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संदिग्ध युवक मुकुंद माधव मोकामा का रहने वाला है और वह वैशाली एक्सप्रेस से बिहार के मोकामा जाने के लिए निकला था। उसके पास करीब 99 लाख 9 हजार रुपये थे, जो उसने सूटकेस में छुपा रखे थे।
युवक अपने नकदी के स्रोत, उद्देश्य और पैसे को किसे देना था, इसका स्पष्ट जवाब नहीं दे पाया। उसकी गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं और पूछताछ में विरोधाभास सामने आए।इस मामले की बड़ी खासियत यह है कि यह नकदी फर्जी IAS अधिकारी गौरव कुमार से जुड़ी है, जो खुद को IAS अधिकारी बताकर लोगों से ठगी करता था।
गौरव कुमार पर पहले से ही शादी, नौकरी, ठेके दिलाने के नाम पर ठगी के कई केस दर्ज हैं। इस बार वह बिहार में चुनावी प्रचार-प्रसार या ठेके के लिए पैसा लेकर गया था।जांच में यह पता चला कि मुकुंद माधव ने गौरव कुमार को पहले दो करोड़ रुपये रिश्वत के तौर पर दिए थे, जिसमें से एक करोड़ वापस पाना चाहता था।
नकदी बिहार विधानसभा चुनाव के संदर्भ में ले जाई जा रही थी।मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे पुलिस (RPF और GRP) ने इस राशि को जब्त कर आयकर विभाग को सूचित किया है।
आयकर विभाग की टीम मौके पर आई और नकदी की गिनती, नोटों की जांच और युवक के मोबाइल व संपर्कों की छानबीन कर रही है।यह घटना बिहार विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में आई है, जहां सुरक्षा एजेंसियां संवेदनशील इलाकों सहित रेलवे स्टेशन पर कड़ी निगरानी रख रही हैं।
इस नकदी पकड़ से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और ऐसे कई और प्रयास हो सकते हैं इसलिए निगरानी बढ़ा दी गई है।
पुलिस इस फर्जी IAS अधिकारी गौरव कुमार की तलाश कर रही है, जो अभी फरार है।इस पूरे मामले से यह संकेत मिलता है कि चुनावी पैसे की ठगी, फर्जी आईएएस अफसरों का खेल और भ्रष्टाचार बिहार चुनाव में कितना व्यापक है।
गोरखपुर रेलवे स्टेशन पुलिस ने इस मामले में बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन जांच अभी चल रही है और आगे की कार्रवाई की तैयारी है। इस घटना ने क्षेत्र में कानून व्यवस्था और चुनावी शुचिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरक्षा एजेंसियां पूरे इलाके की सतर्कता बढ़ा चुकी हैं