उत्तर प्रदेश में एसआईआर
एसआईआर लिस्ट में घोटाले की बू
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना (एसआईआर) के तहत गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज देने वाली लिस्ट में अब गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। जांच में पता चला है कि एक ही घर के पते पर दर्जनों नाम दर्ज हैं, जिसमें कई मृतकों का नाम भी शामिल है। सबसे चौंकाने वाली बात – वाराणसी के एक तिवारी परिवार के घर के पते पर फैज मोहम्मद का नाम दर्ज है और उसी पते पर 49 लोगों की लिस्ट है। यह मामला अब पूरे प्रदेश में सनसनी फैला रहा है।
तिवारी के घर पर फैज मोहम्मद और 49 नामों का रहस्य
जांच के दौरान सामने आया कि वाराणसी के एक मोहल्ले में रहने वाले तिवारी परिवार के घर के पते पर एसआईआर लिस्ट में फैज मोहम्मद नाम का व्यक्ति दर्ज है। हैरानी की बात यह है कि उसी पते पर कुल 49 अलग-अलग व्यक्तियों के नाम लाभार्थी के रूप में दर्ज हैं। इनमें:
- कई ऐसे नाम जो पहले से ही मृत घोषित हो चुके हैं
- कुछ नाम ऐसे जिनका इस पते से कोई संबंध नहीं
- परिवार के सदस्यों के अलावा पड़ोसी और दूर-दराज के रिश्तेदारों के नाम भी शामिल
यह साफ संकेत देता है कि लिस्ट में फर्जी नाम डालकर सरकारी लाभ हड़पने की कोशिश की गई है।
कई मृतकों के नाम भी दर्ज – कौन भर रहा है फॉर्म?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि मृतकों के नाम एसआईआर लिस्ट में कैसे शामिल हो गए? जांच में पता चला कि कई लाभार्थियों के नाम ऐसे हैं जो वर्षों पहले गुजर चुके हैं, लेकिन उनके नाम पर कार्ड जारी है।
- एक मामले में 2018 में मृत्यु हो चुकी व्यक्ति का नाम 2025-26 की लिस्ट में सक्रिय दिख रहा है।
- स्थानीय लोगों का कहना है कि फॉर्म भरने वाले एजेंट या ग्राम पंचायत स्तर के कर्मचारी इसमें शामिल हो सकते हैं।
यह घोटाला कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक ही पते पर दर्ज 49 नामों में से कम से कम 15-20 नाम ऐसे हैं जो वास्तविक निवासी नहीं हैं।
प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया
एसआईआर लिस्ट में अनियमितताओं के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया है।
- स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रदेश में लिस्ट की विशेष ऑडिट के आदेश दिए हैं।
- संभागीय और जिला स्तर पर जांच टीम गठित की गई।
- फर्जी नामों वाले कार्ड रद्द करने और दोषी एजेंटों/कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू।
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि “गरीबों के लिए बनी योजना का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
जनता में आक्रोश और सवाल
स्थानीय लोग पूछ रहे हैं:
- मृतकों का फॉर्म किसने भरा?
- एक ही घर में 49 नाम कैसे संभव हैं?
- एजेंटों को कितना कमीशन मिल रहा है?
- क्या यह पूरे प्रदेश में चल रहा सिस्टमेटिक घोटाला है?
यह मामला अब सिर्फ वाराणसी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में एसआईआर लिस्ट की जांच की मांग तेज हो गई है।
मेरठ, वाराणसी और अन्य जिलों में एसआईआर लिस्ट में सामने आई ये खामियां सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और सख्त निगरानी की कमी को उजागर करती हैं। फैज मोहम्मद का तिवारी के घर पर नाम और 49 लोगों की लिस्ट एक बड़ा घोटाला होने के संकेत हैं। सरकार को न केवल दोषियों पर कार्रवाई करनी होगी, बल्कि ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए डिजिटल वेरिफिकेशन और आधार लिंकेज को और मजबूत करना होगा। गरीबों के लिए बनी योजना का फायदा वाकई जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए – यह जनता की मुख्य मांग है।