राष्ट्रकथा मंच से गूंजा बृजभूषण का संदेश — ‘मैं लौटूंगा’, गोंडा की सियासत में मचा हलचल
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में हाल ही में आयोजित 8 दिवसीय राष्ट्रकथा महोत्सव ने राजनीतिक और भावनात्मक दोनों स्तरों पर सुर्खियां बटोरी हैं। पूर्व बीजेपी सांसद और भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मंच से उनकी भावुकता और मजबूत संदेश ने गोंडा की सियासत में नई हलचल मचा दी है।
राष्ट्रकथा में भावुक पल: दबदबा सुनकर फूट-फूटकर रोए बृजभूषण
नवाबगंज के नंदिनी निकेतन में चल रहे इस भव्य आयोजन के दूसरे दिन कथावाचक सद्गुरु रितेश्वर महाराज ने मंच से अवध क्षेत्र और गोंडा के लोगों के बीच मशहूर जुमले का जिक्र किया – “बृजभूषण का दबदबा था, है और रहेगा”। उन्होंने खुद को बृजभूषण का “बाप” बताते हुए कहा, “अगर आप सोचते हैं कि गोंडा में सिर्फ बृजभूषण का दबदबा है, तो मैं उनका बाप हूं, मेरा भी दबदबा था, है और रहेगा।”
इन शब्दों को सुनते ही बृजभूषण शरण सिंह मंच पर भावुक हो गए। वे अपने पुराने संघर्षों को याद कर करीब एक घंटे तक फूट-फूटकर रोते रहे। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसने उनके समर्थकों में नई ऊर्जा भर दी। महाराज ने आगे कहा कि बृजभूषण ने इस क्षेत्र, राष्ट्र और सनातन संस्कृति के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दिया है।
‘मैं लौटूंगा’ – लोकसभा में वापसी का मजबूत संकेत
नए साल 2026 की शुरुआत में बृजभूषण शरण सिंह ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे लोकसभा में वापस लौटेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 के चुनाव में उन्हें टिकट न मिलना और बाहर होना किसी साजिश का नतीजा था, जनता का फैसला नहीं। उन्होंने कहा, “अगर जिंदा रहा तो लोकसभा में वापस लौटूंगा”, चाहे बीजेपी टिकट दे या न दे – स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में भी।
यह बयान कैसरगंज सीट से उनके बेटे करण भूषण सिंह के सांसद बनने के बाद आया है। बृजभूषण का यह दावा गोंडा और आसपास के इलाकों में उनकी मजबूत पकड़ को दोहराता है। राष्ट्रकथा के दौरान पूर्वांचल के कई बाहुबली नेता जैसे धनंजय सिंह, बृजेश सिंह और सुशील सिंह की मौजूदगी ने भी राजनीतिक समीकरणों को गरमा दिया। बृजभूषण के बेटों ने मंच पर इन नेताओं के पैर छूकर आशीर्वाद लिया, जो 35 साल पुराने रिश्तों को दर्शाता है।
गोंडा की सियासत में नई हलचल
राष्ट्रकथा को अध्यात्म के बहाने राजनीतिक मंच के रूप में देखा जा रहा है।
यहां न केवल सनातन संस्कृति, राम-राष्ट्र और युवाओं को नशामुक्ति का संदेश दिया गया,
बल्कि बृजभूषण की वापसी की चर्चा भी जोरों पर है।
कार्यक्रम में पूर्वांचल की ताकतों को एकजुट करने का प्रयास दिखा,
जो 2027 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बृजभूषण ने यहां तक कहा कि वे कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी अगले कथा कार्यक्रम में आमंत्रित करेंगे,
ताकि वे सनातनी बनकर जाएं। यह सब मिलकर गोंडा की राजनीति में नया दौर शुरू करने का संकेत है।
निष्कर्ष: दबदबा बना रहेगा?
बृजभूषण शरण सिंह की भावुकता, संदेश और राजनीतिक सक्रियता ने साबित कर दिया कि
गोंडा में उनका प्रभाव कम नहीं हुआ है। राष्ट्रकथा मंच से गूंजा उनका
“मैं लौटूंगा” वाला संकल्प अब चर्चा का विषय बन चुका है।
क्या यह वापसी सियासी समीकरण बदल देगी? आने वाले समय में गोंडा की राजनीति पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
