अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह सुसाइड प्रकरण
देवरिया, उत्तर प्रदेश: देवरिया जिले में सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या का मामला अब गंभीर मोड़ ले रहा है। गुलरिहा थाना पुलिस ने जांच तेज कर दी है और मुख्य गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए टीम देवरिया भेजने की तैयारी कर रही है। पुलिस का कहना है कि बीएसए (बेसिक शिक्षा अधिकारी) देवरिया और निलंबित क्लर्क (बाबू) के बयान दर्ज किए जाएंगे, क्योंकि सुसाइड नोट में इनके नाम और आरोप प्रमुखता से आए हैं। साथ ही शासन स्तर पर भी हाईलेवल जांच शुरू हो गई है, जिसके तहत शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी मामले की पड़ताल कर रहे हैं।
घटना का पूरा विवरण
सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह (45 वर्ष) गुलरिहा विकास खंड के एक प्राथमिक विद्यालय में तैनात थे। 21 फरवरी 2026 की रात उन्होंने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में उन्होंने बीएसए कार्यालय के एक क्लर्क पर भारी रिश्वत मांगने और निलंबन की धमकी देने का आरोप लगाया। नोट में लिखा था कि क्लर्क ने प्रमोशन, ट्रांसफर और अन्य कामों के लिए लाखों रुपये मांगे, जो वह नहीं दे पाया। दबाव में आने से मानसिक तनाव बढ़ा और अंत में उन्होंने यह कदम उठाया।
परिजनों ने गुलरिहा थाने में तहरीर दी, जिसमें सुसाइड नोट को आधार बनाकर क्लर्क और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ IPC की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 384 (जबरन वसूली) और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की। पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज की और जांच शुरू की।
पुलिस और फॉरेंसिक जांच
गुलरिहा पुलिस की टीम ने सुसाइड नोट जब्त किया और इसे हैंडराइटिंग जांच के लिए लखनऊ स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद नोट की सत्यता की पुष्टि होगी। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मुख्य आरोपी निलंबित क्लर्क और BSA के बयान दर्ज करने के लिए टीम देवरिया जाएगी। दोनों पक्षों के बयानों के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। परिजनों का आरोप है कि क्लर्क ने न केवल रिश्वत मांगी, बल्कि निलंबन की धमकी देकर शिक्षक को मानसिक रूप से तोड़ दिया।
शासन स्तर पर जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने उच्चाधिकारियों की टीम गठित की है।
टीम देवरिया पहुंचकर BSA कार्यालय के रिकॉर्ड, क्लर्क की भूमिका और
कृष्ण मोहन सिंह के खिलाफ की गई कार्रवाई की जांच करेगी। शिक्षा मंत्री ने कहा है कि
दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
सामाजिक प्रभाव और शिक्षकों की चिंता
यह घटना UP में शिक्षकों पर बढ़ते दबाव और रिश्वतखोरी को उजागर करती है।
देवरिया के शिक्षक संगठनों ने प्रदर्शन की चेतावनी दी है और कहा है कि विभागीय भ्रष्टाचार के कारण
कई शिक्षक मानसिक तनाव में हैं। परिजनों ने न्याय की गुहार लगाई है
और कहा है कि सुसाइड नोट में लिखे आरोपों की पूरी जांच होनी चाहिए।
पुलिस जांच जारी है और FSL रिपोर्ट के बाद मामले में बड़ा खुलासा संभव है।
यह देवरिया शिक्षक सुसाइड प्रकरण UP शिक्षा विभाग की छवि पर सवाल खड़े कर रहा है,
जहां शिक्षकों की सुरक्षा और पारदर्शिता पर बहस छिड़ गई है।