लोकसभा में चुनाव सुधारों पर बहस
नई दिल्ली। लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चल रही बहस ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 10 दिसंबर 2025 को स्पष्ट शब्दों में कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चर्चा नहीं हो सकती है, क्योंकि चुनाव आयोग सरकार के अधीन नहीं है, बल्कि एक स्वतंत्र संस्था है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह एसआईआर को लेकर झूठ फैला रही है और कहा, “कांग्रेस की ओर से जो झूठ फैलाया गया है, मैं उसका जवाब दूंगा।” यह बयान चुनाव सुधार बिल पर चर्चा के दौरान आया, जहां विपक्ष ने एसआईआर को लेकर सरकार पर हमला बोला था। अमित शाह के इस बयान से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है, और यह 2026 विधानसभा चुनाव से पहले चुनावी मुद्दों को गर्माने का संकेत देता है।
लोकसभा में चुनाव सुधारों पर बहस की शुरुआत
लोकसभा में 10 दिसंबर को चुनाव सुधार बिल पर चर्चा चल रही थी। विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एसआईआर के माध्यम से सरकार फर्जी वोटर बनवा रही है और विपक्षी समर्थकों को वोटर लिस्ट से हटा रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, “एसआईआर चुनावी धांधली का हथियार है। सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।”
अमित शाह का जोरदार जवाब: एसआईआर पर चर्चा नहीं हो सकती
गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, “एसआईआर पर चर्चा नहीं हो सकती है, क्योंकि चुनाव आयोग सरकार के अधीन काम नहीं करता है। वह एक स्वतंत्र संस्था है, जो संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत कार्य करती है।” उन्होंने कांग्रेस पर पलटवार किया और कहा, “कांग्रेस एसआईआर को लेकर झूठ फैला रही है। कांग्रेस की ओर से जो झूठ फैलाया गया है, मैं उसका जवाब दूंगा।”
शाह ने कहा कि एसआईआर चुनाव आयोग का नियमित अभियान है, जो मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करता है।
उन्होंने कहा, “यह फर्जी वोटरों को हटाने और नए मतदाताओं को जोड़ने का माध्यम है। विपक्ष इसे राजनीतिक रंग दे रहा है।”
कांग्रेस के आरोप: एसआईआर चुनावी धांधली का हथियार
एसआईआर पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह योजना सरकार के इशारे पर चल रही है।
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने X पर लिखा, “एसआईआर से लाखों विपक्षी वोटरों के नाम
हटाए जा रहे हैं। यह लोकतंत्र की हत्या है।”
कांग्रेस ने मांग की कि एसआईआर पर लोकसभा में चर्चा हो और चुनाव आयोग जवाब दे।
चुनाव आयोग की भूमिका: स्वतंत्रता पर जोर
चुनाव आयोग ने हमेशा अपनी स्वतंत्रता का दावा किया है। अनुच्छेद 324 के तहत यह सरकार से स्वतंत्र है।
आयोग ने कहा, “एसआईआर नियमित प्रक्रिया है, जो हर साल चलती है। यह राजनीतिक नहीं है।”
2025 में एसआईआर से 2 करोड़ फर्जी वोटर हटाए गए हैं।