अमिताभ बच्चन का जन्म 11 अक्टूबर 1942 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में हुआ था। उनके पिता प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन और माता तेजी बच्चन थीं, जो सिख परिवार से थीं। बचपन में वे शरारती थे और स्कूल में नाटकों में भाग लेते थे। इलाहाबाद से प्रारंभिक शिक्षा के बाद नैनीताल के शेरवुड कॉलेज गए, फिर दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए किया।
मुंबई संघर्ष के दिन
ग्रेजुएशन के बाद नौकरी की तलाश में 1960 के अंत में मुंबई पहुंचे। लंबे कद-काठी और गहरी आवाज के कारण रेडियो और फिल्मों में रिजेक्ट होते रहे। किराए के कमरे में भाई अजिताभ के साथ रहते, भूखे सोते, छोटे-मोटे विज्ञापन दोवाहन रिकॉर्डिंग से गुजारा चलाया। जलाल आगा जैसे दोस्तों का सहारा मिला।
फिल्म करियर की शुरुआत1969 में ख्वाजा अहमद अब्बास की ‘सात हिंदुस्तानी’ से डेब्यू, लेकिन फिल्म फ्लॉप। 1969-72 तक ‘मजहब’, ‘बॉम्बे टू गोवा’, ‘आनंद’ जैसी 12 फिल्में फ्लॉप रहीं। ‘आनंद’ में राजेश खन्ना के साथ छोटी भूमिका मिली, जहां उनकी एक्टिंग की तारीफ हुई। ‘जंजीर’ (1973) ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया – एंग्री यंग मैन इमेज बनी।
स्वर्णिम दौर और सफलता
1970 के दशक में ‘दीवार’, ‘शोले’, ‘डॉन’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’ जैसी ब्लॉकबस्टर दीं। शहंशाह कहलाए, सदी का महानायक बने। 1980 तक 100+ फिल्में, राष्ट्रीय पुरस्कार जीते। जया भादुड़ी से 1973 में शादी, अभिषेक और श्वेता के पिता बने
संकट के बादल: कुली हादसा
1982 में ‘कूली’ सेट पर चोट लगी, जीवन-मृत्यु का संग्राम लड़ा। इंदिरा गांधी ने सिंगापुर से डॉक्टर बुलाए। चोट के बाद बीमारी (मायस्थेनिया ग्रेविस), फिल्में फ्लॉप होने लगीं। 1990 के दशक में ABCL कंपनी शुरू की, लेकिन मिस वर्ल्ड आयोजन के बाद 90 करोड़ का कर्ज हो गया।
राजनीति और दिवालियापन
1984 में राजीव गांधी समर्थन में इलाहाबाद से सांसद बने, लेकिन 1987 में हार गए। 1997 में ABCL दिवालिया, घर बेचने की नौबत। दिवालिया होने से बचे, लेकिन गहरे संकट में
KBC और कमबैक2000 में ‘कौन बनेगा करोड़पति’ होस्ट बने – टीआरपी रिकॉर्ड टूटे, करियर पुनर्जीवित। ‘मोहब्बतें’, ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘बागबान’, ‘पीकू’ जैसी हिट्स। 15+ फिल्मफेयर अवॉर्ड, पद्म विभूषण, दादासाहेब फाल्के सम्मान।
विरासत और आज
83 वर्षीय अमिताभ आज भी सक्रिय – ‘कल्कि 2898 AD’, KBC 16। ट्विटर पर लाखों फॉलोअर्स, सामाजिक कार्य। उनकी जिंदगी संघर्ष की मिसाल है – गिरकर उठने का जज्बा।