NEET परीक्षा और मेडिकल एडमिशन नियमों का महत्व
NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) भारत में MBBS, BDS और आयुष कोर्सेज के लिए अनिवार्य प्रवेश परीक्षा है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित यह परीक्षा हर साल लाखों स्टूडेंट्स की किस्मत तय करती है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बिना NEET क्वालिफाई किए कोई स्टूडेंट मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नहीं ले सकता। फिर भी, गुजरात के 6 आयुर्वेद कॉलेजों पर ऐसा उल्लंघन करने का आरोप लगा है, जिसके चलते कोर्ट ने कड़ी जांच का आदेश दिया है। यह मामला मेडिकल शिक्षा की पारदर्शिता और नियमों के पालन पर सवाल खड़े करता है।
गुजरात आयुर्वेद कॉलेजों पर क्या हैं आरोप?
गुजरात के अहमदाबाद, सूरत और अन्य जिलों में स्थित 6 प्रमुख आयुर्वेद कॉलेजों पर NEET में फेल स्टूडेंट्स को गलत तरीके से MBBS या आयुष कोर्सेज में एडमिशन देने का आरोप है। इन कॉलेजों में आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा के कोर्स चलते हैं, लेकिन कथित रूप से इन्होंने NEET स्कोरकार्ड के बिना छात्रों को सीटें अलॉट कीं। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के अनुसार, यह फर्जी दस्तावेजों और कोटा नियमों का दुरुपयोग है। कोर्ट ने गुजरात मेडिकल काउंसिल और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर 4 हफ्तों में रिपोर्ट मांगी है। यह जांच NTA और CBI स्तर पर हो सकती है, जो पूरे देश में मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया को प्रभावित करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दिया जांच का सख्त आदेश?
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि NEET नियमों का उल्लंघन राष्ट्रीय स्तर पर मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता को खतरे में डालता है। कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के पिछले फैसलों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से भी जवाब मांगा। मुख्य बिंदु ऐसे हैं:
- नियम उल्लंघन: NEET क्वालिफाई न करने वाले स्टूडेंट्स को 15% ऑल इंडिया कोटा या राज्य कोटा में एडमिशन नहीं मिल सकता।
- फर्जीवाड़े की आशंका: कॉलेज मैनेजमेंट ने कथित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग और डोनेशन के जरिए सीटें बेचीं।
- स्टूडेंट्स का नुकसान: योग्य स्टूडेंट्स की सीटें प्रभावित हुईं, जिससे असली मेरिट लिस्ट बिगड़ी।
कोर्ट ने तत्काल एडमिशन प्रक्रिया रोकने और सभी संदिग्ध मामलों की ऑडिट का आदेश दिया। यह फैसला 2026 NEET काउंसलिंग से पहले आया है, जो स्टूडेंट्स के लिए राहत है।
प्रभावित कॉलेजों की लिस्ट और राज्य सरकार की भूमिका
प्रभावित 6 आयुर्वेद कॉलेजों में शामिल हैं:
- गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी, जामनगर।
- अहमदाबाद होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज।
- सूरत स्थित आयुष कॉलेज।
- अन्य 3 निजी संस्थान।
आगे क्या होगा? अपेक्षित परिणाम
सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई 15 फरवरी 2026 को है। यदि आरोप साबित हुए,
तो कॉलेजों पर जुर्माना, सीटें रद्द और आपराधिक केस हो सकते हैं।
स्टूडेंट्स को नए सिरे से काउंसलिंग का मौका मिलेगा। यह फैसला अन्य राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार में भी
NEET नियमों की पालना सुनिश्चित करेगा।