देवरिया में वक्फ मजार पर बुलडोजर कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में गोरखपुर रोड पर स्थित वक्फ मजार के एक हिस्से को ढहाए जाने का मामला अब राष्ट्रपति कार्यालय तक पहुंच गया है। राष्ट्रपति सचिवालय ने इस प्रकरण का संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। यह शिकायत पूर्व राज्यसभा सदस्य आस मोहम्मद द्वारा राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र के आधार पर की गई थी। राष्ट्रपति सचिवालय के निदेशक शिवेंद्र चतुर्वेदी ने पत्र को मुख्य सचिव को अग्रेषित किया है।
बुलडोजर कार्रवाई का विवरण
देवरिया में हजरत सैयद शहीद अब्दुल गनी शाह बाबा की मजार (लगभग 50 वर्ष पुरानी) पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर आंशिक ध्वस्तीकरण किया। प्रशासन का दावा है कि यह संरचना सरकारी बंजर भूमि पर अवैध रूप से बनी थी, जिसे नगर पालिका ने सार्वजनिक, कृषि योग्य भूमि घोषित किया था। सदर एसडीएम कोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई की गई। अभियान में भारी पुलिस बल तैनात रहा, जिसमें 250-300 जवान शामिल थे ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। मजार कमिटी ने भी सहयोग किया और प्रशासन ने बुलडोजर उपलब्ध कराया।
कार्रवाई से पहले छह वर्षों से कानूनी विवाद चल रहा था। 2019 में शिकायत मिलने के बाद मामला कोर्ट पहुंचा। प्रशासन ने आरोप लगाया कि मजार पर कोई वैध दस्तावेज नहीं थे और यह अतिक्रमण था। हालांकि, शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कुछ बाहरी दबाव में यह कार्रवाई की गई और मजार की ऐतिहासिकता व कानूनी स्थिति को नजरअंदाज किया गया।
राष्ट्रपति सचिवालय और अल्पसंख्यक आयोग की भूमिका
पूर्व राज्यसभा सांसद आस मोहम्मद ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। राष्ट्रपति सचिवालय ने इसे गंभीरता से लिया और मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि मामले की जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएं। साथ ही, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने भी जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। यह कदम अल्पसंख्यक समुदाय में चर्चा का विषय बन गया है, जहां कई लोग इसे धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई का हिस्सा बता रहे हैं।
विवाद और प्रतिक्रियाएं
प्रशासन का पक्ष है कि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई और अवैध अतिक्रमण हटाया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी में
सरकारी भूमि पर अतिक्रमण मुक्त अभियान तेज है। वहीं, विरोधियों का आरोप है कि
यह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है।
मजार के ध्वस्त होने से स्थानीय स्तर पर तनाव रहा, लेकिन पुलिस ने स्थिति नियंत्रित रखी।
राष्ट्रीय स्तर पर यह मामला अल्पसंख्यक अधिकारों और भूमि कानूनों पर बहस छेड़ सकता है।
राष्ट्रपति सचिवालय के हस्तक्षेप से जांच की उम्मीद बढ़ गई है, जिससे पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित हो सकता है।
देवरिया मजार विवाद अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह राज्य और केंद्र स्तर पर
चर्चा का विषय बन गया है। मुख्य सचिव के निर्देशों से
उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।
यह घटना सरकारी भूमि संरक्षण और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के बीच संतुलन की जरूरत को उजागर करती है।
