गोरखपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग
पानी खरीदते समय रहे सावधान: डेढ़ लाख बोतल दूषित पानी खप चुका है बाजार में.. खरीदें तो रहें होशियार
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में बोतलबंद पानी पीने वालों के लिए बड़ी चेतावनी है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (FSDA) की जांच में चार स्थानीय कंपनियों के पैक्ड ड्रिंकिंग वाटर के नमूने फेल पाए गए हैं। इनमें खतरनाक कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई है, जो सीधे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जांच रिपोर्ट आने से पहले ही इन ब्रांड्स की करीब डेढ़ लाख बोतलें बाजार में बिक चुकी हैं और उपभोक्ताओं ने पी भी ली हैं।
जांच में सामने आए चार ब्रांड्स
विभाग ने जनवरी में 19 वॉटर प्लांट्स से नमूने लिए थे। रिपोर्ट में चार ब्रांड्स पूरी तरह असुरक्षित पाए गए:
- मैसर्स देवकृपा फूड एंड बेवरेजेज प्रा. लि. (ब्रांड: हाईमैक्स) – नकहा
- मैसर्स जीके फूड्स एंड बेवरेजेज (ब्रांड: गैलीसिया) – सहजनवा
- मैसर्स अजय नीर उद्योग (ब्रांड: एक्वा नीर) – नौसढ़
- श्री कान्हा इंडस्ट्रीज गीडा (ब्रांड: बाटाडू)
इन सभी प्लांट्स गोरखपुर जिले में स्थित हैं और उनके उत्पाद शहर व आसपास के इलाकों में बिकते हैं। खाद्य सुरक्षा के सहायक आयुक्त डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि रिपोर्ट आने के बाद इन चारों कंपनियों के पानी की उत्पादन और बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी गई है। अवैध व्यापार जारी रखने पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
कोलीफॉर्म बैक्टीरिया क्या है और क्यों खतरनाक?
कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मुख्य रूप से मल-मूत्र से जुड़े होते हैं और यह फेकल कंटेमिनेशन का संकेत देते हैं। इनमें E. coli जैसे बैक्टीरिया शामिल हो सकते हैं, जो पीने से पेट संबंधी गंभीर संक्रमण, उल्टी, दस्त, पीलिया, पेट दर्द और किडनी की समस्या पैदा कर सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों पर इसका असर ज्यादा गंभीर होता है। विभाग के अनुसार, ऐसे पानी का सेवन लंबे समय तक करने से स्वास्थ्य को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।
डेढ़ लाख बोतलें पहले ही बाजार में खप गईं
चिंता की बात यह है कि जांच के दौरान नमूने लिए जाने से पहले ही इन ब्रांड्स की लगभग 1.5 लाख बोतलें बाजार में बिक चुकी हैं। लोग रोजमर्रा में यात्रा, ऑफिस या घर पर इनका इस्तेमाल करते रहे हैं। विभाग ने पहले ही नौ इकाइयों का लाइसेंस निलंबित किया था,
लेकिन रिपोर्ट आने के बाद यह संख्या बढ़ गई। उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि
अगर उनके पास इन ब्रांड्स की बोतलें हैं, तो उन्हें तुरंत नष्ट कर दें और इस्तेमाल न करें।
बोतलबंद पानी खरीदते समय क्या सावधानियां बरतें?
- हमेशा BIS (ISI मार्क) वाली प्रतिष्ठित ब्रांड्स चुनें।
- बोतल की सील चेक करें, फटी या ढीली न हो।
- स्थानीय या अनजान ब्रांड्स से बचें, खासकर सस्ते वाले।
- एक्सपायरी डेट और मैन्युफैक्चरिंग डेट जरूर देखें।
- अगर संभव हो तो घर पर उबालकर या RO से पानी पिएं।
- संदिग्ध पानी पीने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
विभाग की कार्रवाई और भविष्य
खाद्य सुरक्षा विभाग ने पूरे प्रदेश में ऐसे अभियानों को तेज करने के निर्देश दिए हैं। गोरखपुर जैसे मामलों से साफ है कि बोतलबंद पानी की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी जरूरी है। उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सेहत पहले, सावधानी जरूरी
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि बाजार में उपलब्ध हर उत्पाद सुरक्षित नहीं होता। बोतलबंद पानी को ‘शुद्ध’ मानकर बेफिक्र न हों। डेढ़ लाख बोतलें दूषित पानी की बिक्री से लाखों लोगों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ सकता है। सतर्क रहें, जागरूक रहें और सुरक्षित पानी चुनें। अगर आपको कोई संदेह हो, तो स्थानीय खाद्य सुरक्षा विभाग से संपर्क करें।
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