परशुराम यादव, गोरखपुर।
गोरखपुर के एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा का स्तर गिरने की शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। 11 दिसंबर 2025 को सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में सहायक अध्यापिका बच्चों को पढ़ाने की बजाय मोबाइल फोन में व्यस्त दिखी। अमर उजाला और लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट्स के अनुसार, वीडियो में बच्चे क्लास में इधर-उधर भटकते और बोर होते नजर आ रहे हैं, जबकि शिक्षिका रील्स देख रही है। यह घटना गोरखपुर के खजनी थाना क्षेत्र के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की है। शिक्षा विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन स्थानीय लोगों में गुस्सा भड़क गया है। यह ब्लॉग इस शर्मनाक घटना की पूरी डिटेल्स, कारण, प्रभाव, शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया और सुधार के सुझाव बताता है। यदि आप गोरखपुर या यूपी के शिक्षा से जुड़े हैं, तो ये अपडेट्स आपके लिए जरूरी हैं।
घटना का पूरा विवरण: वायरल वीडियो में शिक्षिका मोबाइल पर व्यस्त
वीडियो गोरखपुर के खजनी थाना क्षेत्र के एक प्राथमिक विद्यालय का है। क्लास में 20-25 बच्चे थे, लेकिन सहायक अध्यापिका मोबाइल पर रील्स देखने में व्यस्त थी। बच्चे क्लास में इधर-उधर घूम रहे थे, कुछ सो रहे थे और कुछ बाहर चले गए थे। वीडियो में एक बच्चा शिक्षिका से बात करने की कोशिश करता दिखा, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर गुस्सा भड़क गया। लोगों ने कहा, “शिक्षिका का कर्तव्य बच्चों को पढ़ाना है, फोन नहीं चलाना।”
शिक्षा विभाग ने वीडियो की पुष्टि की है और जांच शुरू कर दी है।
कारण: शिक्षकों की लापरवाही और संसाधनों की कमी
इस घटना के पीछे कई कारण हैं:
- शिक्षकों की लापरवाही – मोबाइल का लत।
- प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी – एक शिक्षिका पर 30-40 बच्चे।
- संसाधनों की कमी – किताबें, ब्लैकबोर्ड और उपकरण नहीं।
- ग्रामीण इलाकों में जागरूकता का अभाव।
स्थानीय लोगों ने कहा, “सरकारी स्कूलों में शिक्षक आते हैं लेकिन पढ़ाते नहीं।”
प्रभाव: बच्चों का भविष्य खतरे में
यह घटना ग्रामीण शिक्षा पर सवाल खड़ी करती है। गोरखपुर में 1000+ प्राथमिक विद्यालय हैं, जहां 50% से ज्यादा बच्चे प्रभावित हैं। बच्चों का भविष्य खतरे में है।