दिल्ली हाईकोर्ट ने देश के विधि पाठ्यक्रम में किसी भी छात्र को कम उपस्थिति के कारण परीक्षा से वंचित करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि अब विभिन्न विधि महाविद्यालयों में अनिवार्य उपस्थिति की न्यूनतम सीमा के कारण छात्रों को परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जा सकता है। इस संबंध में हाईकोर्ट ने सभी विधि कॉलेजों के लिए जरूरी निर्देश भी जारी किए हैं और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को उपस्थिति के मापदंडों में बदलाव करने का आदेश भी दिया है।
हाईकोर्ट के अनुसार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया को छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और विभिन्न विधि विशेषज्ञों से राय-मशविरा करके उपस्थिति की न्यूनतम सीमा जैसे मापदंडों में बदलाव करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि शिक्षा सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, उनके समग्र जीवन और बहुआयामी विकास से भी जुड़ी है। महज उपस्थिति के आधार पर किसी छात्र के भविष्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित नहीं किया जा सकता।
इस निर्णय की पृष्ठभूमि में 2016 के एक मामले का उल्लेख है, जिसमें एक छात्र को कम उपस्थिति के कारण परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया था। इसके बाद ही न्यायमूर्ति ने सभी कॉलेजों को निर्देश दिया कि छात्रों को कम उपस्थिति के आधार पर परीक्षा से रोका न जाए और BCI को मापदंडों में विवेकपूर्ण बदलाव करने के लिए आवश्यक परामर्श और शोध की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।