतदाताओं को ऑनलाइन फॉर्म-6 (नया पंजीकरण) और फॉर्म-8 (संशोधन) भरने की सुविधा दी गई है। वहीं जिन लोगों का नाम सूची में दो बार पाया जाएगा, उन्हें BLO या स्थानीय निर्वाचन कार्यालय द्वारा बुलाकर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अभियानयह अभियान पूरे राज्य में एक साथ चल रहा है।
ग्रामीण इलाकों में ग्राम पंचायत स्तर पर और शहरी क्षेत्रों में वार्ड आधार पर सत्यापन किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में SIR के दौरान BLO को महिलाओं से मायके की जानकारी के साथ उनके पति का नाम, पता और शादी की अवधि की जानकारी भी दर्ज करनी होगी।अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को व्यवस्थित और सटीक रूप देने की दिशा में अहम कदम होगा।
विवाद और प्रतिक्रियाहालांकि इस नियम को लेकर कुछ सामाजिक संगठनों ने आपत्ति भी जताई है। उनका कहना है कि महिलाओं से मायके की जानकारी मांगना अनावश्यक हस्तक्षेप है और इससे निजता का प्रश्न उठता है। वहीं निर्वाचन कार्यालयों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल तकनीकी प्रक्रिया है और इसका उद्देश्य किसी की निजता का उल्लंघन नहीं बल्कि मतदाता सूची को त्रुटि रहित बनाना है।
निष्कर्षउत्तर प्रदेश में चल रहा SIR अभियान मतदाता डेटा को विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि महिलाओं से मायके की जानकारी लेना एक नया प्रयोग है, पर चुनाव आयोग का दावा है कि इससे भविष्य में मतदाता सूची की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।यानी अब हर वोटर का रिकॉर्ड एक जगह, एक नाम और एक पहचान के साथ दर्ज होगा—जो लोकतंत्र की मजबूती का आधार बनेगा।
