उत्तर प्रदेश के एक मेडिकल कॉलेज में MBBS
उत्तर प्रदेश के एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा जगत और समाज में हड़कंप मचा दिया है। MBBS प्रथम वर्ष के दो छात्रों ने शिकायत की है कि सेकंड ईयर के सात सीनियर छात्रों ने उनसे क्रूर और अपमानजनक रैगिंग की। आरोप है कि सीनियरों ने पीड़ित छात्रों से जूते चटवाए, थप्पड़ मारे और अन्य तरीकों से मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न किया। यह घटना सदर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मेडिकल कॉलेज में हुई, जहां पुलिस ने तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। सदर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक निर्भय सिंह ने पुष्टि की है कि आरोपी छात्रों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और जांच चल रही है।
घटना की पूरी जानकारी
पीड़ित छात्रों ने बताया कि यह घटना पिछले कुछ दिनों में कई बार हुई। सेकंड ईयर के सात छात्रों ने प्रथम वर्ष के दो नए छात्रों को अलग-थलग कर उन्हें कमरे में ले गए। वहां उनसे जबरन जूते चटवाए गए, साथ ही अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। छात्रों ने कहा कि सीनियरों ने उन्हें धमकी दी कि अगर उन्होंने किसी को बताया तो कॉलेज में उनका भविष्य खराब कर देंगे। डर के मारे दोनों छात्र कुछ दिनों तक चुप रहे, लेकिन जब उत्पीड़न बढ़ता गया तो उन्होंने परिवार को बताया और फिर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत में नामजद सात आरोपी छात्रों के खिलाफ IPC की धारा 323 (मारपीट), 504 (अपमान), 506 (धमकी) और रैगिंग रोकथाम अधिनियम 2009 की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने कहा कि जांच में सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और मेडिकल जांच रिपोर्ट शामिल की जाएगी।
कॉलेज प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मामले की जानकारी मिलते ही आंतरिक जांच शुरू कर दी है। कॉलेज प्राचार्य ने कहा कि रैगिंग के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति है और दोषी पाए जाने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी, जिसमें निलंबन या बर्खास्तगी भी शामिल हो सकती है। वहीं, पुलिस ने आरोपी छात्रों को तलब किया है और उनके बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रभारी निरीक्षक निर्भय सिंह ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
रैगिंग का बढ़ता खतरा और समाज की प्रतिक्रिया
यह मामला एक बार फिर मेडिकल शिक्षा में रैगिंग की समस्या को उजागर करता है।
पिछले कुछ वर्षों में यूपी के कई मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग की घटनाएं सामने आई हैं,
लेकिन ज्यादातर मामलों में छात्र डर के मारे चुप रह जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सीनियर
छात्रों में पावर का नशा और नए छात्रों में डर का माहौल रैगिंग को बढ़ावा देता है।
सोशल मीडिया पर #StopRagging और #JusticeForVictims जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
अभिभावक संगठन और छात्र यूनियन ने सख्त कार्रवाई की मांग की है।
रैगिंग रोकथाम के लिए जरूरी कदम
राष्ट्रीय रैगिंग रोकथाम समिति (UGC) और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार हर कॉलेज में एंटी-रैगिंग
कमिटी और हेल्पलाइन होनी चाहिए। नए छात्रों को रैगिंग के खिलाफ जागरूक किया जाना चाहिए।
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (NMC) ने भी रैगिंग पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं।
इस मामले में उम्मीद है कि पुलिस और कॉलेज प्रशासन मिलकर दोषियों को
सजा दिलवाएंगे और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगेगी।