बुलडोजर का शिकंजा
बरेली में बुलडोजर की तलवार, तौकीर के करीबियों की संपत्तियां खतरे में
उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में योगी सरकार की “अवैध निर्माण पर जीरो टॉलरेंस” नीति ने एक बार फिर जोर पकड़ा है। 1 दिसंबर 2025 को बरेली डेवलपमेंट अथॉरिटी (बीडीए) ने मौलाना तौकीर रजा के दो करीबी सहयोगियों के स्वामित्व वाले दो प्रमुख बरातघरों – गुड मैरेज हॉल और ऐवान-ए-फरहत बरातघर – पर बुलडोजर चलाने के नोटिस जारी कर दिए। ये दोनों हॉल सुफी टोला के पुराने शहर क्षेत्र में स्थित हैं। यह कार्रवाई 26 सितंबर 2025 को हुए बरेली दंगों से जुड़ी जांच का हिस्सा है, जहां मौलाना तौकीर के आह्वान पर भीड़ इकट्ठा हुई थी। अवैध निर्माण के पुराने आदेश (2011 से) को आधार बनाकर बीडीए ने पुलिस से सुरक्षा की मांग की है। सोमवार को कार्रवाई टल गई, लेकिन मंगलवार को फिर शुरू हो सकती है। यह घटना UP में दंगा आरोपियों पर सख्ती की नई मिसाल है।
घटना का पूरा विवरण: कैसे पहुंचे बुलडोजर नोटिस तक?
बीडीए ने रविवार (30 नवंबर 2025) को नोटिस जारी किए, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। गुड मैरेज हॉल के मालिक राशिद खान और ऐवान-ए-फरहत के मालिक सरफराज वाली खान दोनों मौलाना तौकीर के करीबी माने जाते हैं। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने खुलासा किया कि इन्हीं हॉल्स में दंगे के लिए भीड़ को वाहन, भोजन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। ये हॉल मौलाना के धरनों, दस्तारबंदी समारोहों के लिए मंच, चटाई और कुर्सियां मुहैया कराते रहे हैं।
बीडीए सचिव ने एसएसपी को पत्र लिखकर बुलडोजर कार्रवाई के लिए फोर्स की मांग की। सोमवार सुबह बारादरी थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। गुड मैरेज हॉल के मालिक ने सामान हटाना शुरू कर दिया, लेकिन बीडीए अधिकारी दोपहर तक नहीं पहुंचे। फोर्स की कमी के कारण कार्रवाई स्थगित कर दी गई। थाना प्रभारी धनंजय पांडे ने पुष्टि की, “बीडीए के पत्र पर पुलिस तैनात है। मंगलवार को कार्रवाई संभव।” ये हॉल बिना मानचित्र स्वीकृति (बिना मैप सैंक्शन) बनाए गए थे, जिसका आदेश 2011 से लंबित था। दंगों के बाद सरकारी निर्देश पर यह एक्शन तेज हुआ।
दंगों का कनेक्शन: तौकीर के सहयोगियों पर शिकंजा
26 सितंबर 2025 को बरेली में मौलाना तौकीर के आह्वान पर सुफी टोला और राजा चौक से भीड़ इस्लामिया कॉलेज की ओर बढ़ी, जिससे दंगे भड़क उठे। गिरफ्तार आरोपियों की पूछताछ में इन बरातघर मालिकों की भूमिका सामने आई। पुराने शहर के कई प्रमुख व्यापारी और बरातघर संचालक मौलाना के करीबी हैं। यह कार्रवाई दंगों के बाद की जांच का हिस्सा है, जहां योगी सरकार ने आरोपियों और उनके समर्थकों की संपत्तियों पर नकेल कसने के आदेश दिए। बीडीए और नगर निगम ने अब तक कई ऐक्शन लिए हैं, जो इस घटना को जोड़ते हैं।
अन्य संबंधित कार्रवाइयां: बरेली में सिलसिला जारी
दंगों के बाद बरेली में बुलडोजर एक्शन का सिलसिला जोर पकड़ चुका है:
- नवाल्टी में नाफिस का बाजार (74 दुकानें और IMC कार्यालय) सील।
- बनखाना में SP पार्षद उमैन रजा का चार्जिंग स्टेशन ध्वस्त।
- शराफत की संपत्तियां (बरातघर, जिम, कोल्ड स्टोरेज) सील।
- SP पार्षद अब्दुल कय्यूम मुनना का ई-बाइक शोरूम सील।
- जखीरा में नाफिस का बरातघर ध्वस्त।
- पीलीभीत बाइपास पर अरिफ का बाजार (16 दुकानें) और शोरूम तोड़ा।
ये कार्रवाइयां दंगा आरोपियों की संपत्तियों को निशाना बना रही हैं, जो योगी सरकार की “अपराध मुक्त UP” नीति का हिस्सा हैं।
योगी सरकार की नीति: अवैध पर जीरो टॉलरेंस
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई बार कहा है कि अवैध निर्माण और दंगा फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
बरेली जैसे संवेदनशील शहरों में यह नीति सख्ती से लागू हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है,
लेकिन मानवाधिकार संगठन इसे “बुलडोजर जस्टिस” कहकर आलोचना करते हैं