सहजनवां में धर्मांतरण की साजिश – मध्य प्रदेश के सरगना के इशारे पर गोरखपुर में फैलाया जा रहा था ।
सहजनवां थाना क्षेत्र में धर्मांतरण कराने की कोशिश के मामले ने एक बार फिर पूरे जिले को हिला दिया है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि इसके पीछे एक बड़े नेटवर्क की सुनियोजित साजिश थी, जो मध्य प्रदेश से संचालित हो रही थी। पुलिस ने जिन दो महिलाओं को गिरफ्तार किया था, उनकी कॉल डिटेल्स से यह खुलासा हुआ है कि वे नियमित रूप से मध्य प्रदेश में बैठे सरगना से संपर्क में थीं और पिछले छह महीनों में उनसे लगभग 60 बार बातचीत कर चुकी थीं।
धर्मांतरण गिरोह का नेटवर्क मध्य प्रदेश से जुड़ा
सहजनवां पुलिस की शुरुआती जांच में ही यह स्पष्ट हो गया कि गिरफ्तार महिलाएं – लक्ष्मी यादव और रोशनी – किसी स्थानीय स्तर की नहीं, बल्कि बड़े नेटवर्क की हिस्सेदार हैं। इन दोनों के मोबाइल में जो वीडियो, संदेश और संपर्क मिले, उनमें मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल से जुड़े कई नंबर शामिल थे।
एसपी नार्थ जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस ने साइबर सेल की मदद से कॉल डिटेल्स निकालीं, जिनसे साबित हुआ कि ये महिलाएं लगातार एक ही व्यक्ति से निर्देश ले रही थीं। वह व्यक्ति खुद को एक सामाजिक कार्यकर्ता बताता था, लेकिन दरअसल वह ईसाई मिशनरी गतिविधियों से जुड़ा हुआ था।
घर में था धर्मांतरण का पूरा इंतजाम
पुलिस के अनुसार, लक्ष्मी यादव ने अपने घर को ही धर्मांतरण केंद्र की तरह तैयार कर रखा था। घर के एक हिस्से को हाल के रूप में तैयार किया गया था, जहां एक डायस (मंच) बनाया गया था, माइक लगाया गया था और कुछ कुर्सियां लगाई गई थीं।
हर रविवार और बुधवार को इस हाल में महिलाओं की बैठकें होती थीं, जिनमें बाइबिल जैसी किताबों का पाठ कराया जाता था और “ईसा में विश्वास करने से जीवन बदलने” की बातें कही जाती थीं।
आरोप है कि इन बैठकों में गरीब, दलित और कमजोर तबके की महिलाओं को बुलाकर यह कहा जाता था कि ईसा मसीह में विश्वास करने से उनके सभी दुख दूर हो जाएंगे।
पुलिस ने मौके से कई धार्मिक पुस्तकें, पोस्टर, एक प्रोजेक्टर और वीडियो क्लिप्स बरामद किए हैं, जिनमें धर्मांतरण से जुड़ी बातें कही जा रही थीं।
संगठित नेटवर्क और मिशनरी कनेक्शन
सहजनवां पुलिस ने बताया कि यह नेटवर्क लंबे समय से गोरखपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में सक्रिय था। जांच में पता चला कि यह गिरोह महिलाओं को ‘प्रार्थना सभा’ के नाम पर जुटाता था, फिर धीरे-धीरे उन्हें प्रभावित कर उनके धर्मांतरण की कोशिश करता था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह नेटवर्क मध्य प्रदेश के सागर और इंदौर जिले से चलाया जा रहा था। वहां से प्रशिक्षण लेकर कई महिलाएं उत्तर प्रदेश में फैल गई थीं। लक्ष्मी और रोशनी उन्हीं में से दो थीं।
यह भी खुलासा हुआ है कि इन महिलाओं को प्रत्येक धर्मांतरण कराने पर कमीशन दिया जाता था, और उनके बैंक खातों में नियमित रूप से पैसा आता था। पुलिस अब उस धन के स्रोत की भी जांच कर रही है।
धर्मांतरण के लिए चुने जा रहे थे गरीब परिवार
गोरखपुर पुलिस ने बताया कि यह गिरोह खास तौर पर गरीब, अनुसूचित जाति, पिछड़े वर्ग और विधवा महिलाओं को निशाना बनाता था।
इन महिलाओं को पहले आर्थिक मदद का लालच दिया जाता था, फिर “प्रार्थना सभा” में बुलाया जाता था। वहां उनसे कहा जाता था कि ईसा में विश्वास करने से उनकी सारी बीमारियाँ और गरीबी दूर हो जाएगी।
सहजनवां के स्थानीय लोगों का कहना है कि लक्ष्मी यादव पिछले कुछ महीनों से मोहल्ले की कई महिलाओं के घर जाती थी और उन्हें “ईश्वर में नई राह” अपनाने की सलाह देती थी।
जब महिलाओं में कुछ ने आपत्ति जताई, तो उसने यह कहकर समझाया कि “यह धर्मांतरण नहीं, बल्कि प्रार्थना का तरीका है।” लेकिन पुलिस जांच में यह साफ हो गया कि इसके पीछे धर्म परिवर्तन का मकसद ही था।
महिलाओं ने कबूला – मध्य प्रदेश से मिलते थे निर्देश
पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान लक्ष्मी और रोशनी ने स्वीकार किया कि वे ‘एमपी मिशनरी नेटवर्क’ से जुड़ी थीं।
उन्होंने बताया कि इंदौर में बैठा उनका संचालक हर सप्ताह उन्हें फोन पर निर्देश देता था कि “कितनी महिलाएं प्रार्थना सभा में आईं” और “किसे बाइबिल दी गई”।
पिछले छह महीनों में उन्होंने कम से कम 60 बार बात की थी।
पुलिस ने उन कॉल रिकॉर्ड्स को जब्त कर लिया है और अब तकनीकी जांच जारी है।
बड़हलगंज तक पहुंची जांच
यह नेटवर्क केवल सहजनवां तक सीमित नहीं है। पुलिस जांच में बड़हलगंज क्षेत्र में भी ऐसे ही संकेत मिले हैं।
28 सितंबर को बड़हलगंज के एक गांव में भी “प्रार्थना सभा” के नाम पर महिलाओं की बैठक चल रही थी।
सूचना मिलने पर हिंदू संगठन के कार्यकर्ता पहुंचे और सभा को रोक दिया। वहां से भी कुछ धार्मिक सामग्री बरामद की गई थी।
अब सहजनवां की घटना के बाद बड़हलगंज के इस मामले को भी एक ही नेटवर्क से जोड़कर देखा जा रहा है।
सुरागों की कड़ी जुड़ रही है
पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क केवल दो या तीन महिलाओं तक सीमित नहीं, बल्कि इसके पीछे दर्जनों लोग शामिल हैं।
पुलिस विभाग ने साइबर सेल, एसटीएफ और खुफिया एजेंसियों को मिलाकर एक संयुक्त जांच टीम बनाई है।
अब मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल, सागर, और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, बस्ती, देवरिया और संतकबीरनगर जिलों में एक साथ छापेमारी की तैयारी है।
एसपी नार्थ ने कहा कि “मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। किसी भी आरोपी को छोड़ा नहीं जाएगा।”
संगठनों की प्रतिक्रिया
हिंदू परिषद और स्थानीय संगठनों ने इस घटना की निंदा करते हुए प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
संगठन के प्रवक्ता ने कहा कि “धर्मांतरण के नाम पर समाज में विष फैलाया जा रहा है। यह केवल कानून का नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव का भी उल्लंघन है।”
उन्होंने कहा कि जब महिलाएं प्रार्थना सभा स्थल पर पहुंचीं, तब वहां लक्ष्मी और रोशनी सहित कई अन्य महिलाएं धर्म बदलने की प्रक्रिया में शामिल थीं।
पुलिस का कहना – जल्द खुलेंगे और राज
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि लक्ष्मी के घर से बरामद मोबाइल, डायरी, वीडियो क्लिप्स और बैंक पासबुक्स की जांच जारी है।
मोबाइल में कई ऐसे वीडियो हैं जिनमें महिलाओं को धर्म परिवर्तन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
एसपी ने बताया कि रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजी जाएगी, और जल्द ही इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी भी होगी।
घर में छिपा था ‘धर्मांतरण केंद्र’
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, लक्ष्मी के घर के अंदर का नजारा किसी धार्मिक सभा स्थल जैसा था।
दीवारों पर “ईसा में विश्वास करो, जीवन बदलेगा” जैसे नारे लिखे थे।
कमरे के एक कोने में बाइबिल और मोमबत्तियाँ रखी थीं, और एक दीवार पर लकड़ी का क्रॉस लटकाया गया था।
पुलिस ने इसे सबूत के तौर पर जब्त कर लिया है।
महिलाओं का कहना था कि उन्हें “शांति प्रार्थना” के लिए बुलाया गया था, लेकिन पुलिस के अनुसार यह पूरी तरह धर्मांतरण की साजिश थी।
अंतिम निष्कर्ष
सहजनवां में पकड़ा गया यह गिरोह, मध्य प्रदेश से चल रहे एक बड़े धर्मांतरण नेटवर्क का हिस्सा है।
यह नेटवर्क लंबे समय से उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में सक्रिय था और खास तौर पर महिलाओं को निशाना बना रहा था।
पुलिस ने अब इस पूरे मामले की गहनता से जांच शुरू कर दी है।
एसपी नार्थ जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक, “धर्मांतरण के प्रयासों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर कोई व्यक्ति या संगठन इसमें लिप्त पाया गया, तो उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।”
इस तरह यह पूरा प्रकरण केवल दो महिलाओं की गिरफ्तारी भर नहीं, बल्कि एक अंतरराज्यीय धर्मांतरण नेटवर्क का पर्दाफाश है, जो समाज के कमजोर वर्गों को टारगेट कर रहा था।
मामले ने पुलिस और प्रशासन दोनों को सतर्क कर दिया है। आगे की जांच में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।