Delhi Building Collapse: सत्य निकेतन हादसे में 7 मौतों के बाद एक्शन, बिल्डिंग मालिक हरिराम के खिलाफ लुकआउट नोटिस

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत के अचानक ढहने के बाद प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। हादसे में अब तक सात लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद से बिल्डिंग का मालिक हरिराम फरार बताया जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने उसकी तलाश तेज करते हुए उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है।

पुलिस की कई टीमें आरोपी की तलाश में अलग-अलग स्थानों पर दबिश दे रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 10 टीमों को इस कार्रवाई में लगाया गया है और इनमें स्थानीय जिला पुलिस के साथ स्पेशल स्टाफ तथा अन्य ऑपरेशनल यूनिट के अधिकारी शामिल हैं। पुलिस दिल्ली के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।

पांच मंजिला इमारत गिरने से मचा हड़कंप

सत्य निकेतन में यह हादसा रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित यह इमारत लड़कों के लिए पेइंग गेस्ट यानी PG आवास के तौर पर इस्तेमाल की जा रही थी।

हादसे के समय इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था। अचानक पूरी संरचना के ढह जाने से वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। मलबे के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका के बाद राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया।

NDRF, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस और दिल्ली आपदा प्रबंधन से जुड़े दलों ने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान चलाया। दूसरे दिन भी मलबे की तलाशी जारी रही। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब तक 12 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है।

हरिराम के खिलाफ लुकआउट नोटिस क्यों जारी हुआ?

हादसे के बाद पुलिस ने बिल्डिंग मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। FIR में गैर-इरादतन हत्या, इमारत के रखरखाव में लापरवाही और लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने जैसे आरोप शामिल किए गए हैं।

पुलिस का कहना है कि घटना के बाद से हरिराम का पता नहीं चल पाया है। इसी वजह से उसकी तलाश के लिए लुकआउट नोटिस जारी किया गया है। पुलिस टीमें उसके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।

लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद आरोपी के देश से बाहर जाने की संभावनाओं पर भी निगरानी रखने में मदद मिलती है। फिलहाल पुलिस का मुख्य उद्देश्य हरिराम का पता लगाकर उसे पूछताछ और कानूनी कार्रवाई के दायरे में लाना है।

10 पुलिस टीमें तलाश में जुटीं

दिल्ली पुलिस ने हरिराम की तलाश के लिए करीब 10 टीमों का गठन किया है। इन टीमों में जिला पुलिस, स्पेशल स्टाफ और अन्य ऑपरेशनल यूनिट के अधिकारी शामिल हैं। प्रत्येक टीम की निगरानी वरिष्ठ अधिकारी स्तर से की जा रही है।

पुलिस दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी संभावित ठिकानों की तलाश कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हादसे के बाद आरोपी कहां गया और उसके संपर्क में कौन-कौन लोग हैं।

पुलिस की कार्रवाई का दायरा बढ़ने से साफ है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।

मरम्मत के दौरान हुआ था हादसा

सत्य निकेतन की जिस इमारत में हादसा हुआ, वहां कथित तौर पर मरम्मत या बदलाव का काम चल रहा था। यही पहलू अब जांच का अहम हिस्सा बन गया है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि मरम्मत के दौरान इमारत की संरचना में कोई ऐसा बदलाव तो नहीं किया गया था, जिससे उसकी मजबूती प्रभावित हुई हो। कुछ रिपोर्टों में भार वहन करने वाली दीवारों में संभावित बदलाव की बात सामने आई है, लेकिन हादसे का अंतिम कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

सात लोगों की मौत से बढ़ी चिंता

इस हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। बचाव अभियान के दौरान

कई लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन कुछ लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी।

हादसे के बाद इलाके में सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। सत्य निकेतन

दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक स्थित घनी आबादी वाला क्षेत्र है,

जहां बड़ी संख्या में छात्र और युवा PG तथा हॉस्टल में रहते हैं।

ऐसे इलाकों में पुराने भवनों को नए उपयोग के लिए इस्तेमाल किए

जाने के साथ उनकी संरचनात्मक सुरक्षा की जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

आसपास की इमारतों पर भी प्रशासन की नजर

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार और नगर निगम ने आसपास की

इमारतों की सुरक्षा को लेकर कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने

घटनास्थल का दौरा कर राहत और बचाव अभियान का जायजा लिया।

सरकार की ओर से PG और आसपास की इमारतों का निरीक्षण कराने तथा

नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। अवैध निर्माण वाली

इमारतों को सील करने की कार्रवाई की भी बात कही गई है।

जिम्मेदार अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई

हादसे के बाद सिर्फ बिल्डिंग मालिक की भूमिका ही जांच के दायरे में नहीं है।

प्रशासनिक स्तर पर यह भी देखा जा रहा है कि इमारत की स्थिति को लेकर

संबंधित विभागों की ओर से पहले कोई निरीक्षण या कार्रवाई की गई थी या नहीं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि यदि जांच में किसी

MCD अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो

उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने साफ किया है कि

भवन सुरक्षा से जुड़े मामलों में लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

मजिस्ट्रेट जांच के भी आदेश

सत्य निकेतन हादसे की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली सरकार ने

मजिस्ट्रेट जांच के आदेश भी दिए हैं। इस जांच के जरिए हादसे के कारणों, भवन की स्थिति,

मरम्मत कार्य और संभावित नियम उल्लंघन की पड़ताल की जाएगी।

जांच से यह भी स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इमारत में किस प्रकार का काम चल रहा था और

क्या उस काम के लिए जरूरी अनुमति या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था।

हाई कोर्ट में भी होगी सुनवाई

सत्य निकेतन हादसे का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गया है।

हादसे को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति दी है।

इससे मामले की न्यायिक निगरानी और भवन सुरक्षा से जुड़े व्यापक सवालों पर भी चर्चा की संभावना बढ़ गई है।

PG और पुराने भवनों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में पुराने और बहुमंजिला भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर

गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर वे इमारतें जिनका इस्तेमाल बड़ी संख्या में छात्रों या अन्य

लोगों के रहने के लिए किया जा रहा है, उनकी नियमित संरचनात्मक जांच जरूरी है।

हादसे के बाद सरकार की ओर से PG, हॉस्टल और अन्य सार्वजनिक उपयोग वाली

इमारतों की सुरक्षा जांच पर जोर दिया जा रहा है। इससे भविष्य में

ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नई व्यवस्था तैयार होने की उम्मीद है।

निष्कर्ष

सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत के ढहने की घटना ने दिल्ली को झकझोर दिया है।

हादसे में सात लोगों की मौत के बाद अब पुलिस ने बिल्डिंग मालिक हरिराम के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है।

उसकी तलाश के लिए दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पुलिस की टीमें सक्रिय हैं।

वहीं, हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए हैं और आसपास की इमारतों की सुरक्षा

जांच भी शुरू की जा रही है। अब जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि आखिर मरम्मत के दौरान क्या हुआ और

इमारत इतनी कमजोर कैसे हुई कि देखते ही देखते पूरी संरचना ढह गई।

जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी तय हो सकेगी।

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