धुरंधर 2 मूवी रिव्यू हिंदी में पढ़ें
बॉलीवुड में इन दिनों सीक्वल फिल्मों का दौर चल रहा है और इसी कड़ी में Ranveer Singh की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। पहले पार्ट की शानदार सफलता के बाद इस फिल्म से दर्शकों की उम्मीदें काफी ज्यादा थीं। सवाल यही है कि क्या ‘धुरंधर 2’ उस उम्मीद पर खरी उतरती है या फिर कहीं कुछ कमी रह जाती है? आइए जानते हैं इस स्पॉइलर-फ्री रिव्यू में।
कहानी और प्लॉट
‘धुरंधर 2’ की कहानी पहले पार्ट से आगे बढ़ती है, जहां बदले की आग और सत्ता की लड़ाई का नया अध्याय देखने को मिलता है। फिल्म में कई नए किरदारों की एंट्री होती है, जो कहानी को और जटिल और दिलचस्प बनाने की कोशिश करते हैं। हालांकि कहानी मजबूत है, लेकिन इसकी लंबाई कहीं-कहीं दर्शकों को थका देती है।
अभिनय कैसा है
रणवीर सिंह पूरी फिल्म में छाए रहते हैं और उनका अभिनय काफी दमदार है। उन्होंने अपने किरदार में ऊर्जा और गहराई दोनों को अच्छे से निभाया है। वहीं Sanjay Dutt और Arjun Rampal जैसे कलाकार भी फिल्म में मौजूद हैं, लेकिन उनसे जितनी उम्मीद थी, उतना प्रभाव नहीं छोड़ पाते। सारा अर्जुन का स्क्रीन टाइम बेहद कम है, जिससे उनका किरदार ज्यादा उभर नहीं पाता।
फिल्म की लंबाई बनी कमजोरी
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी लंबाई है। लगभग चार घंटे की यह फिल्म बीच-बीच में थोड़ी धीमी लगने लगती है। कई सीन ऐसे हैं जिन्हें छोटा किया जा सकता था, जिससे फिल्म और ज्यादा प्रभावशाली बन सकती थी।
क्या मिसिंग है इस बार
पहले पार्ट का जो प्रभाव था, वह इस फिल्म में पूरी तरह से नजर नहीं आता। खासकर ‘रहमान डकैत’ जैसा दमदार किरदार इस बार मिस होता है, जिसकी कमी दर्शकों को महसूस होती है। नए विलेन किरदार अच्छे हैं, लेकिन उतना प्रभाव नहीं छोड़ पाते।
डायरेक्शन और म्यूजिक
डायरेक्शन ठीक-ठाक है और फिल्म को भव्य बनाने की पूरी कोशिश की गई है। बैकग्राउंड म्यूजिक और
एक्शन सीक्वेंस फिल्म को बांधे रखते हैं, लेकिन कहानी की गति कहीं-कहीं कमजोर पड़ जाती है।
क्या देखें या नहीं
अगर आप रणवीर सिंह के फैन हैं और पहले पार्ट को पसंद करते हैं,
तो यह फिल्म आपको जरूर देखनी चाहिए।
हालांकि यह फिल्म पूरी तरह निराश नहीं करती, लेकिन कुछ जगहों पर यह उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती।
कुल मिलाकर ‘धुरंधर 2’ एक अच्छी लेकिन लंबी फिल्म है, जो मनोरंजन तो करती है लेकिन पहले पार्ट
जैसी छाप छोड़ने में थोड़ी पीछे रह जाती है। रणवीर सिंह का अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है,
जबकि कहानी की गति और कुछ किरदारों की कमी इसकी कमजोरी बनती है।
