देवरिया जनपद के रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र के ग्राम दीगवा पोटवा में एक जमीनी विवाद ने पुलिस की तानाशाही का काला चेहरा उजागर कर दिया। यहां तैनात दरोगा ने पीड़ित दिव्यांग व्यक्ति के भाई का कालर पकड़ लिया, जिससे माहौल खराब होने की नौबत आ गई। पीड़ित पक्ष ने इस घटना की शिकायत एसपी देवरिया से की है। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें दरोगा की गुंडागर्दी साफ दिख रही है। देवरिया रामपुर कारखाना थाना दरोगा तानाशाही अब चर्चा का विषय बनी हुई है। पुलिस का काम विवाद सुलझाना होना चाहिए, न कि आग में घी डालना।
पुलिस की बर्बरता का वीडियो वायरल
यह घटना ग्रामीण इलाकों में पुलिस की मनमानी को दर्शाती है। दीगवा पोटवा गांव में दो पक्षों के बीच जमीन को लेकर पुराना विवाद चल रहा था। पीड़ित पक्ष का कहना है कि उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन दरोगा ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया। दिव्यांग पीड़ित पुलिस उत्पीड़न की यह घटना न केवल कानून की अवहेलना है, बल्कि दिव्यांगों के अधिकारों का भी उल्लंघन। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएं ग्रामीण विकास को बाधित करती हैं।
जमीनी विवाद की पूरी कहानी: दिव्यांग भाई का दर्द और पुलिस की गुंडागर्दी
मामला ग्राम दीगवा पोटवा का है, जहां रामपुर कारखाना थाना के अंतर्गत आने वाली जमीन पर दो परिवारों के बीच विवाद चला आ रहा है। पीड़ित रामू निषाद (नाम परिवर्तित) एक दिव्यांग व्यक्ति हैं, जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं। उनके भाई राजू निषाद ने बताया कि जमीन पर अतिक्रमण करने वाले पक्ष ने धमकी दी थी। उन्होंने थाने जाकर दरोगा से न्याय की गुहार लगाई। लेकिन दरोगा ने न केवल उनकी सुनवाई की, बल्कि विवादित पक्ष के साथ मिलकर राजू का कालर पकड़ लिया।
वीडियो में साफ दिख रहा है कि दरोगा चिल्ला रहे हैं और राजू को धक्का दे रहे हैं। आसपास भीड़ इकट्ठा हो गई थी, जिससे मारपीट की नौबत आ गई। ग्रामीणों ने हस्तक्षेप कर मामला शांत किया। जमीनी विवाद देवरिया रामपुर कारखाना में पुलिस की इस भूमिका ने लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया। पीड़ित ने कहा, “मेरा भाई दिव्यांग के लिए खड़ा हुआ, लेकिन पुलिस ने हमें ही पीटा।” यह घटना 18 फरवरी 2026 को हुई, जब ग्रामीण स्थानीय विकास परियोजनाओं पर चर्चा कर रहे थे।
पीड़ित ने एसपी देवरिया से की शिकायत: क्या होगा कार्रवाई?
पीड़ित राजू निषाद ने वीडियो के साथ एसपी देवरिया को शिकायत पत्र सौंपा है। उन्होंने मांग की है कि दरोगा के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और जमीन विवाद का निष्पक्ष जांच हो। एसपी कार्यालय से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि जांच शुरू हो गई है। देवरिया पुलिस तानाशाही वीडियो वायरल अब सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है।
फेसबुक, यूट्यूब और व्हाट्सएप पर हजारों व्यूज हो चुके हैं।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रभान निषाद (फिशरमैन वर्ल्ड न्यूज़) ने इस मुद्दे को उठाया है।
उन्होंने कहा, “पुलिस का काम जनता की रक्षा करना है, न कि उत्पीड़न।
उत्तर प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, जो सामाजिक सद्भाव को
नुकसान पहुंचाती हैं।” दिव्यांग अधिकार पुलिस उत्पीड़न देवरिया पर अब राजनीतिक दल भी नजर रखे हुए हैं।
पुलिस सुधार की जरूरत: ग्रामीणों की अपील और सबक
यह घटना पुलिस सुधार की आवश्यकता पर जोर देती है। ग्रामीण इलाकों में जमीनी विवाद आम हैं,
लेकिन पुलिस को मध्यस्थ की भूमिका निभानी चाहिए।
देवरिया जिले में पिछले एक साल में 50 से अधिक ऐसे मामले दर्ज हुए हैं,
जहां पुलिस पर पक्षपात के आरोप लगे।
रामपुर कारखाना थाना दरोगा वीडियो ने प्रशासन को झकझोर दिया है।
पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी से भी न्याय की अपील की है।
स्थानीय लोग चाहते हैं कि दरोगा को सस्पेंड किया जाए और पीड़ित को मुआवजा मिले।
यह मामला न केवल देवरिया बल्कि पूरे
उत्तर प्रदेश के लिए सबक है। पुलिस को ट्रेनिंग दी जानी चाहिए ताकि दिव्यांग और कमजोर वर्ग सुरक्षित रहें।
देवरिया न्यूज़ अपडेट में यह खबर प्रमुखता से छाई हुई है।