अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर FIR
शंकराचार्य पर FIR को लेकर कांग्रेस का बड़ा वार! निष्पक्ष जांच नहीं तो सड़कों पर उतरेगी कांग्रेस
उत्तर प्रदेश में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एवं उनके शिष्यों पर दर्ज FIR को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के स्पष्ट निर्देश पर आज जिला कांग्रेस कमेटी और महानगर कांग्रेस कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में जोरदार प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपा गया। जिलाध्यक्ष राजेश कुमार तिवारी और महानगर अध्यक्ष रवि प्रताप निषाद के नेतृत्व में जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में मुख्य मांग है कि शंकराचार्य पर FIR कराने वाले व्यक्ति की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच हो। कांग्रेस का आरोप है कि यह FIR राजनीतिक या वैचारिक द्वेष से प्रेरित हो सकती है और धार्मिक गुरुओं को अनावश्यक विवादों में घसीटने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस का स्पष्ट संदेश और चेतावनी
जिलाध्यक्ष राजेश कुमार तिवारी ने ज्ञापन सौंपने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा: “देश के प्रतिष्ठित धार्मिक पीठों और संतों को अनावश्यक विवादों में घसीटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि एफआईआर दर्ज कराने वाले व्यक्ति की मंशा संदिग्ध है तो उसकी भूमिका की गहन जांच होनी चाहिए। कांग्रेस किसी भी प्रकार के राजनीतिक या वैचारिक द्वेष से प्रेरित षड्यंत्र को बर्दाश्त नहीं करेगी।”
उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से सड़कों पर उतरकर संघर्ष करेगी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा कि पार्टी संविधान, धार्मिक स्वतंत्रता और न्याय की मर्यादा की रक्षा के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ने को तैयार है।
ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम और मौजूद नेता
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रमुख रूप से शामिल रहे:
- विनोद पाण्डेय
- हफीजुर रहमान
- संतोष शुक्ला
- मनोज यादव
- उत्कर्ष पाण्डेय
- हरिसेवक तिवारी
- जयनरायण यादव
- चिन्मय पाण्डेय
- राजेश निषाद
- अविनाश पति त्रिपाठी
- सुहेल अंसारी
- उमाशंकर मौर्या
- ज्ञानेंद्र शाही
सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि शंकराचार्य जैसी गरिमामयी संस्था पर लगाए गए आरोपों की जांच स्वतंत्र और निष्पक्ष होनी चाहिए। अगर जांच में FIR कराने वाले व्यक्ति की मंशा गलत पाई गई तो उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान की रक्षा का संकल्प
कांग्रेस कमेटी ने स्पष्ट किया कि पार्टी संविधान के अनुच्छेद 25-28 (धार्मिक स्वतंत्रता) की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। धार्मिक गुरुओं को राजनीतिक षड्यंत्र में फंसाने की कोशिश अस्वीकार्य है। ज्ञापन में मांग की गई है कि प्रधानमंत्री कार्यालय इस मामले को गंभीरता से ले और उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित करे।
यह घटना उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर रही है। कांग्रेस इसे धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश बता रही है। वहीं सत्ताधारी दल की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा कि अगर न्याय नहीं मिला तो आंदोलन तेज होगा।
सड़कों पर उतरने की चेतावनी से साफ है कि यह मुद्दा अब केवल ज्योतिर्मठ तक सीमित नहीं रहेगा,
बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और राजनीतिक दुरुपयोग का बड़ा प्रतीक बन सकता है।
हम लगातार इस मामले पर अपडेट्स लाते रहेंगे। धार्मिक गुरुओं की गरिमा और
निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर कांग्रेस का यह कदम काफी चर्चा में है।