केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: पांच केंद्र शासित प्रदेशों को मिले अधिकार, अब औषधि-जादुई उपचार कानून के तहत सख्त कार्रवाई

केंद्र से पांच केंद्र शासित प्रदेशों को मिला अधिकार: फर्जी दवा-जादू विज्ञापनों पर लगाम

केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य और जनता के हित में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गृह मंत्रालय ने पांच केंद्र शासित प्रदेशों को औषधि एवं जादुई उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 को लागू करने और उसके तहत कार्रवाई करने के पूर्ण अधिकार दे दिए हैं। इस फैसले से इन प्रदेशों में फर्जी दवाओं, जादू-टोने और चमत्कारी इलाज के भ्रामक विज्ञापनों पर तुरंत रोक लगाई जा सकेगी।

यह अधिनियम स्पष्ट रूप से कहता है कि कोई भी व्यक्ति, कंपनी या संस्था ऐसी कोई विज्ञापन प्रकाशित नहीं करेगा, जो किसी दवा या उपचार को किसी विशेष बीमारी, विकार या स्थिति के निदान, उपचार, रोकथाम या निवारण के लिए उपयोगी बताने का दावा करे। अब इन केंद्र शासित प्रदेशों में इस कानून का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

कौन-कौन से केंद्र शासित प्रदेश शामिल?

गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार निम्नलिखित पांच केंद्र शासित प्रदेशों को ये अधिकार दिए गए हैं:

  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
  • लक्षद्वीप
  • दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव
  • लद्दाख
  • चंडीगढ़

इन सभी यूटी में अब स्थानीय प्रशासन स्वतंत्र रूप से इस अधिनियम के तहत जांच, छापेमारी और दंडात्मक कार्रवाई कर सकेगा। इससे पहले ये मामले केंद्र सरकार की मंजूरी पर निर्भर थे, जिससे कार्रवाई में देरी होती थी।

कानून के मुख्य प्रावधान और दंड

औषधि एवं जादुई उपचार अधिनियम, 1954 के तहत निम्नलिखित पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है:

  • किसी बीमारी (जैसे कैंसर, टीबी, मधुमेह, गठिया, बांझपन आदि) के इलाज का दावा करने वाले विज्ञापन
  • जादू-टोना, तंत्र-मंत्र, चमत्कारी ताबीज या उपायों का प्रचार
  • ऐसी दवाओं का प्रचार जो बिना डॉक्टर की सलाह के ली जा सकें

दंड – पहली बार अपराध पर 6 महीने तक की कैद या ₹5,000 तक जुर्माना या दोनों। दोबारा अपराध पर 1 साल तक की कैद और ₹10,000 तक जुर्माना

यह कानून विशेष रूप से उन फर्जी विज्ञापनों पर नकेल कसता है जो अखबारों, टीवी, सोशल मीडिया और दीवारों पर छपते हैं।

इस फैसले का महत्व और प्रभाव

यह कदम आम जनता, खासकर ग्रामीण और कम पढ़े-लिखे लोगों को फर्जी इलाज से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए बहुत जरूरी था। कई बार लोग लाखों रुपये खर्च कर भी ठगे जाते हैं और बीमारी बढ़ जाती है। अब इन केंद्र शासित प्रदेशों में स्थानीय प्रशासन तुरंत कार्रवाई कर सकेगा, जिससे समय पर रोकथाम संभव हो जाएगी।

केंद्र सरकार ने इस फैसले से राज्यों को भी संकेत दिया है कि वे इस अधिनियम को और सख्ती से लागू करें। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पूरे देश में

फर्जी दवा और जादुई उपचार के विज्ञापनों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।

स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और सख्त कानून

केंद्र का यह फैसला स्वास्थ्य सुरक्षा और जनता के हित में एक मजबूत कदम है।

अब फर्जी विज्ञापनों के जरिए लोगों को ठगना और भी मुश्किल हो जाएगा।

पांच केंद्र शासित प्रदेशों में त्वरित कार्रवाई से अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल बनेगी।

सरकार का यह प्रयास लोगों को वैज्ञानिक इलाज की ओर ले जाने और

अंधविश्वास पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।