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उपराष्ट्रपति पद के लिए सीपी राधाकृष्णन राजग के प्रत्याशी
कई निशाने साधने की कवायद : संघ की पृष्ठभूमि… तमिलनाडु निवासी, अभी महाराष्ट्र के राज्यपाल, गणित राधाग के पक्ष में
नई दिल्ली। महाराष्ट्र के राज्यपाल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक और तमिलनाडु के निवासी लंबे समय तक भाजपा के संगठन में काम करने वाले राधाकृष्णन (68) उपराष्ट्रपति चुनाव में राजग का प्रत्याशी होंगे। चुनाव रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में राधाकृष्णन के नाम पर मुहर लगी। बैठक में शामिल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने उनका नाम तय किया है।
सीपी राधाकृष्णन 21 अगस्त को नामांकन दाखिल करेंगे। मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ उनका स्वागत करेंगे। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राधाकृष्णन को प्रत्याशी बनाए जाने की जानकारी दी और ट्वीट व छायाचित्र साझा किए।
उन्होंने लिखा – आतंक के खिलाफ, नोटबंदी व डिजिटल इंडिया के अभियान में योगदान की झलक मिली। राधाकृष्णन को प्रत्याशी बनाए जाने पर पीएम मोदी ने उनका आभार व्यक्त किया है।
चार राज्यों के राज्यपाल
राधाकृष्णन मार्च, 2023 में झारखंड के राज्यपाल बने थे। मार्च से जुलाई 2024 तक उनके पास पुदुचेरी के उपराज्यपाल व तेलंगाना के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार था। जुलाई में महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाया गया।
भाजपा अध्यक्ष का कोरग्रुप
नड्डा ने कहा, राधाकृष्णन के निर्दोष निर्वाचित जीवन के साथ भाजपा को मजबूत बनाने के प्रयास सभी के लिए प्रेरणा हैं। झारखंड, पुदुचेरी, तेलंगाना, महाराष्ट्र के राज्यपाल पद की उनकी उपलब्धियां, अन्ना चंद्रशेखरन नायडू, के. अंबालाल, के. अंबालाल, के. अंबालाल आदि की तरह उनके अनुभव ने भारतीय जनसंघ पार्टी की गहरी पहचान और देश की सेवा का मार्ग प्रशस्त किया है। राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति पद के लिए उपयुक्त प्रत्याशी साबित होंगे।
सबक भी, संदेश भी – विचारधारा को तरजीह
भाजपा व जनसंघ ध्रुवीकृत प्रकरण से सबक लेकर आगे बढ़े हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके नाम का ऐलान कर तमिलनाडु व दक्षिण भारत की राजनीति में पार्टी की खास पकड़ मजबूत बनाने की कोशिश की है। पार्टी ने संघ के रिश्तों व विचारधारा का संदेश देने के साथ पार्टी के राज्यपाल व राज्यसभा के मनोनयन के जरिए विचारधारा से जुड़े लोगों को प्रमुखता देने का संदेश दिया है।
दक्षिण को साथ
भाजपा का पूरे दक्षिण भारत में विस्तार देने की कोशिश की है। अगले साल तमिलनाडु में चुनाव हैं। वहां द्रमुक सरकार हिंदी विरोधी अभियान के साथ परिसीमन पर आंदोलित है। उपराष्ट्रपति चुनाव भाजपा ने दक्षिण विरोधी होने के द्रमुक के आरोप का जवाब देने का ठोस कदम उठाया है। द्रमुक के लिए भी उनका विरोध आसान नहीं होगा।
ओबीसी चेहरा
पिछड़े समुदाय से आने वाले राधाकृष्णन बिहार के चुनाव तक जातीय समीकरणों के लिहाज से भी फिट बैठते हैं।
जीत में संशय नहीं
- उपराष्ट्रपति प्रत्याशी की जीत के लिए चाहिए : 392 वोट
- राजग के पास है : 422 वोट
विशिष्ट पहचान बनाई
लंबे सार्वजनिक जीवन में राधाकृष्णन ने व्यापार, समाज व बैंकों से संबंधित मामलों के साथ सामाजिक कार्यों के जरिए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। राज्यपाल रहते हुए उन्होंने महाराष्ट्र में शिक्षा, स्वास्थ्य व उद्योग के क्षेत्र में तमिलनाडु जैसे अनुभवों को लागू किया।