फतेहपुर सीकरी शाही तालाब में
आगरा के फतेहपुर सीकरी कस्बे में स्थित प्राचीन शाही तालाब एक बार फिर ‘मौत का तालाब’ बनकर सुर्खियों में आ गया है। यह तालाब कई सालों से आत्महत्या के प्रयासों और मौतों का गवाह रहा है। शुक्रवार को एक दिन में दो घटनाएं सामने आईं – सुबह एक युवक का शव तालाब में मिला, जबकि दोपहर में एक युवती ने जान देने के लिए तालाब में छलांग लगा दी। हालांकि पुलिस की तत्परता और साहस से युवती की जिंदगी बच गई। यह घटना फतेहपुर सीकरी में मानसिक स्वास्थ्य, महिलाओं की सुरक्षा और तालाब की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
सुबह मिली युवक की लाश, दोपहर में युवती की छलांग
शुक्रवार सुबह फतेहपुर सीकरी के शाही तालाब में एक युवक (उम्र लगभग 25-28 वर्ष) का शव तैरता मिला। सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ टीम मौके पर पहुंची। शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या का संकेत मिला है, लेकिन परिवार से पूछताछ और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
दोपहर करीब 2 बजे तालाब पर फिर हड़कंप मच गया। एक युवती (उम्र 22-24 वर्ष) ने तालाब में छलांग लगा दी। आसपास मौजूद लोगों ने चीख-पुकार मचाई और पुलिस को सूचना दी। फतेहपुर सीकरी पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया से युवती को पानी से बाहर निकाला गया। उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। पुलिस ने युवती से बातचीत की शुरुआत की है, लेकिन अभी तक आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। परिवार का कहना है कि वह पारिवारिक विवाद या मानसिक तनाव से परेशान थी।
‘मौत का तालाब’ क्यों कहलाता है शाही तालाब?
फतेहपुर सीकरी का यह प्राचीन तालाब मुगल काल से मौजूद है, लेकिन पिछले 10-15 वर्षों में यहां दर्जनों आत्महत्या के प्रयास और मौतें हो चुकी हैं। तालाब गहरा है, आसपास कोई बैरिकेडिंग या सुरक्षा गार्ड नहीं है। शाम के समय अंधेरा होने पर लोग यहां अकेले आते हैं। स्थानीय लोग इसे ‘मौत का तालाब’ कहते हैं। कई बार प्रेम प्रसंग, पारिवारिक विवाद, आर्थिक तंगी या मानसिक बीमारी के कारण युवा यहां जान देने आते हैं। प्रशासन ने कई बार बैरिकेडिंग लगाने या गश्त बढ़ाने की बात कही, लेकिन व्यवहारिक रूप से कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।
पुलिस की तत्परता: युवती की जान बचाई
पुलिस की सराहना हो रही है कि उन्होंने तुरंत रेस्क्यू किया। मौके पर मौजूद कांस्टेबल और
अन्य कर्मियों ने बिना देर किए पानी में उतरकर युवती को बाहर निकाला।
एसपी आगरा ने कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तालाब के आसपास सीसीटीवी और
गश्त बढ़ाई जाएगी। साथ ही, मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग सेंटर स्थापित करने की बात कही गई है।
समाज पर सवाल: मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा की जरूरत
फतेहपुर सीकरी में एक दिन में दो घटनाएं मानसिक स्वास्थ्य संकट को उजागर करती हैं।
युवाओं में तनाव, डिप्रेशन और पारिवारिक दबाव बढ़ रहा है। तालाब जैसे खतरनाक स्थानों पर
आसान पहुंच से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि काउंसलिंग,
हेल्पलाइन (जैसे 104, 9152987821) और परिवार में खुली बातचीत जरूरी है।
प्रशासन से अपील है कि तालाब के चारों ओर रेलिंग, लाइटिंग और गश्त बढ़ाई जाए।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि जिंदगी की कीमत कितनी अनमोल है।
युवती की जान बचने से उम्मीद की किरण है,
लेकिन ‘मौत का तालाब’ अब शांति का प्रतीक बने, मौत का नहीं।
