गुजरात, पंजाब, बिहार टॉप पर – 18 राज्यों ने अपनाए नए लेबर कोड, निवेश-रोजगार में बंपर बढ़ोतरी!
नई दिल्ली: केंद्र सरकार के चार नए श्रम संहिताओं (Labour Codes) को अपनाने वाले राज्यों में निवेश और रोजगार की बाढ़ आ गई है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने नवंबर 2025 में जारी अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि जिन 18 राज्यों ने अपने कानूनों में केंद्र के अनुरूप बदलाव किए, वहां जीएसडीपी, विनिर्माण और रोजगार में दोहरे अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
टॉप-5 राज्य जिन्हें सबसे ज्यादा फायदा हुआ
- गुजरात – जीएसडीपी ग्रोथ 13.36%, मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा 28-30%
- बिहार – 13.5% जीएसडीपी बढ़ोतरी, नए कारखाने खुलने की बाढ़
- पंजाब – ₹1.25 लाख करोड़ निवेश, 4.5 लाख नए जॉब्स
- महाराष्ट्र – ₹1.40 लाख करोड़ निवेश, पुणे-मुंबई हब और तेज़
- उत्तर प्रदेश – संगठित क्षेत्र में रोजगार में रिकॉर्ड उछाल
ये 18 राज्य कर चुके हैं सुधार
गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, हरियाणा, असम, उत्तराखंड, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, गोवा, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और ओडिशा। (नोट: पश्चिम बंगाल अभी भी सुधारों से बाहर है)
आंकड़े जो हैरान कर देंगे
- राष्ट्रीय औसत मैन्युफैक्चरिंग जीडीपी में हिस्सा: केवल 17%
- सुधार अपनाने वाले राज्यों में औसत: 25-30%
- राजस्थान में बड़े कारखानों में रोजगार: 40.9% से बढ़कर 51.2%
- पंजाब ने कृषि से हटकर इंडस्ट्री में छलांग लगाई
नए श्रम कोड से क्या बदला?
- 300 से कम कर्मचारियों वाली कंपनियों को बिना सरकारी इजाजत कर्मचारी हटाने की छूट
- एक रजिस्ट्रेशन, एक लाइसेंस, एक रिटर्न
- श्रम विवाद निपटारे की समय सीमा 1 साल
- महिलाओं को सभी शिफ्टों में काम की अनुमति (पूर्ण सुरक्षा के साथ)
- ठेका मजदूरों को भी पक्की सैलरी + पीएफ + ग्रेच्युटी
विपक्षी राज्य भी ले रहे फायदा
कांग्रेस शासित राजस्थान (अशोक गहलोत सरकार ने लागू किया), कर्नाटक और केरल भी सुधारों का फायदा उठा रहे हैं। बेंगलुरु में आईटी कंपनियों को हायरिंग आसान हुई, केरल में टूरिज्म सेक्टर को नई ऊर्जा मिली।
2030 तक 4-5 करोड़ नए रोजगार!
श्रम मंत्रालय का दावा है कि अगर सभी राज्य चारों कोड लागू कर दें तो साल 2030 तक 4 से 5 करोड़ अतिरिक्त नौकरियां पैदा हो सकती हैं। यह भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को और मजबूत करेगा।
