उत्तर प्रदेश के देवरिया से एक बेहद गंभीर ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि डेढ़ साल की बच्ची का दिल्ली स्थित एम्स में लिवर ट्रांसप्लांट कराने के नाम पर उसके परिवार से 4 लाख 14 हजार 500 रुपये ले लिए गए। परिवार का आरोप है कि आरोपी ने एम्स में भर्ती और इलाज से संबंधित फर्जी बिल भेजकर उन्हें करीब तीन महीने तक भरोसे में रखा। बाद में जब परिवार बच्ची को लेकर दिल्ली पहुंचा तो कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जन्म से लीवर की बीमारी से जूझ रही थी बच्ची
जानकारी के मुताबिक, देवरिया के सलेमपुर कोतवाली क्षेत्र के जमुआ नंबर एक निवासी परिवार की डेढ़ वर्षीय बच्ची मान्या चौहान को जन्म से ही लीवर संबंधी परेशानी बताई गई थी। डॉक्टरों ने बच्ची के लिए लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी थी।
बच्ची की गंभीर बीमारी और इलाज के भारी खर्च को देखते हुए परिजन कम खर्च में बेहतर इलाज की उम्मीद में दिल्ली स्थित एम्स में ट्रांसप्लांट कराने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान परिवार की मुलाकात एक परिचित के माध्यम से लखनऊ में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े बताए जा रहे हर्षित पाठक से हुई।
एम्स में ट्रांसप्लांट कराने का दिया भरोसा
परिवार के अनुसार, हर्षित पाठक ने बच्ची का एम्स दिल्ली में इलाज और लिवर ट्रांसप्लांट कराने में मदद करने का भरोसा दिया। इसी भरोसे में परिजनों से अलग-अलग समय पर कुल 4,14,500 रुपये लिए गए।
आरोप है कि पैसे लेने के बाद आरोपी की ओर से परिवार को एम्स से संबंधित बिल और अन्य दस्तावेज भेजे जाते रहे। इन दस्तावेजों के आधार पर परिवार को लगता रहा कि बच्ची के इलाज की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
करीब तीन महीने तक परिजनों को रखा भ्रम में
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि परिवार के मुताबिक करीब तीन महीने तक उन्हें इस बात का भरोसा दिलाया जाता रहा कि बच्ची का इलाज एम्स में कराया जा रहा है या उसकी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
परिवार को कथित तौर पर ऐसे बिल भी भेजे गए, जिन्हें बाद में फर्जी बताया गया। जब परिजन बच्ची को लेकर खुद दिल्ली स्थित एम्स पहुंचे, तब उन्हें वास्तविक स्थिति की जानकारी हुई और कथित फर्जीवाड़े का पता चला।
एम्स पहुंचने पर खुली कथित ठगी की पोल
परिजनों के लिए यह स्थिति बेहद परेशान करने वाली थी। एक ओर बच्ची गंभीर बीमारी से जूझ रही थी, वहीं दूसरी तरफ इलाज के नाम पर बड़ी रकम खर्च हो चुकी थी। एम्स में जानकारी लेने के बाद जब कथित दस्तावेजों की सच्चाई सामने आई तो परिवार को ठगी का अहसास हुआ।
इसके बाद बच्ची के इलाज के लिए परिवार ने दूसरे विकल्प की तलाश की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, बच्ची को बाद में मुंबई के एक निजी अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया।
पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच जारी
मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंचने के बाद सलेमपुर कोतवाली पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि परिवार से रकम किस तरह ली गई, कथित दस्तावेज कहां से तैयार हुए और इस पूरे मामले में वास्तव में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
फिलहाल आरोपी पर लगाए गए आरोप जांच के दायरे में हैं। पुलिस जांच पूरी होने और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
स्वास्थ्य विभाग से जुड़ाव के दावे की भी होगी जांच
मामले में जिस व्यक्ति पर परिवार ने ठगी का आरोप लगाया है, उसके लखनऊ के स्वास्थ्य विभाग से जुड़े होने की बात सामने आई है। ऐसे में जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी होगा कि उसका स्वास्थ्य विभाग से वास्तविक संबंध क्या था और उसने परिवार को एम्स में इलाज कराने का भरोसा किस आधार पर दिया।
यदि किसी सरकारी विभाग या संस्थान के नाम का गलत इस्तेमाल हुआ है, तो जांच में इसकी भी पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
इलाज के नाम पर ठगी से कैसे बचें?
गंभीर बीमारी के इलाज के दौरान परिवार भावनात्मक और
आर्थिक दबाव में होता है। ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति के
भरोसे बड़ी रकम देने के बजाय अस्पताल से सीधे जानकारी लेना बेहद जरूरी है।
ध्यान रखने वाली बातें:
- अस्पताल की आधिकारिक हेल्पलाइन या संबंधित विभाग से सीधे संपर्क करें।
- इलाज और भर्ती से जुड़े भुगतान अस्पताल के अधिकृत माध्यम से ही करें।
- किसी व्यक्ति के निजी बैंक खाते में बड़ी रकम भेजने से पहले पूरी तरह सत्यापन करें।
- अस्पताल के बिल और दस्तावेजों की सीधे अस्पताल से पुष्टि करें।
- सरकारी अस्पताल में इलाज कराने के नाम पर कोई बिचौलिया दावा करे तो उसकी पहचान और अधिकार जरूर जांचें।
- ठगी का संदेह होने पर तुरंत पुलिस और संबंधित साइबर अपराध तंत्र को जानकारी दें।
निष्कर्ष
देवरिया की यह घटना बताती है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे परिवारों की
मजबूरी का फायदा उठाकर इलाज के नाम पर ठगी का खतरा कितना गंभीर हो सकता है।
डेढ़ साल की बच्ची के लिवर ट्रांसप्लांट के नाम पर 4.14 लाख
रुपये लेने और कथित फर्जी बिल के जरिए परिवार को गुमराह करने का आरोप सामने आया है।
पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच से यह स्पष्ट होगा कि पूरे मामले में
ठगी किस तरीके से की गई और इसके पीछे कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. देवरिया में कितने रुपये की कथित ठगी हुई?
परिवार के अनुसार बच्ची के लिवर ट्रांसप्लांट के नाम पर कुल 4 लाख 14 हजार 500 रुपये लिए गए।
2. बच्ची की उम्र कितनी है?
बच्ची की उम्र करीब डेढ़ साल बताई गई है।
3. बच्ची का इलाज कहां कराने का भरोसा दिया गया था?
परिवार को दिल्ली स्थित एम्स में लिवर ट्रांसप्लांट कराने का भरोसा दिया गया था।
4. ठगी का पता कैसे चला?
परिजन जब बच्ची को लेकर एम्स दिल्ली पहुंचे तो उन्हें कथित बिल और
इलाज से जुड़ी जानकारी की वास्तविक स्थिति का पता चला।
5. क्या पुलिस ने मामला दर्ज किया है?
हां, उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार सलेमपुर कोतवाली पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
6. क्या आरोपी दोषी साबित हो चुका है?
नहीं। फिलहाल यह मामला पुलिस जांच में है और लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है।
दोष सिद्ध होना न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
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