गोरखपुर AIIMS में HOD को लेखाकार का अतिरिक्त प्रभार
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS Gorakhpur) में प्रशासनिक स्तर पर एक नया विवाद सामने आया है। विभागाध्यक्ष (HOD) को लेखाकार (अकाउंटेंट) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, जिसके कारण छात्रों में रोष है। छात्रों का कहना है कि यह दोहरी जिम्मेदारी न केवल प्रशासनिक कार्यों में देरी का कारण बन रही है, बल्कि शैक्षणिक व्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित कर रही है।
गोरखपुर AIIMS में HOD पर दोहरी जिम्मेदारी का बोझ: छात्रों की शिकायत
छात्रों के अनुसार, 25 दिसंबर 2024 से विभागाध्यक्ष को लेखाकार का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इस अतिरिक्त जिम्मेदारी के चलते HOD को विभागीय शिक्षण कार्य, छात्रों की पढ़ाई-लिखाई और रिसर्च गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है। परिणामस्वरूप क्लासेस, प्रैक्टिकल, सेमिनार और अन्य शैक्षणिक कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं। छात्रों ने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक कामों में देरी से विभाग में अराजकता फैल रही है और मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है।
यह मामला AIIMS गोरखपुर में पहले से चल रही कई समस्याओं में एक और जुड़ गया है, जहां छात्र पहले भी विभिन्न मुद्दों पर आवाज उठा चुके हैं। छात्रों का मानना है कि एक व्यक्ति द्वारा दो महत्वपूर्ण पदों का संभालना संस्थान के लिए उचित नहीं है, खासकर जब संस्थान अभी विकास के दौर में है और फैकल्टी की कमी पहले से मौजूद है।
स्वास्थ्य मंत्रालय से उम्मीद: फैसला जल्द होने की संभावना
छात्रों ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि मंत्रालय को इस दोहरी जिम्मेदारी को समाप्त कर नए लेखाकार की नियुक्ति या अलग प्रभार सौंपने का फैसला लेना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो शैक्षणिक सत्र और छात्रों की पढ़ाई पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है।
AIIMS गोरखपुर एक राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है, जो प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत स्थापित किया गया है।
यहां MBBS, MD/MS और अन्य कोर्स चलाए जाते हैं।
छात्रों की शिकायतों पर यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो
संस्थान की प्रतिष्ठा और शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
छात्रों की मांग और संभावित समाधान
- तत्काल अलग लेखाकार की नियुक्ति: छात्र चाहते हैं कि
- HOD को केवल शिक्षण और विभागीय कार्यों पर फोकस करने दिया जाए।
- प्रशासनिक सुधार: अतिरिक्त प्रभार की प्रथा को समाप्त कर पदों को अलग-अलग रखा जाए।
- शैक्षणिक गतिविधियों की बहाली: प्रभावित क्लासेस और प्रोग्राम को जल्द बहाल किया जाए।
यह मामला न केवल गोरखपुर AIIMS बल्कि अन्य AIIMS संस्थानों के लिए भी एक सबक है,
जहां प्रशासनिक और शैक्षणिक जिम्मेदारियों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
स्वास्थ्य मंत्रालय से जल्द फैसला आने की उम्मीद है, जिससे छात्रों को राहत मिल सके।
AIIMS गोरखपुर में सुधार की यह मांग छात्रों के भविष्य और मेडिकल शिक्षा की बेहतरी से जुड़ी है।
उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी इस पर गंभीरता से विचार करेंगे।