बरेली में 166वीं बार निकली ऐतिहासिक राम बरात
राम बरात का भव्य आयोजन
उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में होली से ठीक पहले सोमवार को एक अनोखी और ऐतिहासिक परंपरा का जीवंत प्रदर्शन हुआ। यहां 166वीं बार निकाली गई राम बरात ने पूरे शहर को आस्था, भक्ति और उत्साह के रंग में सराबोर कर दिया। ब्रह्मपुरी स्थित प्राचीन नृसिंह मंदिर से सुबह करीब 10 बजे पूजा-पाठ और आरती के बाद राम बरात का शुभारंभ हुआ। इस बारात में भगवान राम को रघुवर दूल्हा के रूप में सजाया गया और वे रथ पर सवार होकर निकले। उनके साथ भ्राता लक्ष्मण और गुरु विश्वामित्र भी रथ पर विराजमान थे।
जैसे ही रथ मंदिर से बाहर निकला, चारों ओर जय श्रीराम, जय सिया राम के उद्घोष गूंज उठे। हजारों की संख्या में शामिल बराती और शहरवासी इस भव्य दृश्य को देखने के लिए सड़कों पर उमड़ पड़े। बराती बने हुरियारों ने अबीर-गुलाल और रंगों से जमकर होली खेली। पूरा माहौल ऐसा था मानो होली और राम विवाह का अद्भुत संगम हो गया हो। रथ के आगे-पीछे भजन-कीर्तन, ढोल-नगाड़े और नाच-गाने का सिलसिला चलता रहा, जिससे वातावरण में भक्ति और उल्लास दोनों का समावेश हो गया।
परंपरा की 166वीं कड़ी
बरेली की यह राम बरात सदियों पुरानी परंपरा है, जो इस बार अपनी 166वीं कड़ी में पहुंची है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह आयोजन भगवान राम के विवाह की याद में निकाला जाता है, जिसमें राम को दूल्हा और सीता को दुल्हन के रूप में कल्पना की जाती है। होली के ठीक पहले निकलने वाली इस बरात का विशेष महत्व है, क्योंकि यह त्योहार की पूर्व संध्या पर आस्था और खुशी का संदेश देती है। वर्षों से नृसिंह मंदिर समिति और स्थानीय संगठन इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। हर साल इसमें शामिल होने वाले भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है।
रथ पर सजे भगवान राम की मूर्ति को फूलों, मालाओं और रंग-बिरंगे कपड़ों से सजाया गया था।
रथ के चारों ओर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे और पुलिस बल भी तैनात रहा। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए
बरात ने ब्रह्मपुरी, सिविल लाइंस, कोतवाली क्षेत्र और अन्य इलाकों को कवर किया।
रास्ते में घरों की छतों और बालकनियों पर खड़े लोग फूल बरसाते और जयकारे लगाते दिखे।
शहरवासियों का उत्साह और महत्व
इस राम बरात में शामिल होने वाले लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था।
कई परिवार अपने बच्चों को लेकर आए थे ताकि वे इस धार्मिक परंपरा का हिस्सा बन सकें।
युवा बरातियों ने पारंपरिक वेशभूषा में सजकर नाच-गाना किया और
होली के रंगों से मस्ती की। बुजुर्ग भक्तों ने बताया कि यह परंपरा
उन्हें बचपन से जोड़े हुए है और हर साल इसमें शामिल होना उनके लिए आशीर्वाद जैसा है।
होली से पहले निकलने वाली राम बरात न केवल धार्मिक महत्व रखती है,
बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। शहर के विभिन्न वर्गों के लोग
इसमें शामिल होकर एक सूत्र में बंध जाते हैं। इस आयोजन से बरेली की सांस्कृतिक
धरोहर को मजबूती मिलती है और पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनता है।
समिति ने सभी शहरवासियों और भक्तों का आभार जताया है जिन्होंने इस भव्य आयोजन को सफल बनाया।
अगले वर्ष भी यह परंपरा और धूमधाम से निभाई जाएगी।
बरेली में होली का यह अनोखा रंग आस्था और उमंग का बेहतरीन मिश्रण साबित हुआ।