सोनिया गांधी को दिल्ली कोर्ट का नोटिस
नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। आरोप है कि उन्होंने 1980-81 में वोटर लिस्ट में नाम गलत तरीके से जुड़वाया, जबकि उनकी भारतीय नागरिकता अप्रैल 1983 में मिली। फ्री प्रेस जर्नल और इंडिया टीवी की 9 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट्स के अनुसार, सत्र न्यायाधीश विशाल गोगने ने आपराधिक संशोधन याचिका पर सुनवाई करते हुए सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजा। याचिकाकर्ता विकाश त्रिपाठी ने दावा किया कि नाम जुड़वाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ। अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026 को होगी। यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, जहां BJP इसे कांग्रेस पर हमले का मौका मान रही है। इस ब्लॉग में हम इस केस की पूरी डिटेल्स, पृष्ठभूमि, कोर्ट प्रक्रिया, राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और कानूनी पहलू बताएंगे। यदि आप राजनीति या चुनावी मुद्दों से जुड़े हैं, तो ये अपडेट्स आपके लिए महत्वपूर्ण हैं।
केस की पृष्ठभूमि: 1980-81 में नाम कैसे जुड़ा, जब नागरिकता नहीं थी?
सोनिया गांधी, मूल रूप से इटली की नागरिक एंटोनिया एल्बिना माइनो एंटोनियो, ने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता ली। याचिकाकर्ता विकाश त्रिपाठी का दावा है कि जनवरी 1980 में न्यू दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र की वोटर लिस्ट में उनका नाम शामिल हो गया। 1982 में नाम हटाया गया, फिर जनवरी 1983 में दोबारा जोड़ा गया – दोनों ही तारीखें नागरिकता से पहले की हैं।
त्रिपाठी ने कहा, “नागरिकता के बिना वोटर लिस्ट में नाम जुड़ना असंभव। फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ, जो प्रतिनिधित्व ऑफ द पीपल एक्ट का उल्लंघन है।” याचिका में FIR दर्ज करने की मांग की गई, लेकिन मजिस्ट्रेट वीबhav चौरसिया ने 11 सितंबर 2025 को खारिज कर दिया। अब सत्र कोर्ट में संशोधन याचिका पर सुनवाई हो रही है।
कोर्ट की कार्रवाई: नोटिस जारी, 6 जनवरी को अगली सुनवाई
राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विशाल गोगने ने सोमवार को सुनवाई की। सीनियर एडवोकेट पवन नरंग ने तर्क दिया, “1980 में नाम जुड़ने के लिए दस्तावेज फोर्ज किए गए। 1982 में नाम हटाया गया, फिर 1983 में जोड़ा – दोनों नागरिकता से पहले।” कोर्ट ने सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
कोर्ट ने सवाल उठाया, “1980 में नाम जुड़वाने के लिए कौन से दस्तावेज जमा किए गए? फर्जी तो नहीं?”
अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026 को। याचिका में IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी),
465 (जालसाजी) और RP एक्ट के तहत FIR की मांग है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: BJP का हमला, कांग्रेस चुप
यह मामला राजनीतिक रंग ले चुका है। BJP नेता अमित मालवीय ने X पर लिखा,
“कांग्रेस का वोटर लिस्ट फ्रॉड फिर उजागर।
सोनिया जी का नाम 1980 में कैसे जुड़ा?” BJP ने इसे ‘कांग्रेस का पुराना इतिहास’ बताया। कांग्रेस ने चुप्पी साधी,
लेकिन राहुल गांधी के करीबी ने कहा, “यह राजनीतिक साजिश है।”
यह पुराना मुद्दा है – 1970-80 के दशक से BJP सोनिया की नागरिकता पर सवाल उठाती रही।
2019 लोकसभा चुनाव में भी यह मुद्दा उठा था।
कानूनी पहलू: RP एक्ट क्या कहता है?
प्रतिनिधित्व ऑफ द पीपल एक्ट 1950 की धारा 16 के अनुसार,
केवल भारतीय नागरिक ही वोटर लिस्ट में नाम दर्ज करा सकते हैं।
फर्जी दस्तावेजों से नाम जुड़वाना अपराध है। याचिकाकर्ता ने कहा,