गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDU) की आधिकारिक वेबसाइट www.ddugu.ac.in पर हाल ही में साइबर हमले का दंश झेलना पड़ा। 29 नवंबर 2025 को सामने आई हैकिंग की घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत कदम उठाते हुए सर्वर को शिफ्ट करने का फैसला लिया। हफ्ते भर से चल रही ऑडिट प्रक्रिया के बीच यह कदम छात्रों और स्टाफ के लिए राहत लेकर आया है। लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, हैकर्स ने वेबसाइट पर तुर्की की एक कंपनी की डिटेल्स अपलोड कर दी थीं, जिससे एडमिशन, रिजल्ट और अन्य सेवाएं ठप हो गईं। यह घटना न केवल DDU बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के शैक्षिक संस्थानों के लिए साइबर सिक्योरिटी पर सवाल खड़ी करती है।
DDU वेबसाइट हैकिंग का पूरा मामला: तुर्की कंपनी की डिटेल्स का रहस्य
29 नवंबर 2025 की सुबह छात्र जब वेबसाइट पर लॉगिन करने पहुंचे, तो उन्हें DDU की बजाय तुर्की की एक अनजान कंपनी की होमपेज दिखी। कंपनी का नाम और लोगो के साथ-साथ उसके प्रोडक्ट्स की लिस्ट वेबसाइट पर लोड हो रही थी। विश्वविद्यालय के आईटी सेल को जब इसकी शिकायत मिली, तो तुरंत जांच शुरू हुई। प्रारंभिक रिपोर्ट्स में पता चला कि यह एक साइबर अटैक था, जिसमें हैकर्स ने वेबसाइट के होस्टिंग सर्वर में सेंधमारी की। DDU के रजिस्ट्रार ने बताया कि हैकिंग SQL इंजेक्शन या DDoS अटैक से जुड़ी लग रही है, जो शैक्षिक वेबसाइट्स पर आम है।
इस घटना से एग्जाम फॉर्म, रिजल्ट चेकिंग और ऑनलाइन एडमिशन प्रक्रिया पूरी तरह रुक गई। हजारों छात्र परेशान हो गए, खासकर जो पीजी और यूजी कोर्सेस के लिए अप्लाई कर रहे थे। विश्वविद्यालय ने तुरंत वेबसाइट को ऑफलाइन कर दिया और वैकल्पिक ईमेल सिस्टम से सूचनाएं भेजनी शुरू कीं। यह पहली बार नहीं है जब DDU जैसी यूनिवर्सिटी हैक का शिकार हुई हो। 2024 में भी UP के कई कॉलेजों की साइट्स पर इसी तरह के अटैक हुए थे।
ऑडिट प्रक्रिया: हफ्ते भर की मशक्कत के बाद सर्वर शिफ्ट
हैकिंग के तुरंत बाद DDU प्रशासन ने साइबर सेल और NIC (नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर) की मदद से ऑडिट प्रक्रिया शुरू की। यह प्रक्रिया 30 नवंबर से चली और 6 दिसंबर तक चली, जिसमें सर्वर के सभी डेटा, लॉग फाइल्स और सिक्योरिटी ब्रेक को स्कैन किया गया। ऑडिट में पाया गया कि हैकर्स ने केवल फ्रंटएंड को टारगेट किया था, बैकएंड डेटाबेस सुरक्षित था। लेकिन सावधानी के तौर पर पूरा सर्वर शिफ्ट करने का फैसला लिया गया।
नया सर्वर क्लाउड-बेस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर पर शिफ्ट किया गया है, जो AWS या NIC के सिक्योर होस्टिंग पर आधारित है। रजिस्ट्रार डॉ. एके सिंह ने कहा, “ऑडिट में कोई बड़ा डेटा लीक नहीं मिला, लेकिन भविष्य के लिए फायरवॉल और एन्क्रिप्शन मजबूत करेंगे।” इस शिफ्ट से वेबसाइट दोबारा लाइव हो गई है, लेकिन कुछ सर्विसेज अभी टेस्टिंग में हैं। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे ऑफिशियल ऐप या ईमेल से अपडेट लें।
साइबर अटैक के कारण: शैक्षिक संस्थानों पर क्यों निशाना?
भारत में शैक्षिक वेबसाइट्स साइबर अटैक का प्रमुख टारगेट बन रही हैं। CERT-In की 2025 रिपोर्ट के अनुसार
, 40% अटैक यूनिवर्सिटी साइट्स पर हुए
, क्योंकि इनमें स्टूडेंट डेटा (आधार, फीस, पर्सनल इंफो) का खजाना होता है।
DDU के केस में संभावित कारण पुराना सॉफ्टवेयर, कमजोर पासवर्ड पॉलिसी या थर्ड-पार्टी प्लगइन्स थे।
हैकर्स अक्सर रैनसमवेयर या डेटा ब्रीच के लिए ऐसा करते हैं।
UP में 2025 में 150 से ज्यादा ऐसे केस दर्ज हो चुके हैं।
छात्रों पर असर: एग्जाम और एडमिशन में देरी
इस हैकिंग से सबसे ज्यादा प्रभावित छात्र हुए। डिसेंबर में होने वाली परीक्षाओं के फॉर्म भरना मुश्किल हो गया।
ग्रामीण इलाकों के छात्र, जो ऑनलाइन ही निर्भर हैं, सबसे परेशान। विश्वविद्यालय ने एक्सटेंशन दिया है
, लेकिन भविष्य में साइबर सिक्योरिटी कोर्सेस को अनिवार्य करने की योजना है।
साइबर सिक्योरिटी के उपाय: DDU और छात्र क्या करें?
- विश्वविद्यालय स्तर पर: रेगुलर ऑडिट, MFA (मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) और फायरवॉल अपग्रेड।
- छात्रों के लिए: मजबूत पासवर्ड यूज करें, फिशिंग ईमेल से सावधान रहें, VPN का इस्तेमाल।
- रिपोर्टिंग: संदिग्ध एक्टिविटी पर cybercrime.gov.in पर शिकायत। ये स्टेप्स अपनाकर 70% अटैक रोके जा सकते हैं
- , जैसा IBM रिपोर्ट कहती है।