उत्तर प्रदेश में
सड़क हादसों पर सख्ती, प्रशासन एक्शन मोड में
उत्तर प्रदेश में बढ़ते सड़क हादसों को लेकर पुलिस प्रशासन अब पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। डीजीपी ने “जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट (ZFD)” योजना की समीक्षा के बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए गोरखपुर के कैंपियरगंज थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह को लाइन हाजिर कर दिया है। बीते तीन महीनों में कैंपियरगंज क्षेत्र में दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ी, जिससे यह थाना पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर पहुंच गया।
ZFD योजना का उद्देश्य और हकीकत
1 जनवरी 2026 से लागू की गई इस योजना का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं को कम करना और जनहानि को न्यूनतम करना था। इसके तहत प्रदेश के सात पुलिस कमिश्नरेट और 68 जनपदों के कुल 487 दुर्घटना संभावित थानों को चिन्हित किया गया। इन क्षेत्रों में सख्त निगरानी और ट्रैफिक नियमों के पालन के निर्देश दिए गए थे। लेकिन हालिया समीक्षा में सामने आया कि कई स्थानों पर हालात सुधरने के बजाय और खराब हो गए।
कैंपियरगंज थाना क्यों बना टॉप पर
कैंपियरगंज थाना हादसों के मामले में सबसे आगे पहुंच गया, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। एसएसपी डॉ. कौस्तुभ के अनुसार, यहां ट्रैफिक नियमों का पालन सही ढंग से नहीं कराया गया और निगरानी में भी कमी रही। सड़क सुरक्षा के उपाय प्रभावी नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी, जिसके चलते थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह पर कार्रवाई की गई।
अन्य जिलों में भी गिरी गाज
इस कार्रवाई का असर केवल गोरखपुर तक सीमित नहीं रहा। प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी खराब प्रदर्शन करने वाले थाना प्रभारियों पर कार्रवाई की गई। वाराणसी के चोलापुर थाना प्रभारी दीपक कुमार, कन्नौज के छिबरामऊ थाना प्रभारी विष्णुकांत तिवारी, बाराबंकी के रामसनेही घाट थाना प्रभारी जगदीश प्रसाद शुक्ला, अलीगढ़ के जवां थाना प्रभारी धीरज यादव और जौनपुर के सिकरारा थाना प्रभारी उदय प्रताप सिंह को भी लाइन हाजिर करने के निर्देश दिए गए हैं।
ट्रैफिक अधिकारियों की भी जांच शुरू
प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि जिम्मेदारी केवल थाना स्तर तक सीमित नहीं है।
उच्च अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। बाराबंकी के सीओ ट्रैफिक
आलोक कुमार पाठक और जौनपुर के सीओ ट्रैफिक गिरेन्द्र कुमार सिंह के खिलाफ जांच के
आदेश जारी किए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि अब हर स्तर पर जवाबदेही तय होगी।
प्रशासन का साफ संदेश
डीजीपी की इस सख्त कार्रवाई से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि सड़क हादसों को रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई होगी।
ZFD योजना को प्रभावी बनाने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
सड़क दुर्घटनाएं केवल आंकड़े नहीं बल्कि आम लोगों की जान से जुड़ा गंभीर विषय हैं।
इस तरह की कार्रवाई से पुलिस विभाग में जवाबदेही बढ़ेगी और उम्मीद है कि
आने वाले समय में सड़क हादसों में कमी आएगी।
यह कदम पूरे सिस्टम को सतर्क करने वाला साबित हो सकता है।
