आयकर विभाग का छापा 10 करोड़ कैश बरामद
लखनऊ में बड़ा छापा: बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के घर से 10 करोड़ कैश बरामद
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह और उनके करीबियों के ठिकानों पर आयकर विभाग की टीम ने बड़ा छापा मारा है। बुधवार से शुरू हुई कार्रवाई में उनके विपुलखंड स्थित आवास से 10 करोड़ रुपये की नकदी बरामद की गई है। गुरुवार को घर पर कार्रवाई पूरी हो गई, लेकिन उनके ऑफिस और अन्य स्थानों पर आयकर टीम की तलाशी अभी भी जारी है। यह छापेमारी यूपी की राजनीति में हलचल मचा रही है।
कार्रवाई का विवरण: घर से नकदी बरामद, अन्य ठिकाने जारी
आयकर विभाग की टीम ने बुधवार सुबह उमाशंकर सिंह के विपुलखंड स्थित आवास पर छापा मारा। कई घंटों की तलाशी के बाद टीम ने 10 करोड़ रुपये कैश बरामद किए। नकदी को सुरक्षित पैक करके जब्त कर लिया गया है। घर पर कार्रवाई गुरुवार सुबह तक पूरी हो गई, लेकिन विभाग की टीम अब उनके ऑफिस, व्यावसायिक परिसर और अन्य संबंधित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक इन स्थानों पर दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय प्रमाण जुटाए जा रहे हैं।
उमाशंकर सिंह कौन हैं? बसपा का इकलौता विधायक
उमाशंकर सिंह बसपा के इकलौते विधायक हैं, जिन्होंने हाल ही में विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। वे पूर्वांचल क्षेत्र से आते हैं और पार्टी में काफी सक्रिय रहे हैं। उनकी राजनीतिक और व्यावसायिक गतिविधियां लंबे समय से चर्चा में रही हैं। यह छापेमारी बसपा सुप्रीमो मायावती के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि यह पार्टी पहले से ही कई मुद्दों पर विपक्ष के निशाने पर है।
आयकर विभाग की कार्रवाई: क्या है वजह?
आयकर विभाग ने अभी तक इस छापेमारी की आधिकारिक वजह नहीं बताई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह जांच काले धन, अनियमित आय और टैक्स चोरी से जुड़ी हो सकती है। विभाग ने कई महीनों से विभिन्न राजनीतिक व्यक्तियों और व्यापारियों पर नजर रखी हुई थी। उमाशंकर सिंह के मामले में टिप-ऑफ या सूचना के आधार पर छापा मारा गया। बरामद 10 करोड़ कैश को लेकर विभाग अब आगे की जांच करेगा कि यह रकम कहां से आई और टैक्स कैसे चुकाया गया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: सियासत में गरमाहट
यह घटना यूपी की सियासत में नई बहस छेड़ रही है। भाजपा और सपा ने बसपा पर निशाना साधते हुए कहा है कि यह “काले धन” का सबूत है। वहीं बसपा समर्थकों का कहना है कि यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई हो सकती है।
उमाशंकर सिंह या बसपा की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा और कोई गड़बड़ी नहीं है।
आगे क्या होगा? जांच का दायरा बढ़ सकता है
आयकर विभाग की कार्रवाई अभी जारी है। यदि ऑफिस और अन्य ठिकानों से और
दस्तावेज या नकदी बरामद हुई तो मामला और गंभीर हो सकता है।
विभाग ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) को भी सूचित कर सकता है, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू हो सकती है।
यह घटना 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बसपा के लिए चुनौती बनेगी।
लखनऊ में यह छापेमारी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
अब सभी की नजरें जांच के नतीजों पर टिकी हैं कि
क्या और बड़े खुलासे होते हैं या मामला यहीं खत्म हो जाता है।