फिशरमेन चंद्रभान निषाद आज के सोमवर पर साहस और भावना का प्रतीक हैं। वे न केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता और ‘फिशरमेन आर्मी’ के संस्थापक हैं, बल्कि निषाद, मल्लाह, केवट, बिंद, तथा समस्त मछुआरा समुदाय के हक और अधिकारों की आवाज हैं । उनका जीवन संघर्ष, जागरूकता और सामाजिक बदलाव की प्रेरणा देता है।
सामाजिक क्रांति के अग्रदूत
चंद्रभान निषाद ने अपने विचारों से शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों में क्रांति लाने का संकल्प लिया है वे समाज को आत्मनिर्भर और जागरूक बनाना चाहते हैं। उनका मानना है कि जब तक समाज अपने अधिकार के लिए संगठित नहीं होगा, तब तक परिवर्तन संभव नहीं है
दीपदानोत्सव दिवस: समता और प्रकाश का पर्व
दीपदानोत्सव दिवस पर चंद्रभान निषाद की मंगल कामनाएँ समाज के हर वर्ग को रोशन करने का संकेत हैं। बौद्ध परंपरा में दीपदानोत्सव सिर्फ दीप जलाने का त्योहार नहीं, बल्कि ज्ञान व समता का संदेश भी है बुद्ध, अशोक और डॉ. अंबेडकर के आदर्शों से समाज को जागरूक और संगठित करने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
साहसी नेतृत्व और सामाजिक संघर्ष
फिशरमेन आर्मी के माध्यम से, वे मछुआरा समाज को संगठित कर उनके संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका नेतृत्व साहस, प्रतिबद्धता और मातृभूमि के लिए समर्पण का उदाहरण है। वे युवाओं को शिक्षा, संघर्ष और संगठन का मंत्र देकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
निषाद समुदाय की नई पहचान
चंद्रभान निषाद ‘फिशरमेन’ उपनाम से अपनी जाति व पेशे पर गर्व व्यक्त करते हैं, जिससे पूरे समाज में जागरूकता और आत्मसम्मान का भाव पैदा हुआ है। आज सोमवर के दिन उनका कार्य और आदर्श हम सभी के लिए प्रेरणा हैं — ‘अप्प दीपो भव’ अर्थात् ‘अपने दीपक स्वयं बनो’।