गोरखपुर में औद्योगिक विकास के लिए 400 एकड़ भूमि का अनिवार्य अधिग्रहण
गोरखपुर भूमि अधिग्रहण 2025: उत्तर प्रदेश सरकार ने गोरखपुर को औद्योगिक विकास का नया केंद्र बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। गोरखपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी (GDA) को मनीराम, बालापार और रहमतनगर क्षेत्रों में 400 एकड़ से अधिक भूमि के अनिवार्य अधिग्रहण की मंजूरी मिल गई है। यह भूमि ‘गुरुकुल सिटी’ नामक आधुनिक टाउनशिप के विकास के लिए अधिग्रहण की जाएगी, जो न केवल आवासीय सुविधाएं प्रदान करेगी बल्कि औद्योगिक और शैक्षणिक हब के रूप में भी काम करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह परियोजना पूर्वांचल के आर्थिक उत्थान को नई गति देगी।
अधिग्रहण प्रक्रिया तेज, 200 एकड़ पहले ही रजिस्टर्ड – बोर्ड की मंजूरी के बाद धारा 11 के तहत आगे बढ़ेगा काम
GDA के वाइस चेयरमैन आनंद वर्धन ने बताया कि कुल 400 एकड़ भूमि के लिए अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इनमें से लगभग 200 एकड़ भूमि पहले ही रजिस्टर्ड हो चुकी है, जबकि बाकी भूमि के लिए धारा 11 के तहत अनिवार्य अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू हो गई है। यह क्षेत्र गोरखपुर-सोनौली हाईवे के किनारे स्थित है, जहां पहले से ही ओमेक्स टाउनशिप, यूपी एसएसएफ की दूसरी बटालियन, गोरखनाथ विश्वविद्यालय और राज्य का पहला आयुष विश्वविद्यालय मौजूद हैं।
GDA बोर्ड की हालिया बैठक में इस परियोजना को हरी झंडी मिली है। वाइस चेयरमैन ने कहा,
“गुरुकुल सिटी नया गोरखपुर का प्रमुख आवासीय केंद्र बनेगी। यह परियोजना भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन की गई है, जिसमें प्लॉट दरें 25,000 से 30,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर (लगभग 2,000-3,000 रुपये प्रति वर्ग फुट) रखी गई हैं। यह निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प साबित होगी।”
अधिग्रहण प्रक्रिया में प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा और पुनर्वास पैकेज दिया जाएगा, जैसा कि उत्तर प्रदेश भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत प्रावधान है।
गुरुकुल सिटी में होंगी ये आधुनिक सुविधाएं, औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
‘गुरुकुल सिटी’ टाउनशिप का मास्टर प्लान तैयार हो चुका है, जिसमें निम्नलिखित सुविधाएं शामिल होंगी:
- आवासीय प्लॉट्स: विभिन्न साइज के 1,000 से अधिक प्लॉट्स, जिसमें ईडब्ल्यूएस, एलआईजी और एचआईजी कैटेगरी शामिल।
- औद्योगिक जोन: छोटे-मध्यम उद्योगों के लिए 100 एकड़ आरक्षित क्षेत्र, जहां फूड प्रोसेसिंग, फार्मा और आईटी सेक्टर को प्राथमिकता।
- शैक्षणिक और स्वास्थ्य केंद्र: स्कूल, कॉलेज और अस्पताल के लिए 50 एकड़ भूमि।
- इंफ्रास्ट्रक्चर: चौड़ी सड़कें, पार्क, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और सोलर एनर्जी सिस्टम।
- कनेक्टिविटी: गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और सोनौली हाईवे से सीधी पहुंच, जिससे लॉजिस्टिक्स आसान होगा।
यह टाउनशिप न केवल गोरखपुर बल्कि देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज जैसे आसपास के जिलों के निवेशकों को आकर्षित करेगी। GDA के अनुसार, परियोजना से 5,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजन होगा।
पूर्वांचल में निवेश का नया दौर, GIDA की 600 एकड़ टाउनशिप से भी जुड़ेगी यह परियोजना
यह अधिग्रहण गोरखपुर को पूर्वांचल का प्रमुख औद्योगिक केंद्र बनाने की दिशा में एक और कदम है। हाल ही में गोरखपुर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (GIDA) ने धुरियापार में 600 एकड़ भूमि अधिग्रहण कर ‘ग्रेटर गिडा’ टाउनशिप विकसित करने की योजना शुरू की है, जहां दो बड़े प्रोजेक्ट्स को पहले ही भूमि आवंटित हो चुकी है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में GIDA ने 182 एकड़ भूमि पर 54 नई यूनिट्स को मंजूरी दी है, जिससे 5,800 करोड़ रुपये का निवेश और 8,500 नौकरियां पैदा होंगी।
प्रमुख निवेशक जैसे अदानी ग्रुप (अंबुजा सीमेंट), कोका-कोला (अमृत बॉटलर्स),
पेप्सीको और रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड गोरखपुर में रुचि दिखा रहे हैं। गुरुकुल सिटी इस औद्योगिक
विकास को आवासीय और सपोर्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ेगी।
स्थानीय निवासियों और किसानों के लिए क्या होगा लाभ?
- मुआवजा: बाजार मूल्य से दोगुना मुआवजा + अतिरिक्त सुविधाएं।
- रोजगार अवसर: प्रोजेक्ट में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता।
- आर्थिक उछाल: टाउनशिप से रियल एस्टेट मूल्य में 20-30% वृद्धि की उम्मीद।
स्थानीय किसान नेता रामेश्वर यादव ने कहा, “सरकार ने किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा है।
यह अधिग्रहण हमारे क्षेत्र को विकसित करेगा और नई पीढ़ी के लिए अवसर पैदा करेगा।”
अगले महीने से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज हो जाएगी, और 2026 तक पहला चरण पूरा करने का लक्ष्य है।
अधिक अपडेट के लिए बने रहें।