परिचय: एक सनसनीखेज साइबर ठगी का मामला
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद के बेटे डॉ. अमित कुमार निषाद के साथ साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हाल ही में गोरखपुर में दर्ज हुई इस शिकायत ने न केवल राजनीतिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि साइबर क्राइम की बढ़ती घटनाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। ठगों ने अमित के मोबाइल नंबर का दुरुपयोग कर फर्जी बैंक खाता खोला और UPI ID सक्रिय करके उनके नाम से आने वाले पार्टी फंड के लगभग 20,000 रुपये उड़ा लिए। यह घटना 29 नवंबर 2025 को सामने आई, जब अमित ने शाहपुर थाने में तहरीर दर्ज कराई।
मंत्री संजय निषाद, जो निषाद पार्टी के अध्यक्ष भी हैं, के परिवार पर साइबर अपराधियों का निशाना साधना दर्शाता है कि डिजिटल युग में कोई भी सुरक्षित नहीं है। आइए, इस मामले की पूरी कथा को विस्तार से समझते हैं।
घटना का पूरा विवरण: कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
डॉ. अमित निषाद, जो एक डॉक्टर हैं और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहते हैं, का मोबाइल नंबर कई महत्वपूर्ण संपर्कों से जुड़ा हुआ है। इसमें राजनीतिक संगठनों, अनुदानकर्ताओं और पार्टी फंड से जुड़े ट्रांजेक्शन शामिल हैं। प्रारंभिक जांच के अनुसार, ठगों ने अमित के नंबर पर आने वाले OTP का दुरुपयोग किया। उन्होंने बैंक ऑफ बड़ौदा की दिल्ली स्थित मंडावली शाखा में फर्जी खाता खोला, जिसका नाम अमित कुमार निषाद ही रखा गया। इस खाते पर UPI ID भी सक्रिय कर दी गई, जिससे पार्टी से जुड़े फंड सीधे ठगों के पास ट्रांसफर हो गए।
अमित ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से उनके खाते में कोई भुगतान नहीं आ रहा था, जिस पर उन्होंने ध्यान नहीं दिया। लेकिन जब बैंक स्टेटमेंट चेक किया, तो पता चला कि जनवरी 2024 से ही कई छोटे-मोटे ट्रांजेक्शन फर्जी खाते में डायवर्ट हो चुके थे। कुल मिलाकर 20,000 रुपये का नुकसान हुआ है, लेकिन वास्तविक राशि इससे अधिक हो सकती है। यह ठगी इतनी सफाई से की गई कि अमित को तुरंत शक नहीं हुआ।
आरोपी की पहचान: समरीन अली फरार, पुलिस की जांच तेज
पुलिस जांच में मुख्य आरोपी के रूप में समरीन अली का नाम सामने आया है। प्रारंभिक पूछताछ से पता चला कि अली ने दिल्ली में यह फर्जी खाता खुलवाया था। शनिवार को पुलिस ने साइबर सेल की मदद से खाते की डिटेल निकाली, जिसमें अली का नाम दर्ज है। शाहपुर थाना प्रभारी नीरज राय ने बताया कि तहरीर के आधार पर IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) और IT एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच अधिकारी अवधेश तिवारी को केस सौंपा गया है।
अली फिलहाल फरार है, लेकिन साइबर सेल की टीम दिल्ली और आसपास के इलाकों में छापेमारी कर रही है। पुलिस को शक है कि यह एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का हिस्सा हो सकता है, जो VIP नंबर्स को टारगेट करता है। अमित ने यह भी खुलासा किया कि जनवरी 2024 में उनकी फेसबुक आईडी भी हैक हो चुकी थी, जिसमें उनके करीबियों को अश्लील मैसेज भेजे गए थे। उसकी भी रिपोर्ट दर्ज हुई थी, लेकिन अब दोनों मामलों की संयुक्त जांच चल रही है।
साइबर ठगी का बढ़ता खतरा: आंकड़े जो चिंता बढ़ाते हैं
यह मामला अकेला नहीं है। उत्तर प्रदेश में साइबर क्राइम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
NCRB के अनुसार, 2024 में UP में 45,000 से अधिक साइबर फ्रॉड केस दर्ज हुए
, जिनमें UPI और फर्जी अकाउंट से जुड़े मामले 60% हैं।
मंत्री के बेटे जैसे हाई-प्रोफाइल टारगेट पर हमला दर्शाता है कि ठग
अब साधारण लोगों से आगे बढ़कर प्रभावशाली व्यक्तियों को निशाना बना रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल नंबर लीक होना
और OTP शेयरिंग ही इन ठगियों का आधार है।
RBI की एक RTI रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 5 सालों में देशभर में 5.4 लाख ऑनलाइन फ्रॉड हुए,
जिनसे 1,146 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
UP में ही 2025 के पहले 10 महीनों में 20% वृद्धि दर्ज की गई है।
बचाव के उपाय: साइबर फ्रॉड से कैसे बचें?
इस घटना से सबक लेते हुए, यहां कुछ जरूरी टिप्स दिए जा रहे हैं:
- OTP कभी शेयर न करें: कोई भी बैंक या UPI कॉल पर OTP न बताएं।
- टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू रखें: ऐप लॉक और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन यूज करें।
- अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें: फिशिंग ईमेल या मैसेज से सावधान रहें।
- बैंक स्टेटमेंट नियमित चेक करें: छोटे ट्रांजेक्शन पर नजर रखें।
- साइबर सेल हेल्पलाइन: 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें।
- VIP नंबर्स सिक्योर करें: राजनीतिक कार्यकर्ता विशेष सॉफ्टवेयर यूज करें।
