गोरखपुर में पंचायत चुनाव से पहले बड़ी कार्रवाई: 12.37 लाख डुप्लीकेट वोटरों की पहचान, आधार से होगा सत्यापन
मेटा डिस्क्रिप्शन: गोरखपुर जिले में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले 12.37 लाख डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान हुई। जिला प्रशासन ने आधार कार्ड से सत्यापन शुरू किया, 20 फरवरी 2026 तक पूरा करने के निर्देश। चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की बड़ी कार्रवाई। पूरी खबर और अपडेट 2026। (जनवरी 2026)
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पंचायत चुनाव की तैयारी में सख्ती: डुप्लीकेट वोटरों पर बड़ा एक्शन
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत) की तैयारियां तेज हो गई हैं। चुनाव की तारीखें घोषित होने से पहले ही जिला प्रशासन ने मतदाता सूची में मौजूद गड़बड़ियों को दूर करने के लिए अभूतपूर्व कार्रवाई शुरू कर दी है। जिला निर्वाचन अधिकारी और जिलाधिकारी के निर्देश पर 12.37 लाख डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान की गई है। यह संख्या जिले की कुल मतदाता सूची का लगभग 15-18% हिस्सा है, जो चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए चिंता का विषय बन गई थी।
डुप्लीकेट वोटरों की पहचान कैसे हुई?
जिला प्रशासन ने विशेष सॉफ्टवेयर और डेटा एनालिसिस के माध्यम से मतदाता सूची का गहन विश्लेषण किया। मुख्य रूप से निम्न कारणों से डुप्लीकेट एंट्री पाई गई:
- एक ही व्यक्ति का नाम अलग-अलग ग्राम पंचायतों या वार्डों में दर्ज होना
- आधार नंबर या अन्य पहचान पत्र से जुड़ाव न होने पर दोहरी एंट्री
- स्थानांतरण के बाद पुरानी लिस्ट से नाम हटाना न होना
- कुछ मामलों में फर्जी नाम और फोटो का इस्तेमाल
जिला निर्वाचन विभाग के अनुसार, यह डुप्लीकेट लिस्ट मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा पाई गई है, जहां लोग रोजगार या पढ़ाई के लिए दूसरे जिलों/राज्यों में जाते हैं और नाम नहीं हटाते।
आधार कार्ड से होगा सत्यापन: 20 फरवरी तक समयसीमा
जिला प्रशासन ने सख्त फैसला लिया है कि इन 12.37 लाख संदिग्ध/डुप्लीकेट मतदाताओं का आधार कार्ड से सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। इसके लिए:
- जिले को कुल 20 यूनिट में बांटा गया है
- प्रत्येक यूनिट में विशेष टीमें गठित की गई हैं
- 1900 ब्लू (बूथ लेवल ऑफिसर) को सत्यापन का जिम्मा सौंपा गया है
- प्रत्येक BLO को अपने क्षेत्र में संदिग्ध मतदाताओं की घर-घर जाकर जांच करने और आधार से मिलान करने के निर्देश दिए गए हैं
जिलाधिकारी ने आदेश दिया है कि 20 फरवरी 2026 तक यह सत्यापन प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त हो जानी चाहिए। जिन मतदाताओं का आधार सत्यापन नहीं होगा या डुप्लीकेट साबित होगा, उनके नाम अंतिम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे।
चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता का लक्ष्य
यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गोरखपुर जिले में पंचायत चुनाव हमेशा से कड़े मुकाबले वाले रहे हैं।
डुप्लीकेट वोटरों की मौजूदगी से फर्जी वोटिंग, बूथ कैप्चरिंग और चुनावी अनियमितताओं की आशंका रहती है।
जिला प्रशासन का मानना है कि शुद्ध मतदाता सूची से:
- चुनाव निष्पक्ष होंगे
- वास्तविक मतदाताओं को उनका अधिकार मिलेगा
- फर्जी नामों से होने वाली गड़बड़ी रुकेगी
- चुनावी खर्च और विवाद कम होंगे
ग्रामीणों से अपील और अगले कदम
जिला निर्वाचन अधिकारी ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि
वे अपने आधार कार्ड और वोटर आईडी को तैयार रखें।
यदि किसी का नाम डुप्लीकेट सूची में आता है तो
BLO के साथ सहयोग करें और सही दस्तावेज उपलब्ध कराएं।
जिनका नाम गलती से हटाया जाता है, उनके पास आपत्ति दर्ज करने का अधिकार सुरक्षित रहेगा।
यह कार्रवाई न केवल गोरखपुर बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनावों के लिए मिसाल बन सकती है।
शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र की मजबूती का आधार होती है।