गोरखपुर में नई दिशा फाउंडेशन के सामूहिक विवाह
गोरखपुर में 20 जनवरी 2026 को एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जो लंबे समय तक याद रहेगा। नई दिशा फाउंडेशन की ओर से नेपाल क्लब में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में 51 गरीब, जरूरतमंद और असहाय जोड़ों ने एक साथ सात फेरे लिए। एक साथ 51 दूल्हों की बारात निकली, जिसे देखने के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। शहर के विभिन्न इलाकों से लोग इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बने। फाउंडेशन की अध्यक्ष सुधा मोदी (जिन्हें शहर सुधा माँ के नाम से जानता है) ने इस कार्यक्रम को संभव बनाया, जिसमें दहेज मुक्त विवाह की मिसाल पेश की गई।
बारात का भव्य नजारा
सुबह से ही नेपाल क्लब परिसर में रौनक छाई रही। 51 दूल्हों की बारात एक साथ निकली – घोड़ियां, बैंड-बाजे, नाच-गाने और ढोल-नगाड़ों की धुन के साथ। दूल्हे राजसी लिबास में सजे हुए थे, जबकि बारात में शामिल लोग उत्साह से झूम रहे थे। सड़कों पर बारात गुजरते ही लोग बालकनियों, छतों और सड़क किनारे खड़े होकर तालियां बजाते और वीडियो बनाते दिखे। यह नजारा ऐसा था मानो पूरा शहर उत्सव मना रहा हो। बारात नेपाल क्लब पहुंची तो वहां पहले से सज्जा हुआ मंडप इंतजार कर रहा था।
एक मंडप में 51 दुल्हनें
मंडप में 51 दुल्हनें एक साथ बैठीं – लाल जोड़े में सजी, चांद-सी नजर आ रही थीं। सभी दुल्हनें गरीब परिवारों से थीं, जिनकी शादी दहेज के बोझ से मुक्त हुई। मंत्रोच्चार, शहनाई और वेद मंत्रों की गूंज के बीच वर-वधू ने सात फेरे लिए। सुधा मोदी ने सभी जोड़ों का तिलक लगाकर स्वागत किया और कन्यादान करवाया। कार्यक्रम में शहर के संभ्रांत लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और आमजन बड़ी संख्या में शामिल हुए। भावुक पल तब आए जब माता-पिता अपनी बेटियों को विदा करते हुए रो पड़े।
फाउंडेशन का योगदान
नई दिशा फाउंडेशन लंबे समय से सामाजिक कार्य कर रही है। इस आयोजन में सभी नवविवाहित जोड़ों को घरेलू सामान, वस्त्र, बर्तन और अन्य जरूरी उपहार दिए गए। सुधा मोदी ने कहा, “यह सिर्फ शादी नहीं, बल्कि समाज में दहेज जैसी कुरीति के खिलाफ लड़ाई है। गरीब बेटियों को सम्मानजनक जीवन देने का प्रयास है।” फाउंडेशन ने सभी जोड़ों को आर्थिक और सामाजिक संबल देने का वादा किया।
भीड़ और उत्साह
कार्यक्रम में इतनी भीड़ उमड़ी कि क्लब परिसर खचाखच हो गया। लोग दूर-दूर से आए थे –
कुछ तो वीडियो बनाने और फोटो खिंचवाने। सोशल मीडिया पर #51CouplesGorakhpur और #NaiDishaMassWedding जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
कई लोगों ने इसे इंसानियत की मिसाल बताया।
विदाई बेला में नवदंपतियों के साथ नृत्य-संगीत हुआ, जहां खुशी और बिछड़न के भाव मिले-जुले थे।
महत्व और संदेश
यह सामूहिक विवाह दहेज मुक्त समाज की दिशा में एक बड़ा कदम है।
गोरखपुर जैसे शहर में जहां दहेज की समस्या आम है, ऐसे आयोजन प्रेरणा देते हैं।
फाउंडेशन ने साबित किया कि सामूहिक प्रयास से गरीब बेटियों का भविष्य संवार सकता है।
कार्यक्रम ने सामाजिक एकता और मानवीय संवेदना का संदेश दिया।