धुरियापार के 33 केवी विद्युत उपकेंद्र में झाड़ियों का राज, जर्जर आवास में जान जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रहे एसएसओ

राकेश शर्मा की रिपोर्ट

बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए विद्युत उपकेंद्रों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, लेकिन धुरियापार स्थित 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र की मौजूदा स्थिति विभागीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। उपकेंद्र परिसर में लंबे समय से साफ-सफाई नहीं होने के कारण चारों तरफ घनी झाड़ियां, बेलें, घास और खरपतवार फैल गए हैं। हालात ऐसे हैं कि विद्युत उपकरणों और खंभों तक जंगली बेलों ने अपना कब्जा जमा लिया है।

स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि उपकेंद्र जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की अव्यवस्था न केवल कर्मचारियों के लिए परेशानी का कारण है, बल्कि विद्युत आपूर्ति और सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर चिंता का विषय है।

महीनों से नहीं हुई परिसर की समुचित सफाई

धुरियापार विद्युत उपकेंद्र के परिसर में जगह-जगह उगी झाड़ियां और लंबी घास इसकी बदहाली की तस्वीर बयां कर रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार लंबे समय से परिसर की नियमित सफाई नहीं कराई गई है।

बारिश के मौसम में घास और झाड़ियों के तेजी से बढ़ने के कारण समस्या और गंभीर हो गई है। विद्युत उपकेंद्र में जहां सुरक्षा व्यवस्था सबसे ज्यादा मजबूत होनी चाहिए, वहीं परिसर के कई हिस्से जंगली वनस्पतियों से ढके दिखाई देते हैं।

खास चिंता की बात यह है कि विद्युत पोल और उपकरणों के आसपास भी झाड़ियां और लताएं फैल गई हैं। ऐसे में किसी तकनीकी समस्या के समय कर्मचारियों के लिए संबंधित स्थान तक सुरक्षित तरीके से पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

फ्यूज ठीक करने के लिए जान जोखिम में डालते हैं कर्मचारी

स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, उपकेंद्र परिसर के अंदर लगे विद्युत पोल का फ्यूज उड़ने या अन्य तकनीकी खराबी आने पर संविदा लाइनमैन को पोल तक पहुंचना पड़ता है।

घनी झाड़ियों के कारण उन्हें कई बार झाड़-झंखाड़ के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह स्थिति और खतरनाक हो जाती है। झाड़ियों में सांप, बिच्छू अथवा अन्य जहरीले जीव-जंतुओं के छिपे होने की आशंका बनी रहती है।

विद्युत उपकरणों के नजदीक काम करने वाले कर्मचारियों के लिए एक तरफ बिजली का खतरा रहता है, वहीं दूसरी तरफ झाड़ियों में छिपे जीव-जंतुओं से भी खतरा बना रहता है। ऐसे में नियमित सफाई को केवल सौंदर्य से जुड़ा काम नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था का जरूरी हिस्सा माना जाना चाहिए।

ट्रांसफार्मर के आसपास भी सफाई की जरूरत

विद्युत उपकेंद्र में ट्रांसफार्मर और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों के आसपास पर्याप्त साफ-सफाई होना जरूरी माना जाता है। स्थानीय उपभोक्ताओं का आरोप है कि धुरियापार उपकेंद्र में इस ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

घनी वनस्पतियों के कारण उपकरणों के निरीक्षण और रखरखाव में भी कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं बारिश और नमी के मौसम में बढ़ी हुई वनस्पति सुरक्षा संबंधी जोखिम को और बढ़ा सकती है।

उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते परिसर की सफाई करा दी जाए तो कर्मचारियों को काम करने में सुविधा होगी और विद्युत व्यवस्था से जुड़े संभावित जोखिमों को भी कम किया जा सकेगा।

जर्जर हो चुके हैं कर्मचारियों के आवास

उपकेंद्र परिसर की समस्या केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं है। यहां कर्मचारियों के रहने के लिए बनाए गए आवास भी लंबे समय से मरम्मत की बाट जोह रहे हैं।

आवासीय भवनों की दीवारों में जगह-जगह दरारें दिखाई देने की बात सामने आई है। कई हिस्सों में रेलिंग और बरामदे का हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर लटक रहा है। छत से प्लास्टर गिरने की स्थिति भी बताई जा रही है।

इतना ही नहीं, भवनों के आसपास उगी झाड़ियां दीवारों तक पहुंच चुकी हैं।

इससे आवासों की स्थिति और खराब होती जा रही है।

दूसरे जिलों से आने वाले एसएसओ के सामने बड़ी परेशानी

विद्युत उपकेंद्रों पर एसएसओ यानी सब स्टेशन ऑपरेटर की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण होती है।

विद्युत आपूर्ति की निगरानी से लेकर उपकेंद्र के

संचालन से संबंधित कई जिम्मेदारियां इन्हीं कर्मचारियों के कंधों पर होती हैं।

बताया जा रहा है कि धुरियापार उपकेंद्र पर दूसरे जिलों से आकर ड्यूटी करने वाले

कुछ एसएसओ को परिसर में बने इन्हीं जर्जर आवासों में रहना पड़ता है।

कर्मचारियों के सामने मजबूरी यह है कि ड्यूटी के दौरान उन्हें उपकेंद्र के

नजदीक रहना पड़ता है, लेकिन उपलब्ध आवासों की खराब स्थिति

उनके लिए सुरक्षा और सुविधा दोनों के लिहाज से चिंता का विषय बनी हुई है।

बारिश में बढ़ जाता है खतरा

बरसात के मौसम में जर्जर भवन और घनी झाड़ियों की समस्या ज्यादा गंभीर हो जाती है।

लगातार नमी के कारण दीवारों और छतों की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

वहीं झाड़ियों में जहरीले जीव-जंतुओं के छिपने की संभावना भी बनी रहती है।

ऐसे माहौल में कर्मचारियों का रहना और रात-दिन ड्यूटी करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्युत विभाग को

किसी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय पहले ही आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

उपभोक्ताओं ने अधिशासी अभियंता से की मांग

धुरियापार विद्युत उपकेंद्र से जुड़े उपभोक्ताओं ने अधिशासी अभियंता, विद्युत खंड सिकरीगंज से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

उपभोक्ताओं की प्रमुख मांगों में उपकेंद्र परिसर की तत्काल सफाई, विद्युत पोल और

ट्रांसफार्मर के आसपास उगी झाड़ियों को हटाना तथा कर्मचारियों के जर्जर आवासों की मरम्मत शामिल है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्युत विभाग यदि नियमित रूप से परिसर की साफ-सफाई और

रखरखाव की व्यवस्था करे तो कर्मचारियों के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी इसका फायदा मिलेगा।

निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए जरूरी है व्यवस्था में सुधार

बिजली की निर्बाध आपूर्ति केवल पर्याप्त विद्युत उत्पादन और लाइन व्यवस्था पर

निर्भर नहीं करती। उपकेंद्रों की नियमित देखरेख, उपकरणों का रखरखाव, परिसर की

सफाई और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

धुरियापार उपकेंद्र की मौजूदा स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों की मांग है कि

विभाग इस मामले को प्राथमिकता से ले। यदि समय रहते

झाड़ियों की सफाई और जर्जर भवनों की मरम्मत करा दी जाती है तो

कर्मचारियों की सुरक्षा के साथ विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को भी बेहतर बनाया जा सकता है।

फिलहाल क्षेत्र के उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है कि विद्युत विभाग इस शिकायत पर

कब तक कार्रवाई करता है और उपकेंद्र परिसर को सुरक्षित बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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