उत्तर प्रदेश में राजनीतिक समीकरण
यूपी सियासत में भूकंप: नसीमुद्दीन सिद्दीकी सपा की साइकिल पर सवार, पुराने बसपा साथी भी साथ
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बसपा सरकार में कई विभागों के कैबिनेट मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी रविवार को अपने समर्थकों समेत समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। उनके साथ पूर्व मंत्री अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू ने भी सपा का दामन थाम लिया। सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस घटना से 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण बदलने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
कौन हैं नसीमुद्दीन सिद्दीकी? बसपा में ‘मिनी सीएम’ से कांग्रेस तक का सफर
नसीमुद्दीन सिद्दीकी बसपा के पुराने और कद्दावर नेता रहे हैं। मायावती सरकार (2007-2012) में उन्हें कई महत्वपूर्ण विभाग सौंपे गए थे, जिसके कारण उन्हें ‘मिनी सीएम’ तक कहा जाता था। उन्होंने विधान परिषद में विपक्ष के नेता का पद भी संभाला। बाद में वे कांग्रेस में शामिल हुए, लेकिन हाल ही में 24 जनवरी को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। अब सपा में आने से उनकी राजनीतिक यात्रा नई दिशा में मुड़ गई है। नसीमुद्दीन ने कहा कि वे मुलायम सिंह यादव (नेताजी) से हमेशा प्रभावित रहे हैं और अखिलेश यादव विकास की राजनीति करते हैं, हिंदू-मुस्लिम विभाजन नहीं। उन्होंने दावा किया कि 2027 में अखिलेश के नेतृत्व में सपा सरकार बनाएगी।
अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू भी शामिल, हाथी वाले साथी फिर एकजुट
नसीमुद्दीन के साथ बसपा पृष्ठभूमि के अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू भी सपा में आए। वे पूर्व मंत्री रह चुके हैं और बसपा के पुराने कार्यकर्ताओं में उनका अच्छा प्रभाव है। इस ज्वाइनिंग को ‘हाथी वाले साथी’ के फिर से एक साथ आने के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही अपना दल (एस) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार पाल, पूर्व विधायक दीनानाथ कुशवाहा, डॉ. दानिश खान जैसे कई नेता भी शामिल हुए। नसीमुद्दीन ने बताया कि करीब 15,718 लोग विभिन्न दलों से सपा में आए हैं, जिसमें उनके समर्थक प्रमुख हैं।
अखिलेश यादव का दांव: पीडीए को और मजबूत करने की रणनीति
अखिलेश यादव ने सभी नए सदस्यों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ये ज्वाइनिंग पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को मजबूत करेंगी। होली मिलन से पहले पीडीए का विशेष कार्यक्रम होगा, जहां पीड़ितों को जोड़ा जाएगा।
यह कदम 2027 चुनाव से पहले सपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
विशेषकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक पर
नसीमुद्दीन का प्रभाव पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। सपा में पहले से आजम खान जैसे नेता हैं,
लेकिन नसीमुद्दीन की एंट्री से मुस्लिम चेहरों की ताकत बढ़ेगी।
क्या यह अखिलेश के लिए गेमचेंजर साबित होगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी की सपा में एंट्री से कांग्रेस को झटका लगा है,
जबकि बसपा के कुछ वोट बैंक पर असर पड़ सकता है
अखिलेश यादव लगातार बड़े नेताओं को जोड़कर अपनी पार्टी को मजबूत कर रहे हैं।
यह घटना यूपी की सियासत में हलचल मचा रही है और 2027 के चुनावी समीकरण बदल सकती है।
क्या नसीमुद्दीन और उनके साथी अखिलेश के लिए असली गेमचेंजर बनेंगे? समय बताएगा।
Read this post:लोकसभा में राहुल गांधी का मोदी सरकार पर तीखा प्रहार: बजट सत्र में अमेरिका ट्रेड डील, अडानी और किसान मुद्दों पर बड़ा हमला