गोरखपुर में गैस उपभोक्ताओं
गोरखपुर में एलपीजी गैस उपभोक्ताओं के सामने इन दिनों एक नई समस्या खड़ी हो गई है। गैस एजेंसियों द्वारा पुराने वितरण रिकॉर्ड के आधार पर नया डीएसी यानी डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड भेजा जा रहा है, जिससे हजारों उपभोक्ता परेशान हो रहे हैं।
नया डीएसी नहीं आने से बढ़ी दिक्कत
उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें गैस बुकिंग और डिलीवरी का मैसेज तो मिल रहा है, लेकिन नया डीएसी नहीं पहुंच रहा है। बिना डीएसी के गैस की डिलीवरी संभव नहीं हो पा रही, जिससे लोग एजेंसियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष के अंत में करीब 68 हजार उपभोक्ताओं के पुराने डीएसी को निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद कंपनियों ने आश्वासन दिया था कि बिना दोबारा बुकिंग के नया डीएसी भेज दिया जाएगा, लेकिन जमीनी स्तर पर यह प्रक्रिया धीमी नजर आ रही है।
उपभोक्ताओं के अनुभव
बर्फखाना निवासी राजेश मिश्रा ने बताया कि 25 मार्च को डीएसी का मैसेज मिला था और 30 मार्च को डिलीवरी होनी थी, लेकिन नया डीएसी अब तक नहीं आया।
वहीं बिछिया कॉलोनी के राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि 2 अप्रैल को गैस मिलनी थी, लेकिन एजेंसी ने स्टॉक खत्म होने का हवाला दे दिया।
इस्माइलपुर के गोविंद ने बताया कि उन्हें बिना सिलेंडर मिले ही डिलीवरी का मैसेज आ गया। एजेंसी ने इसे सर्वर की समस्या बताया और बाद में डिलीवरी का आश्वासन दिया।
एजेंसियों का क्या कहना है
गंगा गैस एजेंसी के संचालक गंगा सागर राय के अनुसार, कनेक्शन संख्या और पुराने रिकॉर्ड के आधार पर
नया डीएसी भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में 250 से 300 नए डीएसी जारी हुए हैं।
सूर्यकुंड इंडेन गैस एजेंसी के संचालक राजेंद्र ने भी माना कि नया डीएसी देर से आ रहा है,
जिससे उपभोक्ताओं में चिंता बढ़ रही है।
कॉमर्शियल सिलेंडर की भी समस्या
घरेलू गैस के साथ-साथ कॉमर्शियल सिलेंडर की भी किल्लत देखने को मिल रही है।
छोटे रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि
सिलेंडर आने से पहले ही उसके बाउचर तैयार हो जाते हैं, जिससे उन्हें समय पर गैस नहीं मिल पाती।
प्रशासन का बयान
जिलापूर्ति अधिकारी रामेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि नए डीएसी भेजने की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है।
साथ ही पुराने बैकलॉग और केवाईसी अपडेट का काम भी
तेजी से किया जा रहा है ताकि जल्द ही समस्या का समाधान हो सके।
गोरखपुर में डीएसी से जुड़ी यह समस्या उपभोक्ताओं के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी है। डिजिटल सिस्टम में गड़बड़ी और
धीमी प्रक्रिया के कारण लोगों को बार-बार एजेंसियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि
गैस कंपनियां और प्रशासन मिलकर इस समस्या का जल्द समाधान करें ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।
