नई दिल्ली, 30 जनवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए इक्विटी रेगुलेशंस 2026 पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि ये नियम प्रथम दृष्टया अस्पष्ट और दुरुपयोग के योग्य हैं, जो समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं। कोर्ट ने केंद्र और UGC को नोटिस जारी किया तथा पुराने 2012 रेगुलेशंस को फिलहाल लागू रखने का आदेश दिया। अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को होगी।
यह फैसला सामान्य वर्ग के छात्रों द्वारा दाखिल याचिकाओं पर आया, जिनमें नए नियमों को भेदभावपूर्ण बताया गया था। बेंच ने नियमों में जातिगत भेदभाव की अलग परिभाषा और रैगिंग को बाहर रखने पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को अन्य भेदभाव (जैसे लिंग, जन्मस्थान आदि) की शिकायत करने से रोक सकते हैं।
CJI जस्टिस सूर्यकांत का प्रोफाइल: गांव से CJI तक का शानदार सफर
भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले के पेटवार गांव में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। पिता संस्कृत शिक्षक थे और परिवार में कई सदस्य शिक्षक रहे। गांव के स्कूल में फर्श पर बैठकर पढ़ाई की। उन्होंने 1981 में हिसार के गवर्नमेंट पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज से ग्रेजुएशन किया, 1984 में महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, रोहतक से LLB और बाद में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से LLM पूरा किया।
1984 में हिसार जिला कोर्ट से वकालत शुरू की, 1985 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट शिफ्ट हुए। संवैधानिक, सर्विस और सिविल मामलों में विशेषज्ञता हासिल की। 2000 में मात्र 38 वर्ष की आयु में हरियाणा के सबसे युवा एडवोकेट जनरल बने। 2004 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट जज, 2018 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट जज बने। 24 नवंबर 2025 को CJI बने और 9 फरवरी 2027 तक पद पर रहेंगे।
*जस्टिस सूर्यकांत अनुच्छेद 370 निरस्तीकरण, पेगासस स्पाइवेयर जांच, बिहार मतदाता सूची संशोधन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा रहे।
CJI बनने पर 5 करोड़ लंबित मामलों को निपटाने और मध्यस्थता को बढ़ावा देने को प्राथमिकता बताया।
UGC मामले में उन्होंने नियमों को “खतरनाक परिणामों वाला” बताकर हस्तक्षेप किया।
जस्टिस जॉयमाल्या बागची का प्रोफाइल: क्रिमिनल और संवैधानिक लॉ के विशेषज्ञ
जस्टिस जॉयमाल्या बागची का जन्म 3 अक्टूबर 1966 को कोलकाता में हुआ।
कलकत्ता बॉयज स्कूल से स्कूलिंग और कलकत्ता यूनिवर्सिटी से LLB किया।
1991 में वकील बने और कलकत्ता हाईकोर्ट में क्रिमिनल व संवैधानिक मामलों में प्रैक्टिस की।
कई हाईकोर्ट्स और सुप्रीम कोर्ट में केस लड़े।
2011 में कलकत्ता हाईकोर्ट के परमानेंट जज बने। जनवरी 2021 में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ट्रांसफर हुए,
नवंबर 2021 में वापस कलकत्ता हाईकोर्ट लौटे।
मार्च 2025 में सुप्रीम कोर्ट जज बने (शपथ 17 मार्च 2025) और 2 अक्टूबर 2031 तक पद पर रहेंगे।
उनका कार्यकाल 6 वर्ष से अधिक है, जिसमें वे 2031 में CJI बन सकते हैं।
UGC बेंच में जस्टिस बागची ने नियमों की अस्पष्ट भाषा और दुरुपयोग की संभावना पर कड़े सवाल उठाए।
वे न्यायिक स्वतंत्रता और कानून के शासन के मजबूत समर्थक हैं।
यह बेंच अनुच्छेद 142 के तहत फैसला देकर सामाजिक न्याय और संवैधानिक समानता की रक्षा कर रही है।