उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में एक ‘गोपनीय’ मुलाकात की। इस बैठक में जेवर एयरपोर्ट (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) और बंगाल एक्सप्रेसवे (पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का विस्तार) जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर बड़ी रणनीति बनाई गई। सूत्रों के अनुसार, यह मुलाकात 2027 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए विकास और राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करने पर केंद्रित थी। योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में यह विस्तार बीजेपी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
गोपनीय मुलाकात का पृष्ठभूमि: मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी
मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं पिछले कुछ महीनों से चल रही हैं। योगी कैबिनेट में नए चेहरों को शामिल करने की योजना है, जिसमें सहयोगी दलों जैसे अपना दल और निषाद पार्टी के सदस्यों को जगह मिल सकती है। पीएम मोदी से मुलाकात से पहले योगी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी चर्चा की थी। दिल्ली में हुई यह बैठक करीब एक घंटे चली, जिसमें यूपी की राजनीतिक स्थिति, विकास परियोजनाओं की प्रगति और चुनावी रणनीति पर बात हुई।
सूत्र बताते हैं कि मुलाकात ‘गोपनीय’ इसलिए रखी गई क्योंकि इसमें संवेदनशील मुद्दों जैसे जातीय समीकरण और विपक्षी दलों की रणनीति पर चर्चा हुई। बीजेपी हाईकमान योगी सरकार को और मजबूत बनाना चाहता है, ताकि 2027 में मजबूत बहुमत मिले। मंत्रिमंडल विस्तार में महिलाओं, युवाओं और पिछड़े वर्गों को प्रतिनिधित्व देकर सोशल इंजीनियरिंग की जाएगी।
जेवर एयरपोर्ट: विकास की नई उड़ान
मुलाकात का मुख्य फोकस जेवर एयरपोर्ट पर था। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जो एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने जा रहा है, 2026 के अंत तक चालू होने की उम्मीद है। पीएम मोदी और सीएम योगी ने परियोजना की प्रगति की समीक्षा की और चुनौतियों पर रणनीति बनाई। जेवर एयरपोर्ट से यूपी में रोजगार के लाखों अवसर पैदा होंगे, साथ ही दिल्ली-एनसीआर की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
सरकार ने एयरपोर्ट के आसपास इंडस्ट्रियल हब विकसित करने की योजना बनाई है।
मुलाकात में विदेशी निवेश आकर्षित करने और निर्माण कार्य तेज करने पर जोर दिया गया।
योगी सरकार ने पहले ही जमीन अधिग्रहण और पर्यावरण मंजूरी के मुद्दों को सुलझाया है।
यह परियोजना पीएम गति शक्ति योजना का हिस्सा है,
जो लॉजिस्टिक्स को सुधारने का लक्ष्य रखती है।
बंगाल एक्सप्रेसवे: पूर्वांचल को गति
दूसरा बड़ा मुद्दा बंगाल एक्सप्रेसवे था, जो पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का विस्तार है।
यह एक्सप्रेसवे यूपी को पश्चिम बंगाल से जोड़ेगा, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देगा। मुलाकात में परियोजना की समयसीमा,
फंडिंग और इंटर-स्टेट कोऑर्डिनेशन पर रणनीति बनी। योगी ने पीएम को बताया कि
एक्सप्रेसवे से पूर्वांचल के जिलों में औद्योगिक विकास होगा, जो बेरोजगारी कम करेगा।
बंगाल एक्सप्रेसवे 2027 तक पूरा होने का लक्ष्य है। यह राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का हिस्सा बनेगा,
जिसमें स्मार्ट टेक्नोलॉजी जैसे सीसीटीवी और टोल सिस्टम शामिल होंगे
मुलाकात में केंद्र से अतिरिक्त फंडिंग और बंगाल सरकार से समन्वय पर चर्चा हुई।
यह परियोजना बीजेपी की ‘विकास यात्रा’ का प्रतीक है, जो विपक्ष के आरोपों का जवाब देगी।
राजनीतिक प्रभाव और भविष्य की दिशा
यह मुलाकात यूपी की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकती है।
मंत्रिमंडल विस्तार से बीजेपी सहयोगियों को खुश रखेगी और विपक्ष को कमजोर करेगी।
जेवर और बंगाल परियोजनाएं विकास मॉडल को मजबूत करेंगी, जो चुनावी मुद्दा बनेगा। \
विशेषज्ञों का मानना है कि योगी-मोदी की जोड़ी यूपी को ‘विकसित राज्य’ बनाने की दिशा में काम कर रही है।
