वाराणसी में पूर्व भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी अमिताभ ठाकुर को बड़ी कानूनी राहत मिली है। 9 जनवरी 2026 को जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने वाराणसी के चौक थाने में दर्ज एक मामले में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई की और उन्हें जमानत मंजूर कर दी। अदालत ने 50-50 हजार रुपये की दो जमानतदारियां और व्यक्तिगत बंधपत्र जमा करने पर रिहाई का आदेश दिया। यह फैसला अमिताभ ठाकुर और उनके समर्थकों के लिए बड़ी जीत मानी जा रही है।
मामले की पृष्ठभूमि और गिरफ्तारी
यह केस वाराणसी के चौक थाने में 9 दिसंबर 2025 को दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता अंबरीश सिंह भोला (हिंदू युवा वाहिनी के पूर्व नेता और वाराणसी विकास प्राधिकरण के मानद सदस्य) ने आरोप लगाया कि अमिताभ ठाकुर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर उन्हें आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने का झूठा आरोप लगाया। इससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची।
इसके अलावा अमिताभ ठाकुर देवरिया जिले के एक पुराने धोखाधड़ी मामले (1999 का औद्योगिक प्लॉट आवंटन से जुड़ा) में भी फंसे हुए हैं। इसी मामले में 10 दिसंबर 2025 से वे देवरिया जेल में बंद थे। पुलिस ने 19 दिसंबर को ‘बी’ वारंट पर उन्हें देवरिया जेल से वाराणसी लाकर पेश किया था। पहले विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने 22 दिसंबर को उनकी जमानत खारिज कर दी थी।
23 दिसंबर को जिला जज कोर्ट में नई जमानत अर्जी दाखिल की गई। सुनवाई 2 जनवरी के लिए तय थी, लेकिन बनारस बार एसोसिएशन चुनाव के कारण टल गई। कई बार स्थगित होने के बाद 9 जनवरी को अंततः जमानत मिल गई।
जमानत मिलने के बावजूद रिहाई में देरी
जमानत मिलने के बावजूद अमिताभ ठाकुर अभी रिहा नहीं हो पाएंगे। कारण यह है कि देवरिया केस में उनकी जमानत अभी नहीं मिली है। फिलहाल वे जेल में नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य कारणों से लखनऊ PGI में इलाज करा रहे हैं। हाल ही में जेल में रहते हुए उन्हें सीने में दर्द की शिकायत हुई थी, जिसके बाद उन्हें गोरखपुर होते हुए लखनऊ रेफर किया गया। डॉक्टरों ने हार्ट संबंधी जांच की और इलाज जारी है।
देवरिया मामले में उनकी न्यायिक हिरासत 21 जनवरी तक बढ़ाई गई है।
जमानत के लिए उन्हें अलग से याचिका दायर करनी होगी।
अमिताभ ठाकुर का दावा और विवाद
पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर, जो आजाद अधिकार सेना के प्रमुख भी हैं,
लगातार दावा करते रहे हैं कि ये मामले राजनीतिक साजिश का नतीजा हैं।
उन्होंने कहा कि कोडीन कफ सिरप मामले में धनंजय सिंह और वाराणसी के कुछ बड़े भाजपा नेताओं के
नाम उजागर करने के बाद उन्हें फंसाया गया। जेल में उन्होंने अनशन भी किया था, जिसे बाद में तोड़ा।
निष्कर्ष: कानूनी लड़ाई जारी
वाराणसी जिला जज कोर्ट से जमानत मिलना अमिताभ ठाकुर के लिए बड़ी राहत है,
लेकिन देवरिया केस और स्वास्थ्य स्थिति के कारण उनकी पूरी रिहाई अभी लंबित है।
यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति और पूर्व पुलिस अधिकारियों के खिलाफ
कार्रवाई की बहस को फिर से गरमा रहा है।
समर्थक इसे न्याय की जीत बता रहे हैं, जबकि विरोधी पक्ष जांच जारी रखने की मांग कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में आगे की सुनवाई तय करेगी कि अमिताभ ठाकुर कब पूरी तरह रिहा होंगे।
