बरेली बवाल पर चला बुलडोज़र : मौलाना तौकीर रज़ा के करीबी के बारातघर पर कार्रवाई, शरण देने वाले का घर सीलबरेली संवाददाता / अमर उजाला ब्यूरोबरेली शहर में 26 सितंबर को हुए बवाल के बाद अब प्रशासन ने सख़्त रुख अख़्तियार कर लिया है। इस पूरे मामले में नामजद आरोपियों के ठिकानों पर लगातार कार्रवाई जारी है। शनिवार को प्रशासन ने मौलाना तौकीर रज़ा खान के करीबी माने जाने वाले रज़ा पैलेस बारातघर को बुलडोज़र चलाकर ध्वस्त कर दिया। इसके साथ ही उस व्यक्ति का मकान भी सील कर दिया गया जिसने दंगे के आरोपी को अपने घर में शरण दी थी।—बवाल के बाद प्रशासन की बड़ी कार्रवाईशहर में 26 सितंबर को जुमे की नमाज़ के बाद नौमहल्ला क्षेत्र में हिंसा भड़क गई थी। पुलिस पर पथराव हुआ, कई गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त हुईं, और हालात काबू से बाहर चले गए थे। इस घटना के बाद पुलिस ने 84 लोगों को नामजद करते हुए बड़ी कार्रवाई शुरू की।वीडियो फुटेज और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने पता लगाया कि बवाल में मौलाना तौकीर रज़ा खान की पार्टी आईएमसी के कई कार्यकर्ता शामिल थे। प्रशासन ने इसके बाद सख़्त कार्रवाई करते हुए शहर में अतिक्रमण के विरुद्ध अभियान चलाया।—रज़ा पैलेस पर बुलडोज़र की गरजशनिवार को नगर निगम और जिला प्रशासन की टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में रज़ा पैलेस बारातघर पर बुलडोज़र चला दिया। बताया गया कि यह बारातघर नियमों के विरुद्ध निर्मित था और इसके पास निर्माण की वैध अनुमति नहीं थी।निगम अधिकारियों ने बताया कि यह निर्माण सरकारी ज़मीन पर किया गया था। इस दौरान भारी सुरक्षा व्यवस्था रखी गई ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो। पुलिस बल और पीएसी के जवान तैनात रहे। मौके पर प्रशासनिक अफसरों ने खुद निगरानी की।—400 दुकानों का अतिक्रमण ध्वस्तबरेली विकास प्राधिकरण और नगर निगम ने शहर के विभिन्न इलाकों में अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाते हुए लगभग 400 दुकानों को हटाया। रेलवे रोड, किला, नौमहल्ला और अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में यह अभियान चला।प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बवाल में शामिल किसी भी व्यक्ति को किसी तरह की राहत नहीं दी जाएगी। गैरकानूनी निर्माणों को हटाने की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।—शरण देने वाले का घर सीलपुलिस जांच में यह बात सामने आई कि कुछ आरोपियों को नौमहल्ला के एक स्थानीय व्यक्ति के घर में छिपाया गया था। प्रशासन ने उस व्यक्ति का मकान चिन्हित कर उसे सील कर दिया।एसडीएम और पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर नोटिस चस्पा किया और बताया कि जांच के अनुसार मकान का प्रयोग दंगाईयों को छिपाने के लिए किया गया था, इसलिए उस पर कार्रवाई आवश्यक थी।—मौलाना तौकीर रज़ा के संगठन पर निगरानीप्रशासन ने मौलाना तौकीर रज़ा की पार्टी आईएमसी और उसके कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, खुफिया एजेंसियाँ लगातार रिपोर्ट तैयार कर रही हैं कि किन-किन इलाकों से लोग हिंसा में शामिल हुए।पुलिस ने मौलाना के करीबी कई लोगों से पूछताछ की है और कुछ को हिरासत में लेकर बयान भी दर्ज किए हैं।—संगेल मस्जिद कमेटी ने वापसी ली याचिकादूसरी ओर, प्रयागराज इलाहाबाद हाईकोर्ट में संगेल मस्जिद कमेटी द्वारा दायर याचिका को वापस ले लिया गया है। यह याचिका उस भूमि को लेकर थी जहाँ अवैध निर्माण होने का आरोप था।कमेटी के सचिव शरीफ गौसुद्दीन ने अदालत से अपील की थी कि शुक्रवार को जारी नोटिस पर सुनवाई की जाए, परंतु बाद में याचिका वापस ले ली गई। प्रशासन ने साफ़ किया कि अब कोई भी निर्माण धार्मिक स्थल के नाम पर गैरकानूनी तरीके से नहीं होने दिया जाएगा।—84 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैंअब तक 84 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज, सीसीटीवी और मोबाइल लोकेशन के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है।एसएसपी प्रशांत वर्मा के अनुसार, “हमारे पास 120 से अधिक संदिग्धों के वीडियो साक्ष्य हैं। 12 लोगों की पहचान नई हुई है, और उनके खिलाफ वारंट की तैयारी की जा रही है।”—एलआईयू और एसटीएफ की निगरानी बढ़ीप्रदेश स्तर पर इस पूरे मामले की रिपोर्ट लखनऊ भेजी गई है। स्थानीय इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने भी रिपोर्ट तैयार की है।राज्य सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी धार्मिक संगठन या व्यक्ति को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बरेली प्रशासन को सख़्त कार्रवाई के निर्देश मिले हैं।—राजनीतिक प्रतिक्रिया : माता प्रसाद चौधरी हाउस अरेस्टबरेली जाने की कोशिश में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद चौधरी को पुलिस ने उनके लखनऊ स्थित आवास पर नजरबंद कर लिया। वे अपने दल के नेताओं के साथ बरेली जाना चाहते थे ताकि घटनास्थल का निरीक्षण कर सकें।पुलिस ने उन्हें रोका और बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है। माता प्रसाद ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि सरकार विपक्षी नेताओं को आवाज़ उठाने से रोक रही है।—लोगों में चर्चा, प्रशासन का संदेशस्थानीय लोगों में इस कार्रवाई को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ हैं। कुछ लोग इसे कानून का राज स्थापित करने की दिशा में कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि प्रशासन को निष्पक्ष होकर कार्रवाई करनी चाहिए।अधिकारियों का कहना है कि किसी निर्दोष को परेशान नहीं किया जाएगा, परंतु जो दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।—जिला प्रशासन का बयानडीएम शिवाकांत द्विवेदी ने कहा, “बरेली में शांति व्यवस्था सर्वोपरि है। किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा कानून तोड़ा गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी तरह वैधानिक है।”एसएसपी ने भी चेतावनी दी कि हिंसा फैलाने वालों की संपत्तियों का आकलन कर उन्हें कुर्क किया जाएगा।—सामाजिक संगठनों की अपीलविभिन्न सामाजिक संगठनों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। धार्मिक नेताओं से कहा गया है कि वे अपने अनुयायियों को कानून का पालन करने की सलाह दें।नौमहल्ला और किला क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है। ड्रोन से निगरानी की जा रही है और रात के समय विशेष चौकसी बरती जा रही है।—निष्कर्षबरेली का यह प्रकरण अब केवल स्थानीय नहीं रहा, बल्कि प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर प्रशासन बुलडोज़र कार्रवाई को कानून का पालन बता रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ समूह इसे राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में देख रहे हैं।फिलहाल, प्रशासन ने साफ संकेत दे दिए हैं कि बरेली में अब कोई अवैध निर्माण या हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कानून का राज स्थापित करने की दिशा में बुलडोज़र एक प्रतीक बन गया है।