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उत्तर प्रदेश में 2021 की जनगणना के बाद अब 2026 की जनगणना की तैयारियां तेज हो गई हैं। केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार ने संयुक्त रूप से निर्णय लिया है कि मई 2026 से पूरे देश में जनगणना शुरू होगी, जिसमें उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में बड़े पैमाने पर कार्य शुरू किया जाएगा। इस बार जनगणना डिजिटल और पारंपरिक दोनों तरीकों से होगी, और प्रत्येक जिले के जिला मजिस्ट्रेट (DM) को इसकी प्रमुख जिम्मेदारी सौंपी गई है।
जनगणना की शुरुआत और समयसीमा
भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार, हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (घरों की सूची तैयार करना) मई 2026 से शुरू होगा। इसके बाद जनवरी-फरवरी 2027 में मुख्य जनगणना (पॉपुलेशन एन्यूमरेशन) होगी। उत्तर प्रदेश में यह प्रक्रिया सबसे बड़ी चुनौती होगी क्योंकि राज्य की आबादी 24 करोड़ से अधिक है, जो देश की कुल जनसंख्या का लगभग 17% है।
प्रत्येक जिले में DM को जनगणना संचालन समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। उनके साथ जिला स्तर पर जनगणना अधिकारी, चार्ज ऑफिसर, सुपरवाइजर और एन्यूमरेटर की टीम काम करेगी। कुल 2.5 लाख से अधिक कर्मचारी और अधिकारी इस कार्य में लगेंगे।
DM की प्रमुख जिम्मेदारियां
- जिले में सभी ग्राम पंचायतों, नगर पालिका, नगर निगम और कैंटोनमेंट क्षेत्रों में कार्ययोजना तैयार करना।
- प्रशिक्षण, सामग्री वितरण और फील्ड स्टाफ की तैनाती।
- डिजिटल टैबलेट, मोबाइल ऐप और इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना।
- संवेदनशील क्षेत्रों (सीमावर्ती, नक्सल प्रभावित, घनी आबादी वाले) में विशेष सुरक्षा व्यवस्था।
- जनगणना के दौरान गोपनीयता और सटीकता बनाए रखना।
- समय पर रिपोर्टिंग और डेटा अपलोडिंग।
प्रत्येक DM को निर्देश दिया गया है कि वे स्थानीय स्तर पर आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी, पंचायत प्रतिनिधि और स्कूल शिक्षकों को शामिल करें ताकि घर-घर पहुंच आसान हो।
डिजिटल जनगणना पर जोर
इस बार जनगणना में सेल्फ एन्यूमरेशन (स्व-जनगणना) का विकल्प होगा। नागरिक मोबाइल ऐप या वेब पोर्टल पर खुद अपनी जानकारी भर सकेंगे। हालांकि ग्रामीण और कम साक्षर क्षेत्रों में पारंपरिक तरीके से एन्यूमरेटर घर-घर जाकर डेटा एकत्र करेंगे।
उत्तर प्रदेश में डिजिटल इंडिया के तहत 5G और ब्रॉडबैंड कवरेज बढ़ने से उम्मीद है कि डिजिटल जनगणना ज्यादा सफल होगी।
जनगणना का महत्व
यह जनगणना 2027 के बाद होने वाले दिल्ली विधानसभा, लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों के लिए महत्वपूर्ण होगी। इससे:
- संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन (Delimitation)
- आरक्षण की सीटों का निर्धारण
- विकास योजनाओं के लिए फंड आवंटन
- सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण (जैसे जाति जनगणना यदि अलग से हो)
- सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाना
सभी निर्धारित होंगे।
निष्कर्ष: यूपी में सबसे बड़ी चुनौती
75 जिलों में 24 करोड़ से अधिक लोगों की जनगणना करना कोई छोटा काम नहीं है।
DM को दी गई प्रमुख जिम्मेदारी से यह साफ है
कि सरकार इस बार सटीक, पारदर्शी और समयबद्ध जनगणना चाहती है।
मई 2026 से शुरू होने वाली इस प्रक्रिया में सभी नागरिकों से सहयोग की अपील की गई है।
सही जनगणना से ही उत्तर प्रदेश का सही विकास चित्र उभरेगा।