पूर्वांचल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला जब गोरखपुर के तेंदुआ स्थित ग्रेनवीआ रिजॉर्ट में “पूर्वांचल भागेदारी संकल्प मोर्चा” का औपचारिक गठन किया गया। यह आयोजन सिर्फ एक बैठक नहीं बल्कि पूर्वांचल के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

एक मंच पर जुटे सैकड़ों नेता, गोरखपुर बना केंद्र
इस महत्वपूर्ण बैठक की अगुवाई भारतीय अपना समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजन सिंह सूर्यवंशी ने की। उनके नेतृत्व में विभिन्न दलों और संगठनों के सैकड़ों नेता एक मंच पर आए और पूर्वांचल के हक की लड़ाई को एक नई दिशा देने का संकल्प लिया।
बैठक में जनशक्ति सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिन्टू साहनी एडवोकेट, लौकिक समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जनार्दन चौहान, संस्थागारित पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज सिंह सैंथवार, पुरबिहा लोग पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरेंद्र तिवारी, अभय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शत्रुधन सिंह निषाद, भारतीय सर्वजन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक निषाद, पानी बचाओ महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय जुआठा, फिशरमैन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रभान निषाद, जनहित किसान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्याम सुंदर दास चौरसिया, अखिल भारतीय नवनिर्माण पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चौधरी, भारतीय किसान यूनियन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद सिंह सैंथवार और अखिल भारतीय संविधा कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील श्रीवास्तव सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे।
पूर्वांचल के मुद्दों पर एकजुटता
अपने संबोधन में राजन सिंह सूर्यवंशी ने कहा कि पूर्वांचल लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहा है। यहां के युवाओं को रोजगार के लिए पलायन करना पड़ता है, किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता और बड़े विकास प्रोजेक्ट इस क्षेत्र से दूर रहते हैं। उन्होंने कहा कि यह मोर्चा इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए एक मजबूत मंच बनेगा।
इसके साथ ही संगठन महामंत्री भीमसेन सिंह, अरुण कुमार श्रीवास्तव, डॉ घनश्याम निषाद और सैकड़ों कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और प्रभावशाली बना दिया।

मोर्चा का उद्देश्य और रणनीति
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पूर्वांचल के विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों को एक साझा मंच पर लाना था ताकि वे मिलकर क्षेत्र के विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर काम कर सकें।
मोर्चा के गठन के साथ यह भी तय किया गया कि आने वाले समय में गांव-गांव और शहर-शहर जाकर जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। लोगों को उनके अधिकारों और योजनाओं के प्रति जागरूक किया जाएगा।

किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं रहेगा मोर्चा
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि यह मोर्चा किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन के रूप में काम करेगा। इसमें हर वर्ग, हर समाज और हर संगठन को बराबर की भागीदारी दी जाएगी।
नेताओं ने एक स्वर में कहा कि जब तक पूर्वांचल के लोग एकजुट नहीं होंगे,
तब तक अधिकारों की लड़ाई अधूरी रहेगी।
इसलिए यह मोर्चा क्षेत्रीय एकता को मजबूत करने का काम करेगा।

शिक्षा, रोजगार और किसानों पर फोकस
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा सुधार, किसानों की आय बढ़ाने, युवाओं के
लिए रोजगार सृजन, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार और
सामाजिक समानता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। सभी नेताओं ने भरोसा जताया कि यह मोर्चा आने वाले
समय में पूर्वांचल की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाएगा।

2026 से पहले बढ़ेगी सियासी हलचल
इस नए मोर्चे के गठन से यह साफ संकेत मिल रहा है कि 2026 से पहले पूर्वांचल की
राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। गोरखपुर
अब एक बार फिर राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनता नजर आ रहा है।

निष्कर्ष
पूर्वांचल भागेदारी संकल्प मोर्चा का गठन केवल एक राजनीतिक
घटना नहीं बल्कि एक बड़े सामाजिक आंदोलन की शुरुआत है।
अगर यह मोर्चा अपने उद्देश्यों पर मजबूती से काम करता है,
तो आने वाले समय में यह पूर्वांचल की राजनीति और
विकास दोनों में बड़ा बदलाव ला सकता है।
