आगरा के नामनेर चौराहे पर 100 साल पुरानी धर्मशाला
100 साल पुरानी धर्मशाला का फर्जी सौदा
आगरा के नामनेर चौराहे पर स्थित एक ऐतिहासिक धर्मशाला, जो पिछले 100 साल से यात्रियों और जरूरतमंदों के लिए आश्रय स्थल बनी हुई थी, अब एक बड़े फर्जीवाड़े का शिकार हो गई है। इस धर्मशाला को मात्र 5 हजार रुपये के फर्जी दानपत्र के आधार पर 5 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। ट्रस्टियों और कुछ स्थानीय भूमाफियाओं पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने फर्जी दस्तावेज बनाकर संपत्ति हथिया ली। मामला इतना गंभीर हो गया कि शिकायत सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गई है। अब जिला प्रशासन और पुलिस जांच में जुट गए हैं।
धर्मशाला का इतिहास और फर्जी सौदे का खुलासा
यह धर्मशाला नामनेर चौराहे पर स्थित है, जो आगरा-लखनऊ हाईवे से जुड़ा व्यस्त इलाका है। यह 1920 के दशक में बनी थी और एक धार्मिक ट्रस्ट के नाम पर संचालित होती थी। ट्रस्ट के मूल उद्देश्य में गरीब यात्रियों को मुफ्त ठहरने की सुविधा देना था। लेकिन हाल के वर्षों में ट्रस्टियों ने इसे व्यावसायिक संपत्ति के रूप में देखना शुरू कर दिया।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, ट्रस्ट के कुछ सदस्यों ने फर्जी दानपत्र तैयार किया, जिसमें लिखा गया कि एक व्यक्ति ने 5 हजार रुपये दान देकर धर्मशाला का मालिकाना हक हासिल कर लिया। इस फर्जी दस्तावेज के आधार पर धर्मशाला को 5 करोड़ रुपये में एक भूमाफिया गिरोह को बेच दिया गया। खरीदार ने तुरंत कब्जा लेने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय लोगों और पूर्व ट्रस्ट सदस्यों ने विरोध किया।
फर्जी दानपत्र और भूमाफिया की साजिश
मुख्य आरोपी ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष और कुछ सदस्य बताए जा रहे हैं, जिन्होंने फर्जी दानपत्र पर नोटरी से सत्यापन कराया। दानपत्र में दावा किया गया कि दानकर्ता ने 5 हजार रुपये दिए और बदले में पूरी संपत्ति का हकदार बन गया। यह दस्तावेज पूरी तरह फर्जी साबित हो रहा है क्योंकि मूल ट्रस्ट दस्तावेजों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। भूमाफिया गिरोह ने इस फर्जी कागज के आधार पर रजिस्ट्री कराने की कोशिश की, लेकिन रजिस्ट्रार कार्यालय में जांच के दौरान खामी उजागर हुई।
शिकायत में कहा गया है कि ट्रस्टियों ने व्यक्तिगत लाभ के लिए संपत्ति बेची, जबकि ट्रस्ट का उद्देश्य धार्मिक और सामाजिक सेवा था। भूमाफिया ने मिलीभगत से पूरा खेल रचा, जिससे लाखों की संपत्ति मात्र 5 हजार के फर्जी कागज से हाथ बदल गई।
सीएम योगी तक पहुंची शिकायत, जांच शुरू
मामले की शिकायत स्थानीय निवासियों और कुछ पूर्व ट्रस्ट सदस्यों ने सीएम हेल्पलाइन और सीएम आवास पर दर्ज कराई। शिकायत में ट्रस्टियों पर धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा, आपराधिक साजिश और भूमि हड़पने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामले को गंभीरता से लिया और आगरा जिला प्रशासन को तुरंत जांच के निर्देश दिए।
एसएसपी आगरा और डीएम ने संयुक्त टीम गठित की है। फर्जी दानपत्र की फॉरेंसिक जांच होगी।
ट्रस्ट के बैंक खातों और संपत्ति के पिछले रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
पुलिस ने कुछ ट्रस्टियों को पूछताछ के लिए बुलाया है।
सामाजिक और कानूनी प्रभाव
यह घटना उत्तर प्रदेश में ट्रस्टों और धार्मिक संपत्तियों के दुरुपयोग का एक और उदाहरण है।
आगरा जैसे शहर में जहां ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल बहुत हैं, ऐसे फर्जीवाड़े से जनता का भरोसा टूट रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रस्टों की संपत्ति पर सख्त निगरानी और पारदर्शी ऑडिट जरूरी है।
इंसाफ की उम्मीद
5 हजार के फर्जी दानपत्र से 5 करोड़ की धर्मशाला बेचने का मामला न केवल धोखाधड़ी है,
बल्कि सामाजिक विश्वास पर हमला भी है।
सीएम योगी के हस्तक्षेप से उम्मीद है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और
धर्मशाला को वापस ट्रस्ट के अधीन लाया जाएगा। यह घटना भूमाफिया और
फर्जी दस्तावेजों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने की जरूरत को रेखांकित करती है।