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नई दिल्ली, 2 नवंबर 2025 – केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक अहम मामले की सुनवाई के दौरान साफ किया कि अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच शुरू नहीं की जा सकती। केंद्र ने तर्क दिया कि संविधान के तहत राज्य सरकार के प्रमुख के खिलाफ ऐसी जांच केवल विशेष कानूनी प्रक्रिया के तहत ही संभव है,
और केंद्र या किसी अन्य एजेंसी को अपने स्तर पर इस तरह की कार्रवाई का अधिकार नहीं है।सुप्रीम कोर्ट में यह मामला तब पहुंचा जब कुछ याचिकाकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के मामलों की सीबीआई जांच की मांग की। इन याचिकाओं में यह आरोप लगाया गया था कि मुख्यमंत्री और उनके करीबी सहयोगियों ने सरकारी फंडों के दुरुपयोग और अवैध आर्थिक लाभ के मामले में गंभीर अनियमितताएं की हैं।
केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल ने अदालत में कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 163 और 164 के तहत मुख्यमंत्री राज्य मंत्रिपरिषद का प्रमुख होता है और उसकी जवाबदेही राज्य विधानसभा के प्रति होती है। इसलिए किसी भी भ्रष्टाचार या कदाचार के आरोप पर जांच केवल राज्य की सहमति से ही हो सकती है।
केंद्र सरकार ने यह भी जोड़ा कि यदि इस तरह की जांच बिना संवैधानिक अनुमति के शुरू की जाती है, तो यह संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ होगी।केंद्र सरकार ने दलील दी कि मुख्यमंत्री पर जांच शुरू करने से पहले राष्ट्रपति या राज्यपाल की मंजूरी आवश्यक होती है। बिना इस औपचारिक प्रक्रिया के सीबीआई या किसी अन्य केंद्रीय एजेंसी को कार्रवाई की स्वतंत्र अनुमति नहीं दी जा सकती।